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गंगा में तैरते शवों से हो गये थे विचलित, तो शवों के साथ होने वाले दुष्कर्म को क्या कहेंगे, पढें रिपोर्ट

नई दिल्ली | कोरोना ने हमें बहुत कुछ सीखा दिया है. लेकिन सबसे ज्यादा विचलित करने वाली तस्वीरें प्रयागराज की गंगा घाटों से आई हैं. उन तस्वीरों के देखतक लगता है जैसे मृत लोगों के साथ कोई दुर्वयव्हार किया गया हो. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि क्योंकि सोशल मीडिया में इस तरह की तस्वीरें वायरल हैं जिनमें कुत्ते शवों को नोच कर खा रहे हैं. प्रयागराज पुलिस ने भी इस बात से इनकार नहीं किया है कि शवों को कुत्तों के दवारा निकाला जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या हमारे देश में मृतकों के लिए भी कुछ अधिकार दिये गये हैं. तो इसका जवाब हां है. आइए जानते हैं …..

भारत का संविधान देता है सम्मानजनक अंतिम संस्कार का हक

देश का कानून देश के हर व्यक्ति को उसके धर्म के अनुसार सम्मानजनक अंतिम संस्कार का हक देेता है.जनरल क्लॉजेस एक्ट (General Clauses Act) के सेक्शन 3(42) में कहा गया है कि मौत के साथ ही व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारियां और अधिकार खत्म हो जाते हैं, लेकिन मौत और अंतिम संस्कार तक ये जस के तस बने रहते हैं. इंडियन पीनल कोड में भी ऐसे ही प्रावधान हैं. भारत का कानून इस बात का ध्यान रखता है कि मरने वाले व्यक्ति की आखिरी इच्छा का सम्मान हो. इसके साथ ही मरने के बाद कोई भी मरने वाले की छवि को खराब करने का प्रयास नहीं करे. अगर इसके बाद भी यदि कोई ऐसे करता हैं तो भारत का कानून परिजनों को ये हक देता है कि व्यक्ति के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कर सके.

भारत में नहीं है शवों के साथ होने वाले यौन हिंसा के खिलाफ ठोस कानून

मृत शरीर से यौन हिंसा के खबरें अब विश्वभर से आने लगी हैं, इसे नेक्रोफीलिया कहा जाता है. कई देशों में इसे एक जघन्य अपराध माना जाता है, लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि अपने देश भारत में इस तरह के अपराध के लिए अब तक कोई सजा का प्रावधान नहीं है. जबकि न्यूजीलैंड में मृतक के साथ किसी तरह की हिंसा करने वाले को 2 साल की सख्त सजा और जुर्माना देना होता है. अमेरिका, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में भी इस तरह की सजा है. जबकि हमारे देश में अबतक इस तरह के कुकृत्य के लिए कोई ठोस कानून नहीं है.

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भारत में भी सुुनने को मिले हैं इस तरह के मामले

ऐसा नहीं है कि भारत में इस तरह के मामले सुनने को नहीं मिलते हैं. लेकिन इस तरह के अपराध भारत में कम ही सुनने को मिलते हैं शायह यहीं कारण है कि भारत सरकार का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है. कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में कब्र खोदकर तीन लोगों ने एक युवती के शव निकाला. इसके बाद शव के साथ गैंगरेप किया. ऐसे ही एक मामला 2006 में नोएडा से सामने आया था जिसमें एक बिजनेसमैन और उसका सहयोगी महिलाओं और बच्चों के शवों से बलात्कार किया करते थे. देश में आए दिन इस तरह के मामले सुनने को मिलते रहे हैं. बता दें कि कानून ना होने के बाद भी भारत में ऐसे अपराधियों कोे IPC की धारा 377 के तहत अननेचुरल सेक्स के लिए सजा दी जाती है.

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