अतिवृष्टि से नुकसान का अब तक नहीं कराया गया सर्वे: शिवराज - Naya India
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अतिवृष्टि से नुकसान का अब तक नहीं कराया गया सर्वे: शिवराज

रीवा। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि अतिवृष्टि से किसानों की फसलें खराब हो गयीं, लेकिन अब तक इसका सर्वे नहीं कराया गया। चौहान ने कहा कि अतिवृष्टि से पहले मूंग, उड़द, सोयाबीन की फसलें प्रभावित हुई और अब इसके चलते धान की फसलों पर भी रोग लग गया है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा अब तक फसलों के नुकसान का सर्वे नहीं कराया गया है।

उन्होंने कहा कि अब तक फसलों के नुकसान का सर्वे किन कारणों की वजह से नहीं कराया गया, इसका जवाब सरकार को देना होगा। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में पेट्रोल डीजल और शराब के दाम बढ़ा दिए गए, इसके बावजूद भी किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की मदद के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पंद्रह वर्षो के भाजपा कार्यकाल में वे तेरह वर्ष मुख्यमंत्री रहे, लेकिन किसानों की मदद के लिए केंद्र पर आश्रित नहीं रहा, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर प्रभावित किसानों की मदद की।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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