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सपा को मैनपुरी का गढ़ बचाने की चिंता

Akhilesh taking Mulayam's ashes to Haridwar.

उत्तर प्रदेश में कुछ इलाके ऐसे हैं, जो समाजवादी पार्टी का गढ़ रहे हैं। मैनपुरी उनमें से एक है, जहां से मुलायम सिंह यादव लोकसभा का चुनाव जीते थे। इसी तरह का सपा का एक दूसरा किला आजमगढ़ था, जो ढह गया है। आजमगढ़ से अखिलेश यादव लोकसभा का चुनाव जीते थे। लेकिन इस साल विधायक बनने के बाद उन्होंने अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया था। उस सीट पर पार्टी ने बदायूं से कई बार सांसद रहे मुलायम सिंह के भतीजे धर्मेंद्र यादव को लड़ाया था लेकिन भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता और भाजपा के उम्मीदवार दिनेश लाल यादव निरहुआ ने उनको हरा दिया। हालांकि वे आठ हजार वोट के छोटे अंतर से हारे और उसमें बसपा के मुस्लिम उम्मीदवार शाह आलम के दो लाख 66 हजार वोट हासिल करने का बड़ा हाथ था। फिर भी मुलायम परिवार का एक किला ढह गया है।

अब परिवार को मैनपुरी का गढ़ बचाने की चिंता है। एक बार फिर कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र यादव को इस सीट से लड़ाया जाएगा। यह सीट आजमगढ़ से भी ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है। फिर भी सपा को कई बातों को लेकर चिंता है। सबसे बड़ी चिंता तो इस बात को लेकर है कि कहीं भाजपा मुलायम सिंह की दूसरी बहू अपर्णा यादव को चुनाव में न उतार दे। वे विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गई थीं और मुलायम सिंह से आशीर्वाद भी लिया था। अगर भाजपा उनको टिकट देती है तो यह परिवार की लड़ाई हो जाएगी। फिर भी सपा का पलड़ा भारी होगा क्योंकि अपर्णा उत्तराखंड से आती हैं और राजपूत हैं। दूसरी बात यह है कि वे मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक की पत्नी हैं। फिर भी अगर वे लड़ेंगी तो सपा की मुश्किल बढ़ेगी। उनके अलावा पूर्व सांसद रघुराज सिंह और एकाध अन्य नेताओं के नाम की चर्चा है।

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