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अब स्कूलों में बच्चे को तकलीफ हुई तो स्कूल जिम्मेदार, मान्यता हो सकती है रद्द

नई दिल्ली | स्कूल केवल फीस वसूली का अड्डा नहीं रहेंगे। अब स्कूल परिसर में छात्रों को सुरक्षा (Student Safety) प्रदान करने के लिए कई बिंदुओं पर भी ध्यान देना होगा। स्कूल प्रशासन को न केवल परिसर में सुरक्षित बुनियादी ढांचे की स्थापना सुनिश्चित करनी होगी। बल्कि उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन और पानी के स्तर में लापरवाही नहीं चलेगी। यही नहीं विद्यार्थियों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने में देर होने पर इसकी जवाबदेही भी लेनी होगी। नई शिक्षा नीति के तहत यह गाइडलाइन स्कूलों में छात्रों को शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा प्रदान करेगी।

 

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Central Education Ministry) ने स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा के लिए एक नीति (Student Safety Policy ) तैयार की है। यह नीति छात्रों को किसी भी उत्पीड़न, शारीरिक चोट और मानसिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए है। केंद्र की इस पहल में देश के सभी राज्य, केंद्र शासित प्रदेश, सीबीएसई बोर्ड और अन्य राज्य शिक्षा बोर्ड भी इस नीति का हिस्सा होंगे।

रिसर्च और फील्ड वर्क

विद्या​लय परिसर में छात्रों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए स्कूल को कई प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान देना होगा। स्कूल प्रशासन को परिसर में सुरक्षित और प्रभावी बुनियादी ढांचे की स्थापना सुनिश्चित करनी होगी। विद्यालय प्रशासन की ओर से स्कूल परिसर में उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन और पानी के स्तर में किसी भी स्तर की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। यही नहीं छात्रों को आवश्यकता होने पर चिकित्सा सहायता प्रदान करने में देर होने पर इसकी जवाबदेही स्कूल की होगी।

Open school in Jharkhand

इस नीति के तहत छात्रों का उत्पीड़न या अन्य समस्या की शिकायत के निस्तारण में लापरवाही बरती जानी भी भारी पड़ेगी। भेद भावपूर्ण कार्रवाई, मादक पदार्थों को रोकना स्कूल की जिम्मेदारी है। नीति के तहत स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी मुद्दे स्कूल प्रशासन द्वारा लापरवाही न बरती जाए। यदि ऐसा होता है तो फिर नई गाइडलाइंस के तहत स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है।

नई पॉलिसी के मुताबिक स्कूल प्रबंधन व प्रिंसिपल स्कूल में छात्रों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारी होंगे। अभिभावकों से कहा गया है कि गाइडलाइन की निगरानी करें। शिक्षा विभाग इस गाइडलाइन के पालन की जांच करेगा।

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शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि स्कूलों को इन दिशा निर्देशों को अमल में लाने के लिए इनका समर्थन, प्रसार, ट्रैकिंग व प्रोत्साहन करना होगा। यही नहीं नियमों का पालन न करने अथवा निर्धारित मानकों में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। अधिक गंभीर होने की स्थिति में स्कूलों की मान्यता रद्द की जाएगी।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्कूल शिक्षा संतोष कुमार यादव ने गाइडलाइन को सभी राज्यों व प्रदेशों को भेजा है। वहीं स्कूल शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सीबीएसई एवं विभिन्न राज्यों के शिक्षा बोर्ड को भी यह गाइडलाइन भेजी गई है।

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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जब तक बच्चा स्कूल में होगा सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल (School Administration) की होगी। ऐसे में यदि यह पाया जाता है कि जानबूझकर किसी छात्र को पीड़ा दी गई है तो यह इसे भीर चूक माना जाएगा।

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इन गाइडलाइंस का पालन देश के सभी Government एवं Private स्कूलों द्वारा किया जाएगा। सरकारी व निजी स्कूलों को पढ़ाई के साथ साथ छात्रों को शारीरिक, सामाजिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा देना आवश्यक होगा।

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यह गाइडलाइन गुरुग्राम के निजी स्कूल में 4 साल पहले हुई एक छात्र की मृत्यु की घटना को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। छात्र के पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइन तैयार करने का सुझाव दिया था।

Student Safety Policy का पालन न करने वाले स्कूलों के खिलाफ स्थानीय शिक्षा अधिकारी से शिकायत की जा सकती है। संतोषजनक कार्रवाई ना होने की स्थिति में जिला शिक्षा अधिकारी और डीसी मामले की जांच करेंगे।

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By प्रदीप सिंह

Experienced Journalist with a demonstrated history of working in the newspapers industry. Skilled in News Writing, Editing. Strong media and communication professional. Many Time Awarded by good journalism. Also Have Two Journalism Fellowship. Currently working with Naya India.

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