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योगी ने सौ आकांक्षात्मक विकासखंडों के शोधार्थियों से बात की

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा है कि मात्र आठ माह में 86 विकासखंड (development blocks) राज्य के औसत के बराबर आ गए हैं। मार्च 2022 तक उत्तर प्रदेश के 99 विकासखंड राज्य के औसत से पीछे थे, आज सिर्फ 13 बचे हैं और यह सब ‘मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम’ (Chief Minister’s Fellowship Programme) के शोधार्थियों की कड़ी मेहनत से संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि शोधार्थी (researcher) गांवों में स्वरोजगार सृजन (self-employment) पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर बैंकों के कैम्प लगवाए जाएं।

मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार शाम अपने सरकारी आवास पर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम के अन्तर्गत 100 आकांक्षात्मक विकासखंडों में तैनात शोधार्थियों से संवाद कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शोधार्थियों से संवाद किया। शोधार्थियों ने अपने-अपने विकासखंडों में किये जा रहे उल्लेखनीय कार्यों से उन्हें अवगत कराया।

योगी ने शोधार्थियों से जनपद में व्यापक भ्रमण करने और जन संपर्क बनाने की अपील की। उन्होंने शोधार्थियों से कहा कि वे समन्वय बनाकर योजनाओं पर लोगों का फीडबैक एकत्रित करें। मुख्यमंत्री ने कहा, उत्तर प्रदेश में असीम संभावनाएं हैं। शोधार्थी जब क्षेत्र में रहें, तब अधिकारियों और लोगों से बेहतर संवाद बनाकर कार्यक्रम को आगे बढ़ाएं। इससे सार्थक परिणाम सामने आएंगे।

मुख्यमंत्री योगी ने शोधार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, तीन से चार वर्ष बाद जब इन आकांक्षात्मक विकासखंडों में तैनात शोधार्थियों के कार्यों का मूल्यांकन किया जाएगा। अच्छा कार्य करने वाले शोधार्थी अगर सरकारी सेवा में आना चाहेंगे, तो उन्हें उम्र में छूट दी जाएगी। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की मंशा के अनुरूप आकांक्षात्मक जनपदों की तर्ज पर राज्य में आकांक्षात्मक विकासखंडों का चयन किया गया। इन विकासखंडों में एक-एक ‘मुख्यमंत्री फेलो’ की तैनाती की गयी। उनके प्रशिक्षण के बाद 21 अक्टूबर, 2022 को उन सभी फेलो को नियुक्ति पत्र तथा टैबलेट उपलब्ध कराये गये थे। उसके बाद सभी शोधार्थियों ने अपने-अपने तैनाती क्षेत्र में कार्य प्रारम्भ किया।’

आदित्यनाथ ने कहा, डाटा संकलित न कर पाने के कारण शासन को कई बार समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये शोधार्थी प्रतिदिन अपना कार्य करने के बाद डाटा अपलोड कर रहे हैं। इससे डाटा संकलन में सुविधा हो रही है। (भाषा)

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