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31 साल से एक-दूसरे के खून के प्यासे क्यों हैं ये 2 परिवार, अब तक 13 मर्डर, अगला नंबर किसका?

Bulandshahr Murder Case

बुलंदशहर। यूपी के बुलंदशहर जिले के ककोड़ पुलिस थाना इलाके में एक छोटा सा गांव है धनोरा। यहां के दो परिवार बीते 31 साल से एक—दूसरे के खून के प्यासे हैं। अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि दोनों परिवारों में 13 सदस्यों का मर्डर किया जा चुका है। अब इन ​परिवारों में हर सदस्य को हर वक्त ये ही खौफ सताता है कि मर्डर में अगला नंबर किसका होगा?

 31 साल पुरानी है दो परिवारों की दुश्मनी

 

धनोरा के राजेंद्र सिंह और कालीचरण के परिवार

ये परिवार हैं धनोरा के राजेंद्र सिंह और कालीचरण के। आज हम इन परिवारों की वर्षों पुरानी अदावत का जिक्र इसलिए कर रहे हैं कि रविवार को फिर हत्या की कोशिश हुई। पिता व बेटे पर ताबड़तोड़ फायरिंग हुई है, जिसमें बेटे की मौत हो गई। साथ ही सुरक्षा में तैनात गनर को भी तीन गोली लगी है।

31 साल पुरानी है दो परिवारों की दुश्मनी

सुरक्षा में तैनात गर्नर को भी लगी गोली

बुलंदशहर एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि रविवार को गांव धनोरा में सुबह खेत से लौटते समय धर्मपाल पर आधा दर्जन बदमाशों ने पुरानी रंजिश के चलते जानलेवा हमला किया है, जिसमें धर्मपाल, उनका बेटा संदीप और गनर गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बाद में संदीप ने दम तोड़ दिया। धर्मपाल का नोएडा के अस्पताल में इलाज चल रहा है। आरोपियों की पहचान कर ली गई है, जो राजेंद्र सिंह परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

31 साल पुरानी है दो परिवारों की दुश्मनी

खूनी होली से शुरू हुई रंजिश

दरअसल, 31 साल पहले 1990 में कोलीचरण व राजेंद्र सिंह के परिवार ने खूनी होली खेली। उस वक्त हुआ यह था कि कोलीचरण व राजेंद्र सिंह के परिवार के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। गांव के पंच पटेलों ने दोनों परिवारों को एक साथ बैठाकर विवाद का निपटारा कर रहे थे। इसी दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि एक—दूसरे पक्ष पर हमला कर दिया। इस हमले में कालीचरण पक्ष के तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वहीं, राजेंद्र सिंह पक्ष का भी एक व्यक्ति गोली का शिकार हो गया। दोनों परिवारों में सबसे पहले एक साथ चार अ​र्थियां उठीं। इन हत्याओं ने दोनों परिवारों को एक दूसरे के खून का प्यासा बना दिया।

31 साल पुरानी है दो परिवारों की दुश्मनी

पांच साल बाद पांचवां मर्डर

1990 हत्याकांड के आरोप में राजेंद्र सिंह पक्ष के पांच लोग आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं जबकि कालीचरण पक्ष के लोगों के खिलाफ सुराग न मिलने पर वे जमानत पर छूट गए। वक्त बीतता गया और साल 1995 आ गया। इस दौरान दोनों परिवार के बीच रंजिश और गहरी हो गई थी। 1995 में राजेंद्र सिंह पक्ष के लोगों ने कालीचरण पक्ष अगम की हत्या कर दी। यह पांचवां मर्डर था।

 

पुरानी रंजिश में फायरिंग

14 दिन बाद ही लिया हत्या का बदला

तीन साल बाद 1998 में कालीचरण पक्ष ने अगम की हत्या का बदला लेते हुए राजेंद्र सिंह पक्ष के इंद्रपाल की जान ले ली। छठे मर्डर के बाद भी रंजिश थमने की बढ़ती गई।
फिर सातवां मर्डर तीन जनवरी 2005 को राजेंद्र सिंह के भाई जयप्रकाश का हुआ। आरोप कालीचरण पक्ष पर लगे। महज 14 दिन बाद ही राजेंद्र सिंह पक्ष के लोगों ने 17 जनवरी 2005 को कालीचरण की पत्नी श्रृंगारी देवी और उनके नौकर की हत्या करके जयप्रकाश की मौत का बदला लिया। अब तक दोनों पक्षों के नौ लोग मौत के घाट उतारे जा चुके थे।

31 साल पुरानी है दो परिवारों की दुश्मनी

बेटे ने लिया मां की हत्या का बदला

साल 2009 में कालीचरण पक्ष के लोगों ने राजेंद्र सिंह की पत्नी के रूप में दसवां मर्डर किया। यह कालीचरण की पत्नी की मौत का बदला था। दसवीं मर्डर के दस साल बाद यानी 2019 में कालीचरण के बड़े बेटे जगपाल की पलवल में हत्या हो गई। आरोप राजेंद्र के बेटे ने अमित धनोरा पर लगे। 11वें मर्डर के बाद अमित पुलिस की पकड़ से दूर रहा और साल 2020 में अमित ने कालीचरण को ही मौत के घाट उतार दिया। यह 12वीं हत्या थी। अब कालीचरण के परिवार के संदीप के रूप में 13वां मर्डर हुआ है।

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