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भाजपा की सरकारों से शिंदे-फड़नवीस की मुश्किल

महाराष्ट्र की सरकार चला रहे एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फड़नवीस की मुश्किलें समाप्त नहीं हो रही हैं। दोनों नेता एक मसला निपटाते हैं और दूसरी समस्या खड़ी हो जाती है। इस साल 30 जून को एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री और देवेंद्र फड़नवीस उप मुख्यमंत्री बने हैं और तब से हर दिन कोई न कोई समस्या खड़ी हो रही है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि समस्या विपक्षी पार्टियों की वजह से नहीं खड़ी हो रही है, बल्कि डबल इंजन की सरकार के कारण हो रही है। तभी केंद्र सरकार के कारण, कभी गुजरात सरकार के कारण, कभी कर्नाटक सरकार के कारण तो कभी राज्यपाल के कारण। सब डबल इंजन सरकार वाले हैं!

शिंदे और फड़नवीस की ताजा सरदर्दी कर्नाटक के साथ चल रहा सीमा विवाद है। दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद पुराना है लेकिन अभी यह फिर उभर गया है। दोनों तरफ से दावे हो रहे हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने दावा किया है कि महाराष्ट्र के सांगली जिले के कुछ गांव कर्नाटक में शामिल होना चाहते हैं। भाजपा शासित कर्नाटक के मुख्यमंत्री के इस दावे के बाद राज्य में हलचल मची है। शिव सेना और एनसीपी दोनों इसे मुद्दा बना रही हैं। ध्यान रहे एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार लंबे समय से कर्नाटक के बेलगाम को महाराष्ट्र में शामिल करने की मांग करते रहे हैं। सो, एनसीपी और शिव सेना कर्नाटक के मराठी भाषी इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल करने की मांग कर रही हैं तो कर्नाटक के नेता महाराष्ट्र के कुछ गांवों के कर्नाटक में शामिल होने की मांग का दावा कर रहे हैं।

इससे पहले मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तीनों जैसे तैसे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के बयान से पैदा हुए विवाद को सुलझाने में जुटे थे। राज्यपाल कोश्यारी ने एक कार्यक्रम में कह दिया कि छत्रपति शिवाजी महाराज पुराने आईकॉन हो गए हैं और महाराष्ट्र के युवाओं को बाबा साहेब अंबेडकर और नितिन गडकरी में अपना नया आईकॉन देखना चाहिए। इसे लेकर एकनाथ शिंदे गुट के शिव सेना के  नेताओं ने भी राज्यपाल का विरोध किया, जबकि उद्धव ठाकरे गुट ने आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया हुआ है।

इससे कुछ ही दिन पहले महाराष्ट्र की बड़ी परियोजनाओं के गुजरात जाने का विवाद हुआ था। गुजरात चुनाव की चिंता में महाराष्ट्र में लगने वाली दो बड़ी परियोजनाएं गुजरात चली गईं। पहले वेदांता-फॉक्सकॉन का सवा लाख करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट गुजरात गया और उसके बाद एयर बस और टाटा की साझेदारी से कार्गो विमान बनाने का कारखाना भी गुजरात चला गया। चुनाव की घोषणा से ऐन पहले प्रधानमंत्री ने इस परियोजना का उद्घाटन किया। विपक्षी पार्टियों ने इसे भी बड़ा मुद्दा बनाया था। सो, कर्नाटक के साथ सीमा विवाद से लेकर राज्यपाल द्वारा महाराष्ट्र के आईकॉन के अपमान और बड़ी परियोजनाओं के गुजरात जाने की वजह से सरकार बैकफुट पर है। शिंदे गुट के कई नेता बेचैन हो रहे हैं।

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