यूपी में 'कोरोना वाले बाबा' गिरफ्तार - Naya India
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यूपी में ‘कोरोना वाले बाबा’ गिरफ्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस ने यहां एक फर्जी बाबा को गिरफ्तार किया है, जो कोरोनावायरस को ठीक करने का दावा करते हुए 11 रुपये में ताबीज बेच रहा था। फर्जी बाबा अहमद सिद्दिकी ने अपनी डालीगंज स्थित अपनी दुकान के बाहर एक बोर्ड लगा रखा था, जिसपर इस जानलेवा वायरस को ठीक करने का दावा किया गया था।

इस बोर्ड पर लिखा हुआ था कि जो लोग मास्क नहीं पहन सकते, वे ये ताबीज पहनकर कोरोना को दूर रख सकते हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी दी और पुलिस ने आरोपी को धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (पश्चिम) विकास चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि आरोपी खुद को “कोरोना वाले बाबा” बताता है और मासूम लोगों को धोखा दे रहा है। लखनऊ में अबतक कोरोनावायरस पॉजिटिव के दो मामले सामने आ चुके हैं और 11 मरीजों को एकांत में रखा गया है, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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