केंद्रीय नेतृत्व को ‘कंफ्यूजन’ दूर करना होगा..
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केंद्रीय नेतृत्व को ‘कंफ्यूजन’ दूर करना होगा..

भोपाल । बदलती भाजपा के फैसले और राज्यों की राजनीति में केंद्रीय नेतृत्व के बढ़ते हस्तक्षेप से मध्यप्रदेश में भी कंफ्यूजन क्रिएट हो रहा है.. दूसरे राज्यों के मुकाबले मध्य प्रदेश सरकार जिसका नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान कर रहे.. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के बीच अहम किरदार निभा रहे फिर भी वहां 2023 विधानसभा चुनाव के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया को ट्रंप कार्ड के तौर पर अब डिसाइडिंग फैक्टर माना जा रहा है.. ऐसे में जब राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश और प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव मध्यप्रदेश में बढ़ती दिलचस्पी के साथ मैदानी दौरे और बंद कमरे की मैराथन बैठक कर रहे.. तो बड़ा संदेश यही दिया जा रहा है कि 2023 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भाजपा जुटचुकी है.. ऐसा नहीं कि 11 विधानसभा क्षेत्र यानी खंडवा लोक सभा समिति चार उपचुनाव को लेकर भाजपा नेतृत्व सतर्क नहीं.. चुनाव वाले क्षेत्रों में सत्ता और संगठन बखूबी सक्रिय हो चुके..

मध्यप्रदेश में तेजी से बदलते घटनाक्रम में यदि शिवराज का आए दिन दिल्ली दौरा नेतृत्व परिवर्तन के कयासों को और बल दे जाता.. तो केंद्रीय मंत्री बनने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्वालियर दौरे और उनके ऐतिहासिक स्वागत अभिनंदन की आड़ में शक्ति प्रदर्शन भी उनकी बढ़ती स्वीकार्यता को रेखांकित कर रहा है.. सरसंघचालक मोहन भागवत का इंदौर द्वारा भले ही कई महीनों पहले तय हो चुका था.. लेकिन उनके द्वारा मध्य प्रदेश का सियासी फीडबैक लेने से इनकार भी नहीं किया जा सकता… लंबे अरसे बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी अपने विवादित बयानों और नए रोड मैप को लेकर सुर्खियां  में बनी हुई है… ग्वालियर चंबल की राजनीति में जब महाराज के मेगा शो को ताकत देने के लिए मुन्ना भैया पहुंच जाते… तो समझा जा सकता है कि ये जोड़ीदार यदि यूं ही कदमताल करते रहे.. तो भाजपा को 2018 विधानसभा चुनाव में जो बड़ा झटका इस क्षेत्र से लगा था अब उसकी भरपाई असंभव नहीं है..

जब ज्योतिरादित्य के ऊपर हाईकमान का वरदहस्त साफ देखा जा सकता तब भीड़ जुटाकर महाराज ने खुद को एक कैसे चेहरे के तौर पर बीजेपी में स्थापित कर लिया जिसे आगामी विधानसभा चुनाव में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता…  वो इस बार फिर सत्ता में वापसी के लिए भाजपा का ट्रंप कार्ड साबित हो सकते है.. ऐसे में भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए जरुरी हो जाता है कि वह शिवराज सिंह चौहान को और मजबूत देखना चाहता.. तो आए दिन सियासी गलियारों में उन अफवाहों पर तुरंत विराम लगाएं .. और बिगड़ते माहौल को सुधारें जिसे विरोधी नेतृत्व परिवर्तन से जोड़ देते हैं… वह बात और है कि शिवराज न सिर्फ चार चुनाव वाले क्षेत्रों में विकास के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे ..

बल्कि अपनी और मोदी सरकार की उपलब्धियों के प्रचार प्रसार के साथ हितग्राहियों को भाजपा के वोट बैंक में तब्दील करने के लिए अब पार्टी कार्यकर्ताओं को जोड़ चुके हैं.. दिल्ली प्रवास के दौरान मंत्रियों से मध्य प्रदेश के लिए नई योजना और फंड समस्या पर अपनी पहली नजर लगाए हुए.. जब मध्यप्रदेश में राजधानी भोपाल में चिंतन मंथन से लेकर ग्वालियर तक सड़क की राजनीति चर्चा में है.. तब प्रदेश के दौरे स्थगित कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से लंबी बैठक कर रहे थे.. जो पिछले दिनों मध्य प्रदेश को बड़ी सौगात दे चुके हैं और अब एक नया रोड मैप बनाने के लिए दिल्ली में मंथन कर रहे .. इसे  इंडस्ट्रियल कॉरिडोर  और नर्मदा किनारे के विशेष मार्ग पर विकास से जोड़कर देखा जा रहा है..  बेफिक्र शिवराज मध्यप्रदेश में दखल रखने वाले अहम नेताओं से सीधा संवाद बनाए हुए ..

चाहे फिर वह नरेंद्र सिंह तोमर हो या ज्योतिरादित्य सिंधिया ही नहीं उमा भारती ही क्यों ना हो सभी से समन्वय और सामंजस स्थापित किए हुए .. बावजूद इसके विपक्षी कांग्रेस मध्य प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन को हवा देती रहती… ऐसे में  भाजपा मोदी शाह नड्डा और भाजपा के रणनीतिकारों के लिए जरूरी है कि वह सस्पेंस जल्द से जल्द खत्म करें.. कांग्रेस सोशल मीडिया के मोर्चे पर अभी भी सत्ता में रहते भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बनी  हुई है..यह संदेश वह 4 उपचुनाव से पहले देना चाहेगी या फिर इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा… यहीं पर सवाल खड़ा होता यदि मध्य प्रदेश  दूसरे राज्यों से अलग तो फिर उसे किसी सोची समझी रणनीति और फार्मूले के मैदान में जाना होगा.. क्या शिवराज मंत्रिमंडल के पुनर्गठन और नए क्राइटेरिया के साथ यह संदेश बदलती भाजपा को दिया जा सकता है..

यह क्राइटेरिया उम्र के मापदंड के अधीन होगा या फिर कामकाज का मूल्यांकन यानी इसका आधार परफारमेंस होगा.. या फिर सोशल इंजीनियर मजबूत करने के लिए नए सिरे से मतदाताओं को संदेश दिया जाएगा.. सवाल यह भी क्या सिंधिया समर्थकों को छेड़ पाना बीजेपी के लिए संभव.. यदि नहीं तो क्या भाजपा के पुराने वरिष्ठ अनुभवी खासतौर से जिन्हें प्रदेश प्रभारी नालायक की श्रेणी में रख चुके क्या उनसे पार्टी नेतृत्व छुटकारा पाना चाहेगा.. क्या यह संभव है और पार्टी जोखिम मोल लेने का साहस जुटा पाएगी.. मुरलीधर चार उपचुनाव वाले क्षेत्रों में से रैगांव और पृथ्वीपुर का दौरा पूरा करने के बाद भोपाल में लगातार बैठकों में व्यस्त है.. महामंत्रियों से फीडबैक लेकर चार उपचुनाव की जरूरी रणनीति पर माथापच्ची के लिए प्रदेश प्रभारी ने अपना प्रभाव बढ़ा दिया है… खबर आ रही है कि शिव प्रकाश और मुरलीधर राव की मौजूदगी में एक और अहम बैठक गुरुवार को हो सकती है.. जिसके लिए मुरलीधर राव वापसी का कार्यक्रम स्थगित कर दिया…

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इस बैठक में दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हो सकते…, जो केंद्रीय मंत्रियों से दिल्ली में मुलाकात के साथ भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले… पिछले दिनों जबलपुर प्रवास पर आए केंद्रीय मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद नड्डा के साथ दिल्ली में चर्चा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.. दोनों के बीच यह मुलाकात कब हुई जब ग्वालियर चंबल क्षेत्र में मोदी सरकार के दो केंद्रीय मंत्री क्षेत्रीय नेता के तौर पर महाराज और मुन्ना भैया ग्वालियर की सड़क पर कदमताल कर रहे थे… नरेंद्र तोमर ने मुरैना अपने संसदीय क्षेत्र की सीमा पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का न सिर्फ स्वागत किया बल्कि उनके मेगा शो का हिस्सा भी बने… नरेंद्र तोमर बाद में देर रात ही भोपाल पहुंच गए.. जो मिंटो हॉल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ शिरकत करेंगे.. इन दोनों नेताओं के बीच अलग से चर्चा से इनकार भी नहीं किया जा सकता..

सवाल भाजपा के पंच परमेश्वर शिव प्रकाश मुरलीधर राव शिवराज सिंह चौहान विष्णु दत्त शर्मा और सुहास भगत की प्रस्तावित गोपनीय बैठक का क्या नरेंद्र सिंह भी हिस्सा बनेंगे… इस बैठक के स्थान को लेकर  अधिकृत जानकारी पार्टी द्वारा नहीं दी जा रही तो इस स्थान को लेकर सस्पेंस रखा गया है… सत्ता और संगठन के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद निगम मंडल की नियुक्तियां लंबित है.. राजगढ़ बैठक से जिन संभागीय संगठन मंत्रियों को दूर रखा गया था पार्टी उन्हें विष्णु दत्त की टीम में बतौर प्रदेश कार्यसमिति सदस्य शामिल कर एक बड़ी पुरानी व्यवस्था खत्म कर चुकी है.. इनमें से भी कुछ लोग एडजस्टमेंट के क्राइटेरिया में निगम मंडल के दावेदार मानी जाते है.. तो सिंधिया समर्थक को भी इंतजार है.. भाजपा इन दिनों कुशाभाऊ ठाकरे का जन्म शताब्दी वर्ष बना रही है.. तो फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर 21 दिन के कार्यक्रम कि सफलता सुनिश्चित करने के लिए कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंप दी गई है..

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