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दूसरे दिन भी ठप्प रही संसद

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में दूसरे दिन की कार्यवाही भी सुचारू रूप से नहीं चल सकी। कोरोना महामारी के बीच पहली बार मंगलवार को संसद के दोनों सदनों का कामकाज एक साथ सुबह 11 बजे शुरू हुआ। लेकिन कार्यवाही शुरू होते ही सदस्यों ने पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमत और जरूरी चीजों की महंगाई पर चर्चा कराने की मांग शुरू कर दी। इसी मसले पर सोमवार को भी विपक्ष ने दोनों सदनों में हंगामा किया था और दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चल पाई थी।

मंगलवार को भी कार्यवाही शुरू होते ही पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों को लेकर विपक्ष ने जम कर हंगामा किया। दोनों सदनों में महंगाई के खिलाफ नारेबाजी हुई। लोकसभा में विपक्ष के सांसदों ने वेल में जाकर नारेबाजी की। विपक्ष के हंगामे की वजह से दोनों सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। लेकिन हर स्थगन के बाद विपक्ष ने पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमत को लेकर हंगामा किया और चर्चा की मांग की। कई बार के स्थगन के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच संसद के टेलीविजन चैनल पर उनको ब्लैकआउट कर दिया गया था। कांग्रेस सांसदों ने जब पूछा कि उन्हे बोलते वक्त ब्लैकआउट क्यों किया गया तो लोकसभा स्पीकर ने कहा- हम हंगामा नहीं दिखा सकते। लोकसभा में पूर्व मंत्री हरसिमरत कौर बादल और वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच कृषि कानूनों को लेकर तीखी बहस हुई। बादल ने सरकार के नए कृषि कानूनों को देश की संघीय व्यवस्था में केंद्र सरकार का हस्तक्षेप करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार जिसे किसानों का विकल्प कह रही है उसी के विरोध में किसान दिल्ली की सीमाओं पर लंबे समय से डटे हुए हैं।

उधर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने महंगाई के मुद्दे पर बहस कराने के लिए उप सभापति से मांग की। उन्होंने कहा- मैं आपको मनाने में असफल हूं, लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों के साथ-साथ दूसरी जरूरी सामानों की कीमत भी बढ़ी है और इससे देश की जनता परेशान है। इस पर चर्चा होनी ही चाहिए।

विपक्ष की नारेबाजी के बीच उप सभापति ने राज्यसभा में मध्यस्थता कानून पर चर्चा शुरू कराई। यह विधेयक लोकसभा से पहले पारित हो चुका है। इस पर कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा- सदन की परंपरा रही है कि जब तक सदन के समक्ष उपस्थित किसी विषय का समाधान नहीं निकल आता तब तक किसी और सरकारी कामकाज को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। इस तरह के विषय उठाना विपक्ष का अधिकार है। इसके बाद विपक्ष के सांसद हंगामा करते रहे।

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