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अफसरों के तबादलों की आहट

Cabinet meeting Pachmarhi

भोपाल। प्रदेश में संभावित त्रिस्तरीय पंचायती राज और नगरी निकाय के चुनावों को देखते हुए प्रशासनिक फेरबदल की आहट सुनाई देने लगी है। कभी उपचुनाव तो कभी जनजाति गौरव दिवस समारोह के कारण लंबे अरसे से प्रशासनिक फेरबदल की फाइल अंतिम रूप नहीं ले पाई है लेकिन अब तेजी से इस पर काम हो रहा है। Madhyapradesh transfer of officers

दरअसल, प्रदेश में प्रशासनिक जमावट को लेकर गाहे-बगाहे सवाल खड़े होते रहते हैं क्योंकि कई जगह पद खाली पड़े हैं तो कोई जगह पर लंबे अरसे से अफसर जमे हुए हैं तो कुछ अफसरों के खिलाफ स्थानीय नेताओं का आक्रोश है जिसके कारण अब फेरबदल जरूरी हो गया है। कुछ अफसर जहां एक ही बार कलेक्टर बने और उसके बाद मंत्रालय में पदस्थापना हो गई तो वहीं लगभग 20 ऐसे प्रमोटी आईएएस अफसर भी हैं जिन्हें अब तक किसी भी जिले का कलेक्टर नहीं बनाया गया है जिनमें अमर सिंह बघेल, बेला देवर्षि शुक्ला, उर्मिला शुक्ला, शिवपाल, अमरपाल से अशोक चौहान, चंद्रशेखर बालिबे, सुरेश कुमार, संदीप माकिन, अनिल खरे, सपना निगम, गिरीश शर्मा, सरिता बाला प्रजापति, हरि सिंह मीना, उषा परमार, प्रीति जैन के अलावा सीधी भर्ती के हरजिंदर सिंह और नेहा मारया शामिल है।

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प्रदेश के 52 जिलों में से 21 जिलों में प्रमोटी आईएएस अफसर कलेक्टर बने हुए हैं। इनमें कुछ को दूसरी जिलों में पोस्टिंग भी मिल चुकी है और कुछ ऐसे भी अफसर हैं जो कुछ समय बाद ही वापस मंत्रालय बुला लिए गए। कुछ ऐसे अफसर भी है जिन्हें केवल एक ही बार कलेक्ट्री करने का मौका मिला। मसलन राजेश कौल, मनोज खत्री, राकेश सिंह, स्वतंत्र कुमार सिंह, कृष्ण गोपाल तिवारी, उमेश कुमार, दिलीप कुमार, आरपीएस जादौन, शैलबाला मार्टिन अब यह अफसर दूसरी बार कलेक्ट्री करने की उम्मीद लगाए हुए हैं।

बहरहाल, पिछले दिनों हुए 4 उपचुनाव और उसके बाद राजधानी भोपाल में 15 नवंबर को हुए जनजातिय गौरव दिवस के बाद अब सरकार जरूरी फेरबदल की तैयारी में है। इन दो महत्वपूर्ण अवसरों पर एक तरह से मैदानी समीक्षा भी हो गई है। वहीं दूसरी ओर चंबल और रीवा जैसे बड़े संभागीय मुख्यालयों में आयुक्त का पद लंबे समय से खाली है। इस फेरबदल में इन दोनों जगह संभाग आयुक्त की नियुक्ति भी हो जाएगी और प्रशासनिक फेरबदल के दौरान आईएएस और आईपीएस अफसरों के खिलाफ जनप्रतिनिधियों की नाराजगी है। उसे भी दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

कुल मिलाकर प्रदेश में संभावित त्रिस्तरीय पंचायती राज और नगरी निकाय चुनाव के पहले मैदानी स्तर पर प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य सरकार के स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की कसरत चल रही है। इस फेरबदल में उन तमाम विसंगतियों को भी दूर किया जाएगा। जिसको लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है और इसी के तहत मंत्रालय से अफसरों को जहां मैदान में भेजा जाएगा। वहीं कुछ मैदानी अफसरों को मंत्रालय बुला लिया जाएगा।

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