stop using plastic : कपड़े के बैग उपयोग करने की दिलाई शपथ
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मध्यप्रदेश : स्वच्छ भारत के संदेश के साथ प्लास्टिक मुक्त जीवन के लिए महिलाओं की पहल अनुकरणीय है

stop using plastic

शाजापुर | ये हम सभी जानते हैं कि प्लास्टिक हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ( stop using plastic) सरकारी सख्ती के बीच मार्केट में प्लास्टिक की जगह पेपर बैग और कपड़े के बैग आ चुके हैं लेकिन फिर भी प्लास्टिक और पॉलिथिन का उपयोग रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इससे प्रदूषण फैल रहा है और हमारा स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इन सबके बीच मध्यप्रदेश से एक उम्मीदभरी खबर आई है। हाल ही में मध्यप्रदेश में प्लास्टिक छोड़ कपड़े के बैग उपयोग करने की मुहिम चलाई गई है। । कई गांव वालों को इस बात की शपथ दिलाई गई है और यहां कई गांवों में महिलाएं कपड़े के बैग बनाने का काम करके एक सकारात्मक पहल से जुड़ी हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में तीन आर (Reduce, Reuse, Recycle) के तहत पॉलिथिन और एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का शानदार तरीके से निदान किया जा रहा है। यह जरूरी है इसलिए पहल मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) प्लास्टिक के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाते हुए शुरू की है। यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के दूसरे चरण के तहत है। इसका उद्देश्य गांवों में दृश्य स्वच्छता लाने के लिए ओडीएफ की स्थिति, ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन करना है। जिला पंचायत शाजापुर की सीईओ सुश्री मीशा सिंह के अनुसार प्लास्टिक के खिलाफ लड़ाई में महिलाओं को भागीदार बनाया जा रहा है।

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इन गांवों में दिलाई गई शपथ

स्वच्छ भारत मिशन के तहत कलेक्टर दिनेश जैन और जिला पंचायत सीईओ मीशा सिंह के मार्गदर्शन में यह मुहिम चल रही है। मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन जिला शाजापुर द्वारा गठित ग्रामीण समूहों की महिलाओं को सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही हाथ से सिले हुए कपड़े के बैग का उपयोग प्रारंभ करने के लिए शपथ दिलाई गई है। इसकी शुरुआत झोंकर, सजोद, देवलाबिहार, चकजियाजिपुर, पिपलिया इंदौर एंव टिमायची ग्रामों में पिछले दिनों जाकर शपथ दिलाई गई। इस मुहिम में 6 गांवों के 80 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 852 महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। गांव वालों को प्लास्टिक का उपयोग बंद करने के साथ सकारात्मक जीवन के लिए कई और शपथ दिलाते हुए साफ-सफाई के नियम बताए गए।

स्व-सहायका समूह की महिलाओं द्वारा इस कार्य के लिए संकल्प लिया ( stop using plastic)

सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करना एंव हाथ से सिले हुए कपड़े के बैग का उपयोग शुरु करने के बारे में बताया गया।  साथ ही गीले कचरे एंव सूखे कचरे को अलग रखने के लिए ग्रामीणों को जानकारी देकर इस कार्य के लिए प्रेरित किया। साथ ही स्व-सहायका समूह की महिलाओं द्वारा भी इस कार्य को करने के लिए संकल्प लिया गया। स्वच्छ भारत मिशन में कचरे की गाड़ी में सूखी और गीला कचरा अलग करके ही फेंका जाता है। अपने आस-पास भी सफाई रखने के लिए निर्देश दिए गये।

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प्लास्टिक मुक्त होगा भविष्य
बैग बनाने के लिए महिलाएं कपड़े के बचे हुए टुकड़ों और पुराने कपड़ों का उपयोग करती हैं। घरेलू स्तर की इस पहल से पॉलीथिन और प्लास्टिक बैग की आवश्यकता कम होगी, जिससे भविष्य प्लास्टिक मुक्त होने की एक उम्मीद जगी है।

यह भी हो रहा काम
234 गांवों को ओडीएफ प्लस बनाने के लिए जिला प्रशासन तरल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए व्यक्तिगत और सामुदायिक सोख गड्ढों के निर्माण की निगरानी कर रहा है। स्वच्छता, स्वच्छता, हाथ धोने की अच्छी आदतों और ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के संदेश के साथ स्वच्छता रथ (वैन) गांव-गांव जा रहे हैं। स्वच्छता वैन जन केंद्रित गतिविधियों का आयोजन भी करती हैं, आमतौर पर गांवों में व्यस्त स्थानों जैसे बाजारों और मंदिरों में जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं।

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