देश | महाराष्ट्र

Maharashtra : CBI ने नागपुर में अनिल देशमुख के घर पर छापे मारे, सुबह से हो रही है छापेमारी

Nagpur: CBI महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के आवास पर और यहां अन्य स्थानों पर छापे मार रही है. ये छापेमारी भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद की जा रही है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के सूत्रों ने बताया कि एजेंसी की एक टीम शुक्रवार रात नागपुर पहुंची थी और शनिवार सुबह से छापेमारी की जा रही है. देशमुख का घर नागपुर के सिविल लाइन्स इलाके में जीपीओ स्कॉयर में है. उन्होंने बताया कि सीबीआई की टीम देशमुख के निर्वाचन क्षेत्र कातोल कस्बे का भी दौरा कर सकती है जो नागपुर से 60 किलोमीटर दूर है.

महीने के शुरूआत में दिया था इस्तीफा

सीबीआई ने देशमुख के खिलाफ मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करने संबंधी मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रारंभिक जांच शुरू करने के बाद एक प्राथमिकी दर्ज की थी. सीबीआई मुंबई में देशमुख से जुड़े परिसरों के अलावा कई अन्य स्थानों पर तलाश कर रही है. देशमुख ने इस महीने की शुरुआत में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था जब उच्च न्यायालय ने साबीआई को उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने को कहा था.

इसे भी पढ़ें- Corona ने सिखाई एकजुटता, पाकिस्तान में भारत के कोरोना हालातों पर संवेदनाएं कर रही है Trend

क्या थे आरोप

परमबीर सिंह ने दावा किया था कि देशमुख ने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे समेत अन्य अधिकारियों को बार एवं रेस्तरां से 100 करोड़ रुपए की वसूली करने को कहा था. वहीं, वाजे राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की जांच का सामने कर रहे हैं. यह जांच मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटकों से भरी एसयूवी मिलने के मामले से जुड़ी है. सिंह ने शुरुआत में उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि देशमुख के बारे में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और अन्य वरिष्ठ नेताओं से शिकायत करने के बाद उनका तबादला किया गया.

इसे भी पढ़ें- Delhi High Court ने फिर दिखाए कड़े तेवर कहा-ऑक्सीजन आपूर्ती में बाधा उत्पन्न करने वाले व्यक्ति को ‘लटका देंगे’

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

ताजा पोस्ट | समाचार मुख्य

कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार मुआवजा नहीं दे सकेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना से मरने वाले हर मरीज के परिजनों को मुआवजा नहीं दे सकती है। कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने कहा है कि वह सबको मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना से जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार चार लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना से होने वाली हर मौत को कोविड मौत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने कहा है कि आपदा कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है। सरकार का कहना है कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजा दिया जाए और दूसरी पर नहीं, तो यह गलत होगा। केंद्र ने 183 पन्नों के अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ से होता है। अगर राज्यों को हर मौत के लिए चार लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, तो उनका पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केंद्र का कहना है कि अगर कोरोना से मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा देने का राज्यों को निर्देश दिया गया तो इससे कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड से हुई मौत के रूप में ही रिकार्ड किया जाना चाहिए। फिर चाहे वह मौतें कहीं भी क्यों न हुईं हों।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ अस्पतालों में हुई कोरोना संक्रमितों की मौत को ही कोविड डेथ के रूप में रिकार्ड किया जाता था। घर पर या अस्पताल की पार्किंग या गेट पर होने वाली मौतों को भी कोविड रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा था। इस वजह से मौत के आंकड़ों में विसंगतियां देखने को मिल रही थीं। सरकार ने इस तरह की हर मौत को कोविड डेथ के रूप में दर्ज करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करेगा।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *