शिवराज सरकार में भरे सिंधिया समर्थक

भोपाल। मध्य प्रदेश की एक सौ दिन पुरानी शिवराज सिंह सरकार में गुरुवार को बड़ा विस्तार हुआ। कार्यवाहक राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने गुरुवार को सुबह 11 बजे 28 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। इसमें 20 कैबिनेट और आठ राज्य मंत्री शामिल हैं। पार्टी के पुराने नेताओं में से आठ बार विधायक रहे गोपाल भार्गव को एक बार फिर मंत्री बनाया गया। शिवराज सरकार में पहले भी मंत्री रह चुकीं यशोधरा राजे को भी मंत्री बनाया गया। शिवराज सरकार में मंत्री रह चुके विजय शाह, जगदीश देवड़ा और भूपेंद्र सिंह को फिर से गुरुवार को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई।

गुरुवार को राज्यपाल ने जिन 28 मंत्रियों ने शपथ दिलाई उनें से नौ सिंधिया खेमे से हैं। सिंधिया खेमे के दो मंत्री पहले ही शिवराज की मिनी कैबिनेट में शपथ से चुके थे। गुरुवार को शपथ लेने वालों में सात लोग शिवराज चौहान की सरकार में पहले मंत्री रह चुके हैं। शपथ लेने वाले चार नेता ऐसे हैं, जो तीन महीने पहले तक कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे थे। शिवराज की टीम में अब मुख्यमंत्री को मिला कर 34 मंत्री हैं। इनमें 59 फीसदी मंत्री 2018 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते हुए हैं। बाकी 41 फीसदी यानी 14 मंत्री कांग्रेस पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए नेता हैं। ये अभी विधायक भी नहीं है क्योंकि इन्होंने कांग्रेस छोड़ते समय विधानसभा से भी इस्तीफा दे दिया था।

इससे पहले कमलनाथ की सरकार में सिंधिया खेमे के छह विधायक मंत्री थे। इनमें से सभी- गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर, इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी और महेंद्र सिंह सिसोदिया अब शिवराज की सरकार में कैबिनेट मंत्री बन चुके हैं। इनमें से राजपूत और सिलावट ने 21 अप्रैल को शिवराज की मिनी कैबिनेट में शपथ ले ली थी। इनके अलावा पांच और नेता गुरुवार को शिवराज की टीम में मंत्री बने हैं। गुरुवार को राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, बृजेंद्र सिंह यादव, गिर्राज दंडोतिया, सुरेंद्र धाकड़ और ओपीएस भदौरिया। राज्यवर्धन कैबिनेट मंत्री बने हैं। बाकी चार राज्य मंत्री बनाए गए हैं।

 

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