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Saturday, April 10, 2021
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Corona के बढ़ते मामलों के कारण फिर से पलायन की तैयारी कर रहे मुंबई के प्रवासी मजदूर

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मुंबई। महाराष्ट्र में Corona महामारी एक बार फिर अपने चरम पर है। इस बीच मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में काम करने वाले हजारों प्रवासियों को एक बार फिर पलायन का डर सताने लगा है, किसी भी समय अपने गृह नगर लौटने की संभावना हो सकती है इसलिए एक बार फिर से मजदूर लोगों ने अपने बैग पैक का मन बना रहे है क्योकि राज्य में Corona के मामले बढ़ते जा रहे है

पिछले साल महामारी फैलने के बाद लगाए गए Lockdown के कारण महाराष्ट्र से हजारों प्रवासी मजदूरों को पलायन करना पड़ा था। जब Lockdown खुला और सामान्य स्थिति लौटने लगी तो यह मजदूर भी अपने काम पर लौट आए थे। अब उन्हें काम पर लौटे मुश्किल से छह महीने भी नहीं हुए हैं, मगर उन्हें एक बार फिर पलायन का डर सताने लगा है राज्य में corona virus की दूसरी लहर चल रही है और रोजाना हजारों मामले सामने आ रहे हैं। यही वजह है कि वह पहले से ही अपना बैग पैक करने लगे हैं।

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Maharashtra में रात में Curfew लगाया गया है, जबकि दिन में काम से बाहर निकलने वाले लोगों के लिए कड़े प्रतिबंध और नियम निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा राज्य भर में सप्ताहांत के दौरान Lockdown की घोषणा हो चुकी है। इस स्थिति को देखते हुए India के विभिन्न हिस्सों के प्रवासियों में एक बार फिर से अपने पलायन को लेकर डर पैदा हो गया है।

इनमें से अधिकांश कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिक हैं जो कि मुख्य तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, तेलंगाना और ओडिशा से संबंध रखते हैं। पिछले साल लगाए गए Lockdown के बाद नौकरी या अन्य काम नहीं मिलने के कारण अधिकांश प्रवासी मजदूर अपने गृह नगर लौट गए थे।

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यह प्रवासी मजदूर लाखों छोटे या मध्यम उद्योगों के अलावा छोटे कारखानों, कार्यशालाओं, गोदामों, होटलों, रेस्तरां, डिलीवरी चेन, बड़े और छोटे कार्यालयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और यहां तक कि बड़ी खुदरा दुकानों, शॉपिंग सेंटरों और ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में कार्यरत थे। जब चीजें सामान्य हुई तो प्रवासी मजदूरों ने करीब छह महीने पहले फिर से राज्य में लौटना शुरू कर दिया था और उन्हें अब ऐसा ही भय सताने लगा है कि राज्य में पूर्ण Lockdown की घोषणा हुई तो उन्हें दोबारा से अपने घर लौटना पड़ सकता है।

धारावी लेदर गुड्स मैन्युफैक्च रिंग एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश सोनवणे ने बताया, पिछले साल प्रवासियों ने पहली बार अपने छोटे शहरों या गांवों में भागने की यातनाओं का सामना करने का अनुभव किया था। इस बार वे मानसिक रूप से बेहतर रूप से तैयार हैं और स्थिति बिगड़ने से पहले बाहर निकालने की योजना बना रहे हैं। धारावी गारमेंट्स मैन्युफैक्च र्स एसोसिएशन के प्रवक्ता और कांग्रेस बीएमसी नगर निगम कॉर्पोरेटर हाजी बब्बू खान ने कहा कि इस साल कोविड-19 की स्थिति 2020 की तुलना में कई गुना खराब दिखाई दे रही है।

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खान ने कहा कि पिछले साल तो प्रवासी मजदूरों की मदद करने वाले कई लोग एवं संगठन थे, जो उन्हें भोजन, आश्रय, दवाइयां आदि की सुविधा दे रहे थे। मगर इस साल वह भी गायब हैं, क्योंकि गैर-सरकारी संगठन और धर्मार्थ संगठन भी अपने संसाधनों को समाप्त कर चुके हैं। यही वजह है कि अब स्थिति 2020 की तुलना में और भी गंभीर है। राजेश, खान और अन्य लोगों का कहना है कि धारावी का अनुमानित 80 प्रतिशत श्रम बल अक्टूबर तक वापस आ गया था, मगर अब उनमें से आधे से अधिक लोग अगले कुछ दिनों में फिर से अपने गृह नगर या गांव लौटने की तैयारी कर रहे हैं।

 

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