गहलोत ने साबित किया बहुमत

जयपुर। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर आया संकट टल गया है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को विधानसभा में सरकार का बहुमत साबित किया। सरकार की ओर से पेश किए गए विश्वास प्रस्ताव पर तीन घंटे तक बहस चली, जिसके बाद ध्वनि मत से उनकी सरकार ने बहुमत साबित किया। गौरतलब है कि सचिन पायलट सहित पार्टी के 19 विधायक करीब एक महीने तक दिल्ली से सटे गुड़गांव और मानेसर में रहे थे और उस दौरान कांग्रेस के विधायकों को जयपुर और जैसलमेर में रखा गया था।

बहरहाल, शुक्रवार को विश्वास मत प्रस्ताव पर बहस के दौरान मुख्यमंत्री गहलोत ने भाजपा और केंद्र सरकार पर जम कर निशाना साधा। उन्होंने कहा- भाजपा और उनके हाईकमान ने सरकार गिराने की कोशिश की थी, लेकिन राजस्थान में सियासी घटनाक्रम का जिस तरह अंत हुआ, उससे अमित शाह को धक्का लगा। सरकार के विश्वास मत पर बहुमत साबित करने के बाद विधानसभा 21 अगस्त तक स्थगित कर दी गई।

गहलोत ने भाजपा और केंद्र सरकार से तीन सवाल पूछे। उन्होंने पूछा- क्या ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स विभाग का दुरुपयोग नहीं हो रहा? जब आप किसी से फोन पर बात करते हैं तो क्या सामने वाले से ऐसा नहीं कहते कि फेस टाइम और वॉट्सऐप के जरिए बात करें? क्या लोकतंत्र में ये कोई अच्छी बात है? मुख्यमंत्री ने कहा- भाजपा नेताओं की स्थिति ऐसी है जैसे सौ-सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। मैं 69 साल का हूं, 50 साल से राजनीति में हूं। आज लोकतंत्र को लेकर मन में चिंता है। विपक्ष जितनी चाहे कोशिश कर ले, लेकिन सरकार गिरने नहीं दूंगा।

इससे पहले विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। कांग्रेस के चीफ व्हिप महेश जोशी ने स्पीकर सीपी जोशी के सामने विश्वास मत प्रस्ताव का नोटिस रखा। मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल लालजी टंडन और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को श्रद्धांजलि देने के बाद स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी। कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने विश्वास मत प्रस्ताव रखा और बहस शुरू हो गई। अंत में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बहस का जवाब दिया और विश्वास मत प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित  हो गया।

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