शिवराज पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। राज्यपाल के निर्देश के बावजूद मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार के विश्वास मत हासिल नहीं करने के विरोध में भाजपा के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि राज्यपाल ने 16 मार्च को विश्वास मत परीक्षण कराने को कहा था लेकिन विधानसभा अध्यक्ष शक्ति परीक्षण नहीं करा रहे हैं। चौहान की ओर से सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि विश्वास मत का परीक्षण जल्दी कराने का निर्देश दिया जाए।

असल में भाजपा नेताओं को पहले से इसका अंदाजा था कि विश्वास मत परीक्षण टल सकता है। तभी रविवार को दिल्ली में शिवराज सिंह चौहान और अन्य नेताओं ने इस पर विचार किया था और सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से भी मुलाकात की थी। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को इस मसले पर सुनवाई हो सकती है। पर अदालत का फैसला आने में देरी होने की संभावना है। तभी कहा जा रहा है कि अब मध्य प्रदेश का मामला भी कर्नाटक की तरह लंबा खींच सकता है। वहां एक महीने तक यह मामला लंबित रहा था। उसके बाद विधानसभा में चार दिन तक विश्वास मत पर बहस होती रही थी।

मध्य प्रदेश में बताया जा रहा है कि कमलनाथ सरकार विश्वास मत परीक्षण से पहले बजट पेश करना चाह रही है। ऐसे में यदि 27 मार्च को विधानसभा की कार्यवाही शुरू भी होती है तो सरकार सबसे पहले बजट पेश करेगी, फिर उस पर तीन से चार दिन तक चर्चा कर सकती है। स्पीकर भी सुप्रीम कोर्ट से निर्देश मिलने का इंतजार कर सकते हैं।

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