corona- crisis in india कोविड काल, स्वस्थ शरीरों का अकाल मौत काल!
गेस्ट कॉलम | देश | मध्य प्रदेश| नया इंडिया| corona- crisis in india कोविड काल, स्वस्थ शरीरों का अकाल मौत काल!

कोविड काल, स्वस्थ शरीरों का अकाल मौत काल!

corona- crisis in india

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।

न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः।।

गीता के इस श्लोक का अर्थ है: आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न आग उसे जला सकती है। न पानी उसे भिगो सकता है, न हवा उसे सुखा सकती है।

(यहां भगवान श्रीकृष्ण ने आत्मा के अजर-अमर और शाश्वत होने की बात की है।)

सबने देखा कि एक युवा हट्टाकट्टा इँसां, जिम में पसीना बहाने के बाद सीढियों पर बेठे बेठे लुढ़क गया !

एक बेहद प्रसिद्ध युवा अभिनेता फ़ोन पर बातें करते हुए असमय कालकवलित हो गया !

एक फ़िटनेस फ़्रीक सरकारी डॉक्टर का, करोना से ठीक होने के बाद, जिम करके घर लोटते ही निधन हो गया! अभी अभी एक आलीशान होटल में अपने बेच के दर्जनों साथी डॉक्टरों के बीच एक स्वस्थ डॉक्टर को डांस करते करते मौत के मुँह में समाते सबने देखा और आज सुबह सुबह यह मनहूस ख़बर भी मिली कि, हमारे बेच के सबसे फ़िट, सबसे ज़्यादा साइक्लिंग, स्वीमिंग और जिम करने वाले युवा हंसमुख मिलनसार, हम जिसे प्यार से लड्डू कहते थे, वो हम सबके प्रिय सुधीर, सुबह मीलों दूरी की साइक्लिंग, फिर दिनभर मरीज़ अस्पताल और रात को घंटों की स्वीमिंग से लौटे, घर में आकर बेठे और तुरंत बेसुध हो नीचे गिर गए !

सब सक्षम थे, लगभग सभी डॉक्टर थे और डॉक्टरों के बीच थे! इन सबको दुनिया का बेहतर से बेहतर उपचार साधन उपलब्ध था लेकिन कोई क्या कर पाया ?  अब इसे विधि का विधान कहें या कुछ और, पर काल ने कितने आराम और शांति से बिना पलकें झपकाये अपना काम कर दिया?

ना किसी को कोई पीड़ा हुई, ना कोई तकलीफ़ और ना ही सुईयों, चीराफाड़ी का दर्द और ना ही मशीनों पर धरती और स्वर्ग के बीच झूलती उतराती ज़िंदगी! ना अस्पतालों में डरे सहमे परिजनों का महीनों तक जमावड़ा लेकिन यूँ जाना भी, कोई जाना है मित्र ?

पर इन सबके इस तरह जाने में एक ट्रेंड है और वो ट्रेंड है सबका बेहद फ़िट होना और उसे क़ायम रखने के लिए इनका ज़रूरत से ज़्यादा एक्सरसाइज़ या श्रम करना और अधिकांश लोग निर्व्यसनी यानी सिगरेट शराब से दूर रहने वाले थे !

तो इसका क्या मतलब निकाला जाए ? क्या व्यसनी होना, आलसी होना बेहतर है ?

कदापि नही !

दुख और तकलीफ़ सिर्फ़ इस बात में है कि कोविड़ काल को आजतक किसी ने भी ठीक से समझा ही नही! माना कि जीवनमृत्यु सुख दुःख, संसारी रथ के दो पहिए हैं और मौत पर कब किसका बस चलता है ? और यही तो गीता सार है! लेकिन मेडिकल साइंस की इतनी तरक़्क़ी और इतने संसाधनों, विधाओं के होते हुए, कोविड़ काल में सम्भावित लक्षण, परिणाम और इस तरह की अकाल मौतों पर सारी दुनिया के विशेषज्ञ अंज़ान क्यों बने हुए हैं !

Read also महिला आरक्षण या प्रियंका का फॉर्मूला?

वैसे इनकी अज्ञानता की पराकाष्ठा विगत दो सालों में सबने देखी और इनके पल पल बदलते बाज़ार प्रायोजित कोविड़ प्रोटोकोल और अनर्गल ज़हरीली दवाइयों की नियति भी सबने भुगती! हज़ारों लाखों लोग एक अनिश्चित जाँच परिणाम के नाम पर, बाज़ारु बाबू कुनीतियों और, अस्पतालों को भर देने वाली क्षुधाओं के चलते, डर तनाव और दहशत का शिकार हो असमय कालकवलित हुए, हमारे देश में इन बाज़ारू अस्पतालों और लाचार मरीज़ों के नतीजों का अगर कभी सक्षम आकलन हो पाया तो इसके बड़े शर्मनाक परिणाम सामने आएँगे, लेकिन ऐसा होगा, इसमें ढेरों संशय हैं ! बेहद ज़रूरी था कि कोविड़ संक्रमण काल में, कोविड़ संक्रमित होकर ठीक हो चुके या कोविड़ वेक्सिन लगे सभी लोगों का लगातार सुपरवीजन और सीरो टेस्ट होता और उनके रक्त के गाड़ेपन (blood viscosity), रेड सेल्स की ऑक्सिजन ग्रहण और परिवहन क्षमता का सतत आकलन भी होता, ख़ासतौर पर एथलेटिक्स, गहन फ़िटनेस वाले व्यक्ति और अत्याधिक तनाव वाली पोस्टिंग्स वाले लोग, डाक्टर्ज़ आदि!

corona- crisis in india

corona- crisis in india

पर सो करोड़ लोगों को मुफ़्त भोजन और सभी देशवासियों को मुफ़्त टीके देने का भागीरथी काम करने वाली सरकार क्या क्या करे, कुछ काम तो विशेषज्ञों का तमग़ा लिए बेठे मेडिकल पुरोधाओं का भी तो था ?

और इसीलिए जिस तरह आज तक लिखी गई हमारी सभी बातें, समय की कसौटी पर खरी उतरीं, उसी तरह विगत दो साल में बार बार लिखी गई यह बात, भी सच साबित होगी कि मानवशरीर के रेड सेल्स की ऑक्सिजन ग्रहण और परिवहन क्षमता में कोविड़ वायरस और इसकी वेक्सिन के असर से बेहद कमी देखी जाएगी, बात बात पर शरीर की ऑक्सिजन डिमांड बढती देखी जाएगी और इसीलिए वातावरण में ऑक्सिजन उपलब्ध होने के बावजूद, रेड सेल्स ना तो ऑक्सिजन सोख पाएँगी और ना ही उसे हार्ट और ब्रेन तक ज़रूरी मात्रा में पहुँचा पाएँगी! इसलिए इतने स्वस्थ और फिट होने के बावजूद, यह रक्त के गाड़ेपन और क्लाटिंग के चलते एक क्षण में कालकवलित हो रहे हैं !

और यही सब तो कोविड़ मरीज़ों के साथ हुआ था, अस्पताल में सारे संसाधन ऑक्सिजन होने के बावजूद, उनके शरीर का रक्त तंत्र साथ नही दे रहा था ! क्लाटिंग होने से फेफड़ों में पहुँचने वाला रक्त वहीं ज़म रहा था, जिसे फेफड़ों की बीमारी कहा जाता रहा !

फिर क्या करें? क्या ना करें ??

सबसे ज़रूरी बात, जितना ज़रूरी हो उतना ही श्रम करें ! ख़ुश रहें, तनावमुक्त रहें, भरपूर नींद लें, अपने सभी शौक़ पूरे करें, अगले चार पाँच साल तक आपने जो भी कमाया है, उसे सुनियोजित कर, उसका आनंद लें, किसके लिए छोड़ जाना चाहते हैं, सोचिए ?

और इससे भी ज़रूरी बात, किसी भी हाल, तनाव या कृत्रिम अभाव की मानसिक तनाव की स्थिति में, आप और आपके परिजन ना आएँ, अनर्गल बहस, कुतर्क ना हों, यह प्रयास ज़रूर करें!

Read also केजरीवाल से नहीं, विचारधारा से डरते विरोधी

चालीस साल से ऊपर वाले और मोटे, डायबिटीज़ बीपी के मरीज़, बाक़ी उपचार के साथ साथ, अपने डॉक्टर की सलाह से आधी गोली डिस्पिरिन या इकोस्प्रिन की ज़रूर लें और हाँ, खुली हवा और धूप बेहद ज़रूरी हैं ! और अब ठंड भी शुरू होने लगी है, ठंड में शरीर की ऑक्सिजन डिमांड वेसे भी बढ जाती है इसलिए मौसम अनुसार पोष्टिक गर्म ताज़ा भोजन ज़रूर लें, तोंद पर अगर थोड़ा फ़ेट चढ भी जाए तो कोई हर्ज नही, बीमारी और शरीर की ज़रूरत पर यह काम ही आएगा और कहते हैं ना कि सुरक्षित महँगी गाड़ियाँ “एयरबेग” के साथ आती है ? साथ ही भरपूर पेय पदार्थ भी लेना है, शाम का समय अपने लिए सुरक्षित कीजिए, तनाव है तो उसे दूर कीजिए, एक दो पेग शराब भी आपके लिए टोनिक का काम करेगी, अगर आपको ज़रूरत लगती हो तो ! और मौसम अनुकूल कपड़े तो पहनें ही लेकिन काम पर जाते समय या किसी भी देरसवेर वक़्त बेवक्त के लिए अपने पास या अपनी गाड़ी में सम्भावित ठंड से बचाव हेतु एक जेकेट मफ़लर और टोपी ज़रूर रखें जिससे आपका सर, नाक कान मुँह गला और छाती ठंड ना खा जाएँ, ध्यान दें हीरोगिरी का समय नही है .. फ़िलहाल! सुरक्षित रहें, ख़ुश रहें और हाँ कुदरत अनुकूल व्यवहार याद है ना, वही, मास्क साफ़सफ़ाई, भीड़ में नही जाना, पेयजल स्त्रोतों का संरक्षण और अपनी आने वाली पीढी के लिए ऑक्सिजन देने वाले पेड़ लगाना ? मिलते हैं जल्द ही, तब तक जय रामजी की !

लेखक: डॉ भुवनेश्वर गर्ग 

Tags :

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ट्रेंडिंग खबरें arrow
x
न्यूज़ फ़्लैश
रचा इतिहास… 1 दिन में रेप के दोषी को कोर्ट ने सुनाई सजा…
रचा इतिहास… 1 दिन में रेप के दोषी को कोर्ट ने सुनाई सजा…