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सरकार से ज्यादा पार्टी की चिंता

उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे ने डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। उनको ऐसा लग रहा है कि अब सरकार बचाना मुश्किल है इसलिए पार्टी पर अपना नियंत्रण बनाए रखने का प्रयास तेज हो गया है। इसी प्रयास के तहत उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को पार्टी के जिला प्रमुखों से संवाद किया। उन्होंने शिव सेना भवन से जिला ईकाई के प्रमुखों से वर्चुअल संवाद किया और मौजूदा संकट के बारे में उनकी राय जानी। बताया जा रहा है कि एक सांगली जिला ईकाई को छोड़ कर बाकी सभी जिलों के प्रमुखों ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के प्रति आस्था दिखाई। इसके एक दिन बाद शनिवार को उद्धव ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई।

शिव सेना के जिला प्रमुखों की तरह राष्ट्रीय कार्यकारिणी के भी लगभग सभी सदस्यों ने उद्धव के नेतृत्व में आस्था दिखाई। इस तरह से ऐसा लग रहा है कि विधायकों और सांसदों में भले बागी गुट ने सेंध लगाई हो या वहां उनका बहुमत दिख रहा हो। लेकिन पार्टी संगठन पर ठाकरे परिवार की पकड़ मजबूत है। शिव सेना का मानना है कि अगर पार्टी संगठन अपने नियंत्रण में रहे तो बागी विधायकों को लौटना पड़ेगा। उनको यह भी भरोसा है कि संगठन के दम पर वे दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में अपनी ताकत दिखा सकते हैं। संगठन के भरोसे ही उद्धव ठाकरे को पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह बचाने का भरोसा है। हालांकि चुनाव आयोग इस बारे में सिर्फ संगठन के आधार पर फैसला नहीं करता है। उसे विधायकों और सांसदों की संख्या भी देखनी पड़ती है।

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