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अस्त व्यस्त पंचायत चुनाव निरस्त

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लगभग 7 वर्षों के बाद प्रदेश में होने जा रहे हैं त्रिस्तरीय पंचायती राज के चुनाव आखिर निरस्त हो ही गए इन चुनाव मे परिसीमन रोटेशन और आरक्षण को लेकर तरह-तरह की दावे आपत्तियां पेश की गई हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई जिस अध्यादेश के तहत यह चुनाव हो रहे थे वह अध्यादेश भी सरकार ने वापस लिया और अंततः लीगल ओपिनियन लेने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज के चुनाव निरस्त कर दिए। madhya pradesh state election

दरअसल प्रदेश में पंचायती राज के चुनाव की घोषणा के साथ ही दावे आपत्तियों का दौर शुरू हो गया था खासकर परिसीमन रोटेशन और आरक्षण संबंधी मामले इतने ऊलझा दिए गए की बीच में स्थिति यह हो गई थी आधे गांव में चुनाव हो रहे हैं आधे गांव में नहीं हो रहे खासकर पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव नहीं हो रहे थे जबकि प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस पिछड़े वर्ग को ना केवल आरक्षण दिए जाने बल्कि एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में दिखाई दिए और इसी के चलते विधानसभा में एक अशासकीय संकल्प पारित किया गया और फिर सरकार ने वह अध्यादेश भी वापस ले लिया जिसके तहत चुनाव हो रहे थे और इसी आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग ने विधि विशेषज्ञ से सलाह लेकर आखिरकार पंचायती राज के चुनाव स्थगित कर दिए और इसी के साथ ही गांव गांव में जहां सन्नाटा पसर गया आव भगत का अभूतपूर्व दौर निकल गया वही अब राजधानी भोपाल से लेकर दिल्ली तक पंचायती चुनाव को लेकर पंचायतें होती रहेगी क्योंकि दोनों ही दल एक दूसरे को इस परिस्थिति के लिए दोषी ठहराते रहेंगे।

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बहरहाल लंबे अरसे बाद होने जा रहे पंचायती राज के चुनाव मैं निरस्त होने के बाद अब कब हो पाएंगे कहना मुश्किल है इतना रायता फैल गया है जो आसानी से सिमटने वाला नहीं है क्योंकि रोटेशन तय करना परिसीमन करने और आरक्षण मैं इतने कानूनी दांव पर पेंच यूपी आसानी से नहीं सुलझने वाले इनको सुलझाते सुलझाते 2023 के विधानसभा के आम चुनाव प्रदेश में आ जाएंगे और फिर 2024 के लोकसभा के चुनाव और उसके बाद ही चुनाव के होने की संभावना बनेगी फिलहाल पिछले 1 महीने से गांव गांव में इन चुनाव को लेकर सर गर्मी थी और जहां पर पहले चरण का मतदान 6 जनवरी को था वहां नामांकन पत्र वापस लेने का समय भी निकल गया था और चुनावी रंग जोर पकड़ने लगा था लेकिन अब गांव गांव में स्यापा की स्थिति बन गई है राजनीति की नर्सरी हरियाली आने के पहले ऊजड गई गांव की पंचायत पंच परमेश्वर के लिए कब तक इंतजार करेंगी कहा नहीं जा सकता।
कुल मिलाकर जिन परिस्थितियों में चुनाव हो रहे थे हर दिन दावे और आपत्तियां सामने आ रही थी गांव गांव में संशय का वातावरण बन रहा था उससे तो अच्छा हुआ चुनाव ही निरस्त हो गए लेकिन अब सभी दलों को मिलकर इस बात का प्रयास करना चाहिए कि ऐसी परिस्थितियां बने जिसमें निर्विघ्न रूप से पंचायती चुनाव संपन्न होता है।

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