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दारूल उलूम के मुफ्ती कासिम ने फैसले पर हैरानी जताई

साहरनपुर। अयोध्या जमीन विवाद पर आज को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी बनारसी ने हैरानी जताई। मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने अपने बयान में कहा कि बाबरी मस्जिद के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला सामने आया है, यह हमारे लिए हैरतअंगेज और समझ से परे है।

मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि “इस तरह स्पष्ट सबूतों के बावजूद यह फैसला समझ में आने वाला नहीं है। दूसरी बात यह कि मुकदमा विवादित भूमि पर मालिकाना हक का था। कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जमीन का मालिक कौन है। उन्होंने कहा कि “जहां तक मस्जिद का ताल्लुक है तो हमेशा से हमारा यह रुख रहा है कि मस्जिद अल्लाह की मिल्कियत है और मुसलमान मस्जिद की जमीन का मालिक नहीं होता। जिस जगह एक बार मस्जिद बन गई वह मस्जिद ही रहती है। मस्जिद की हैसियत को किसी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।

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मौलाना बनारसी ने कहा कि “हमारी यही अपील है कि अमनो-अमान हर हाल में बाकी रखना चाहिए। मुसलमान न कोई खुद ऐसी हरकत करें जो विवाद का कारण बने और न किसी के उकसावे में आकर कोई गलत कदम उठाएं। अमनों अमान को कायम रखें, ये वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है।”
उन्होंने कहा कि सवाल यह पैदा होता है कि इस फैसले को कबूल करें न करें। इसका निर्णय मामले के पक्षकार करेंगे और यह भी वही तय करेंगे कि इसमें आगे क्या कदम उठाना है।

ज्ञात हो कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने विवादित भूमि पर मंदिर बनाने के लिए सरकार को आदेश दिया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह तीन से चार महीने के भीतर सेंट्रल गवर्नमेंट ट्रस्ट की स्थापना के लिए योजना बनाए। अदालत ने अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को प्रदान करने के निर्देश दिए।

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