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पंचायत चुनाव: पिछड़ों पर ऊछाड़-पछाड़

भोपाल। पिछड़ों के आरक्षण के मुद्दे पर पंचायत चुनाव भले ही स्थगित हो गए हो लेकिन 17 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश होनी है इसके लिए पिछड़ा वर्ग आयोग प्रदेश के 29 जिलों में पिछड़े वर्ग के सामाजिक आर्थिक विकास को लेकर बैठक कर चुका है वही आज सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर बैठक हो रही है जिसमें अब तक की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।

दरअसल, पंचायत चुनाव नगरी निकाय चुनाव नौकरियों में पिछड़े वर्ग को आरक्षण मिले प्रदेश के दोनों ही प्रमुख भाजपा और कांग्रेस आमने – सामने है। एक – दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप है और पिछड़े वर्ग के हिमायती बनने की होड़ लगी हुई है। इसी वहीं मुहिम के तहत भाजपा अपनी तैयारी कर रही है जिसके चलते वह 17 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली खेती में मजबूत पक्ष रख सके। तमाम तरह के जुटाए गए हैं गोष्ठी आयोजित की जा रही है। पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा जिलों से पंचायत चुनाव में अनारक्षित सीटों पर जीत हासिल करने वाले ओबीसी के नेताओं की जानकारी मांगी गई है। इसके साथ ही पिछड़ा वर्ग के पंचायतों में मौजूद वोटर की जानकारी भी मांगी गई है। सभी जगह से 7 जनवरी तक जानकारी मांगी गई थी लेकिन दर्जनभर जिलों से ही रिपोर्ट भेजी गई है। इसके लिए अब 10 जनवरी आज तक रिपोर्ट के लिए समय दिया गया है और आज आंकड़ों को लेकर मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बैठक लेंगे और जो आंकड़े प्रदेशभर से आए हैं उन पर विस्तृत चर्चा होगी और इसी के बाद एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी जो सुप्रीम कोर्ट में देश होनी है।

बहरहाल, प्रदेश में एक बार फिर पिछड़े वर्ग पर ऊछाड पछाड शुरू हो चुकी है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में गोष्ठी आयोजित की गई हैं। जिसमें पिछड़े वर्ग के आरक्षण पर विचार विमर्श हुआ राजधानी भोपाल में भारतीय जनता पार्टी पिछड़े वर्ग मोर्चा की मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं विधायक कृष्णा गौर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेसका भरोसा सिर्फ समाज को बांटो और राज करो की नीति का रहा है। कांग्रेस नहीं चाहती कि पिछड़ा वर्ग को राजनीतिक और आर्थिक बराबरी का अधिकार मिले इसलिए 70 सालों तक शासन करने वाली कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं दिया।

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वहीं सागर में भाजपा पिछड़ा वर्ग की प्रबुद्ध जन संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि आज की संगोष्ठी में मुख्य रूप से दो विषय हैं। एक विषय यह है कि चाहे पंचायत चुनाव हो या नगरी निकाय चुनाव हो इनमें पिछड़ा वर्ग को आरक्षण मिले दिल्ली और दूसरा यह कि पिछड़ा वर्ग के जो छात्र छात्राएं हैं। इनको शासकीय नौकरियों परीक्षाओं में 27% आरक्षण मिले। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के साथ शिवराज सरकार अन्याय नहीं होने देगी सुप्रीम कोर्ट के रिवीजन याचिका में सरकार अपना मजबूती से पक्ष रखेगी।

जाहिर है प्रदेश में पिछड़े वर्ग को आरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस इस मुद्दे पर पिछड़े वर्ग के बीच निर्णायक बढ़त चाहते हैं और कभी कांग्रेस तो कभी भा जा पा कोर्ट की शरण में पहुंचते कभी पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच और कभी आम जनता के बीच जिससे कि पिछड़े वर्ग के हिमायती होने का संदेश संप्रेषित हो सके।

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