panchayat elections madhya pradesh पंचायत चुनाव में अभी और भी है पचड़े
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मप्र: पंचायत चुनाव में अभी और भी है पचड़े

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भोपाल। सरकार की तैयारियों को देखकर माना यही जा रहा है कि दिसंबर माह में त्रिस्तरीय पंचायती राज के चुनाव हो जाएंगे लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष की आरक्षण परिसीमन को लेकर लाए गए अधिनियम के खिलाफ कांग्रेस कोर्ट में जायगी और इससे संभावना फिर बन रही है कि कहीं एक बार फिर और ना पंचायतों के चुनाव टालने पड़े। panchayat elections madhya pradesh

दरअसल, प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज और नगरीय निकाय के चुनाव  किन्हीं न किन्हीं कारणों से टाले जाते रहे हैं लेकिन प्रदेश निर्वाचन आयोग ने पिछले दिनों सभी जिला कलेक्टरों से कहा है कि तीन दिन के भीतर परिसीमन और आरक्षण की जानकारी दी जाए इस आदेश के बाद माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग दिसंबर और जनवरी तक पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पूर्ण कर लेना चाहता है। वैसे भी पिछले चुनाव में निर्वाचित पंचायतों का कार्यकाल एक वर्ष पूर्व समाप्त हो गया था। ऐसे में पंचायत चुनाव कराना भी आवश्यक हो गया है और अभी कोरोना का संक्रमण भी सिमट गया है। जिसके कारण सभी प्रतिबंध भी सरकार ने दूर कर दिए हैं तो अब कोई कारण चुनाव टालने का नहीं रह जाता है। 

ऐसे में प्रदेश सरकार और भाजपा संगठन भी चाहता है की चुनाव दिसंबर जनवरी तक हो जाएं। जिससे प्रदेश के नेता अगले वर्ष मार्च-अप्रैल में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर विधानसभा के चुनाव में प्रचार करने के लिए जा सके। यही कारण है असमंजस की स्थिति के बावजूद भी सरकार और संगठन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रदेश में माहौल बनाने के लिए पार्टी के कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। हाल ही में जनजातीय गौरव दिवस मनाए जाने के बाद 4 दिसंबर को एक बार फिर आदिवासियों पर बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है और इसी तरह डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के बहाने दलितों के बीच भी कार्यक्रम किए जाने की योजना बन रही है। आदिवासी क्रांतिकारी टंट्या मामा के बलिदान दिवस के पूर्व 27 नवंबर को दो यात्राओं की शुरुआत भी पार्टी करने जा रही है जो 4 दिसंबर को टंट्या मामा के बलिदान दिवस पर पातालपानी में पहुंचेगी। जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के नेता मौजूद रहेंगे। आज से जो विधायकों की बैठक शुरू हो रही है। उसमें भी आदिवासियों के मामले में पैठ बनाने की रणनीति विधायकों के साथ भी बनाई जाएगी।

 पार्टी कोशिश कर रही है कि जो आदिवासी कभी गोंडवाना से कभी जयस जैसे संगठनों से जुड़ा वह भाजपा से आसानी से जुड़ सकता है। यही नहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने भी प्रदेश में सक्रियता बढ़ा दी है। मंगलवार को प्रदेश महिला कांग्रेस की बैठक हुई जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने महिलाओं से कहा कि इस वक्त महंगाई का सबसे ज्यादा सामना महिलाओं को करना पड़ रहा है। रसोई गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ रहे ह,ैं सब्जी तक महंगी हो गई है इसलिए यह बात महिला कांग्रेस को घर-घर पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महंगाई को लेकर कांग्रेस का जन जागरण अभियान चल रहा है।

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 उसमें भी सहभागिता बढ़ाएं और कांग्रेस के सदस्यता अभियान में सबसे ज्यादा फोकस महिलाओं और युवाओं पर किया जाए। प्रदेश महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना जायसवाल ने अपने कार्यकाल के कामकाज की संभाग बार रिपोर्ट भी प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को सौंपी। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ अगले महीने संगठन का विस्तार करेंगे। जिसमें युवाओं और सक्रिय नेताओं को मौका दिया जाएगा। पिछले दिनों सोनिया गांधी से मुलाकात के दौरान उन्होंने पूरे प्रदेश की चुनावी तैयारियों की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उसमें 2023 के पहले पंचायती राज और नगरीय निकाय के चुनाव की तैयारियों का ब्यौरा भी रखा। यह भी हो सकता है कि वे नेता प्रतिपक्ष का पद छोड़कर किसी युवा नेता को आगे लाएं और 2018 के पहले प्रदेश अध्यक्ष के बनने के बाद जिस तरह से उन्होंने मंडलम और बूथ को मजबूत करने का अभियान चलाया था। वैसे ही इस बार 2023 के पहले वे कसरत करने जा रहे हैं जिसमें विभिन्न जातियों के सम्मेलन कराना भी शामिल है।

कुल मिलाकर यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा 2 दिसंबर जनवरी में बहुप्रतीक्षित त्रिस्तरीय पंचायती राज के चुनाव हो जाएंगे लेकिन विभिन्न मुद्दों पर संशय बना हुआ है। चाहे जिला पंचायत अध्यक्ष पद का असर हो या फिर जो अध्यादेश कांग्रेस सरकार लाई थी वह अध्यादेश भाजपा पलट रही है और जिसके खिलाफ कांग्रेस कोर्ट में जा सकती है। यही कारण है कि पंचायत चुनाव के एक बार पचड़े में भी पड़ने की संभावना बनी हुई है। इसके बावजूद दोनों दलों की जमीनी तैयारियां तेज हो गई है।

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