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कोरोना अतिवृष्टि ओलावृष्टि जहां दृष्टि वहां कष्ट

Budget Impact Farmers India

भोपाल। प्रदेश में तीसरी लहर के रूप में जहां कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज हो गई है वहीं दूसरी ओर अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से किसान कराह उठा है। नए वर्ष की शुरुआत में ही जहां तक दृष्टि जा रही है लोगों के कष्ट नजर आ रहे हैं। फिलहाल सावधानी और सतर्कता से कोरोना से बचना जरूरी है जिससे कि दूसरी लहर जैसा कहर देखने को ना मिले।

दरअसल, कई देशों में जहां चौथी और पांचवी लहर आ गई है वहीं देश में तीसरी लहर का कहर न हो इसके लिए चिंता बढ़ गई है। नए संक्रमित मरीज मिलना डरावनी तस्वीर दिखा रहे हैं। वह भी तब जब देश में या तो लोग जांच नहीं करा रहे हैं या सभी जगह जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। सरकार ने फ्रंटलाइन वर्कर और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को बूस्टर डोज लगाना भी शुरू कर दिया है। प्रदेश में भी कोरोना संक्रमित मरीजों की ना केवल संख्या बढ़ रही है वरन कुछ जगह से कोरोना से मृत्यु की खबरें भी आने लगी है। सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल – कॉलेज बंद करने का अभी तक फैसला नहीं लिया है। माना जा रहा है की संक्रांति के बाद स्कूल कॉलेज बंद करने के बारे में निर्णय लिया जा सकता है जबकि 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के बाद बंदिश बढ़ सकती है क्योंकि संक्रमण की रफ्तार यदि इसी तरह बढ़ती रहे तो फिर कुछ कदम उठाना जरूरी हो जाएंगे।

कोरोना की तीसरी लहर से जहां लोग परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में अतिवृष्टि एवं ओलावृष्टि से फसलों को पूरे प्रदेश में भारी नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नुकसान का आकलन करने के लिए किसानों के खेतों तक सरकारी अमले को जाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं एवं 7 दिन के भीतर कलेक्टरों से नुकसान की रिपोर्ट मांगी है। माना जा रहा है कि इसी के आधार पर किसानों को राहत देने की घोषणा मुख्यमंत्री करेंगे। वे स्वयं भी हेलीकॉप्टर से प्रदेश के किसी भी हिस्से में खेत में उतर कर फसल की नुकसान का जायजा लेंगे।

चंबल और बुंदेलखंड इलाके में ज्यादा नुकसान की खबरें आ रही हैं। मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों से कहां है कि वह जिनका वास्तव में नुकसान हुआ है उनकी सूची बनाएं। अपात्र लोगों के नाम सूची में ना जोड़ें जाएं। प्रदेश के लगभग 1500 से भी ज्यादा गांव में नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। लगभग 75 तहसीलें मे प्राकृतिक आपदा का ज्यादा असर माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहां है कि संकट की घड़ी में सरकार पूरी तरह से किसानों के साथ है। कलेक्टर स संवेदनशीलता के साथ किसानों से मिले एवं जिम्मेदारी से कार्य करें प्रभारी मंत्रियों को भी कहा गया है कि वे स्वयं नुकसान का जायजा लें एवं किसानों को ढांढ़स बनाएं।

कुल मिलाकर प्रदेश में कोरोना के शहर के साथ-साथ अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने संकट को और भी बढ़ा दिया है। ऐसे में कोरोना से बचने के लिए जहां अतिरिक्त सतर्कता और सावधानी की आवश्यकता है। वहीं किसानों को तत्काल राहत दिए जाने की भी जरूरत है जिससे कि कष्टों में कमी आ सके।

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