राजस्थान के गांव बड़ोदिया में लड़के को दुल्हन की तरह सजाकर क्यों किया गया कन्यादान? - Naya India
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राजस्थान के गांव बड़ोदिया में लड़के को दुल्हन की तरह सजाकर क्यों किया गया कन्यादान?

Two boys get married in village Badodia in Banswara district of Rajasthan

बांसवाड़ा। यह शादी जरा हक के थी। दूल्हा और दुल्हन दोनों नाबालिग। फिर गाजे—बाजे से बारात निकली। मंडप सजाया। सात ​फेरे हुए। मंगलसूत्र पहनाया गया। मांग भरी गई और कन्यादान भी हुआ। पूरा गांव इस अनूठे विवाह का साक्षी बना। यह विवाह अनूठा इसलिए था कि क्योंकि इसमें लड़का—लड़की नहीं थे बल्कि दोनों ही लड़के ही थे। वो भी नाबालिग। फिर ऐसी क्या नौबत आ गई कि दोनों की शादी करनी पड़ी। यह अजीब शादी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के आदिवासी बाहुल्य गांव बड़ोदिया में हुई है। यहां मान्यता है कि नाबालिग लड़कों की शादी करने पर गांव में खुशहाली बनी रहती है।

Two boys get married in village Badodia in Banswara district of Rajasthan

मानस दूल्हा और राज दुल्हन

करीब 90 साल पुरानी इस परम्परा के तहत बुधवार आदि रात को राज व मानस की शादी करवाई। मानस दूल्हा बना जबकि राज ने दुल्हन की भूमिका निभाई। रात को साड़ी पहनाई गई और उसका दुल्हन की तरह श्रृंगार किया गया। पूरा माहौल असली शादी जैसा ही रहा।
पंडितों ने दोनों लड़कों की विधि विधान से शादी करवाई। मानस ने राज को वरमाला व मंगलसूत्र पहनाया। उसकी मांग भरी और फिर दुल्हन बने राज का कन्यादान भी किया गया। इस दौरान कोरोना गाइड लाइन का भी विशेष ख्याल रखा गया। दूल्हा—दुल्हन ने मास्क पहनकर सारी रस्में निभाई।

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यह अनूठी रस्म कुछ इस तरह से शुरू हुई कि दोनों लड़के रात को गांव से गायब हो गए। फिर युवाओं की टोलियां उन्हें खोजने निकली। जब दाेनाें लड़के मिल गए ताे सभी युवा गीत गाते हुए नाचकर खुशी मनाने लगे। ढाेल बजाकर संदेश दिया कि जाेड़ा मिल गया। इसके बाद ग्रामीण शादी में शामिल हाेने के लिए पहुंच गए। दाेनाें ही लड़काें काे गांव के श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में लाया गया। यहां गांव के मुखिया ने विवाह का आदेश दिया। इसके बाद शादी हुई।

Two boys get married in village Badodia in Banswara district of Rajasthan

90 साल पुरानी है परम्परा

गांव बड़ोदिया नाथजी की मानें तो गांव कई दशक पहले खेडुवा जाति के लोग निवास करते थे। उस समय बहने वाला एक नाला गांव को दो हिस्सों में बांटता था। पहले दोनों हिस्सों से लड़कों को चुनकर उनकी शादी करवाई जाती थी। करीब 90 साल पहले होली के एक दिन पहले जब इस रस्म को निभाने की तैयारियां चल रही थीं तो जोरदार बारिश हुई। इस वजह से शादी नहीं हो पाई। इसके कुछ दिनों बाद गांव में 200 से ज्यादा दुधारू भैंसों की अकाल मौत हो गई। ग्रामीणों ने इसे परंपरा न निभाए जाने का श्राप मान लिया। इसके बाद ये परंपरा लगातार जारी है। इससे गांव में खुशहाली बनी रहती है।

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