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यूपी में जारी हुआ ये नया अध्यादेश, अब मकान मालिक नहीं कर सकेंगे मनमानी

आजकल लोगो को घर किराये पर देना एक आम बात है. घर किराये पर देने से मकानमालिक यह भी चाहते है कि उनका घर सही से रखे और साफ-सफाई का भी ध्यान रखें. इसी को लेकर मकान-मालिक और किरायेदार में झगड़ा तक हो जाता है. अक्सर देखा जाता है कि  कुछ मकान-मालिक बिना किसी रेंट एग्रीमेंट के किरायेदार को घर दे देते हैं.  यूपी में लागू किये  नए नियमों के तहत अब मकान-मालिक किसी भी प्रकार से अपनी मनमानी नहीं कर सकेगा. इस नियम में किसी भी प्रकार के विवादों का निपटारा 60 दिनों के अंदर हो जाएगा. उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन (द्वितीय) अध्यादेश, 2021  को लागू करने का फैसला लिया गया है. इसे राज्य सरकार की कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है. मौजूदा किरायेदारी और भविष्य की किरायेदारी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में वर्तमान में लागू उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किराये पर देने, किराये और बेदखली का विनियमन) अधिनियम 1972 को निरस्त करते हुए उसकी जगह एक नया कानून बनाए जाने का फैसला हुआ था. इस फैसले को अमल में लाने के लिए राज्यपाल की ओर से 9 जनवरी 2021 को उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अध्यादेश, 2021 की घोषणा की गई थी.

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क्या है किरायेदारी विनियमन अध्यादेश, 2021

इस नए अध्यादेश के लागू होने के बाद अब कोई भी मकान मालिक बिना रेंट एग्रीमेंट के किरायेदार नहीं रख सकेगा.  इस अध्यादेश में ऐसे कई प्रावधान किए गए हैं जिससे किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच विवादों को कम करने में मदद मिलेगी. विवाद होने पर उनके निपटारे की भी व्यवस्था की गई है. नए नियमों के लागू होने के बाद मकान मालिक और किरायेदार के बीच हुए एग्रीमेंट में पारदर्शिता होगी. इससे पहले मकान-मालिक अपने मनचाहा किराया बढ़ा देते थे. लेकिन अब इस नियम के लागू होने के बाद  मकान मालिक मनमाना किराया नहीं बढ़ा सकेंगे. नए आदेश के तहत मकान मालिक घरेलू तौर पर सालाना सिर्फ 5 प्रतिशत ही किराया बढ़ा सकते हैं. कमर्शियल के लिए ये बढ़ोतरी 7 प्रतिशत होगी.  पुराने मामलों में किराए का रीव्यू किया जाएगा. अध्यादेश में प्रावधानों के अनुसार  किरायेदार और मकान मालिक संयुक्त रूप से किरायेदारी की अवधि को तय करेंगे और एग्रीमेंट के रीन्यूअल का फैसला भी मिलकर ही करेंगे.

60 दिनों में  निपटेगा विवाद

इस अध्यादेश के लागू होने के बाद कूछ हद तक विवादों का निपटारा हो जाएगा. इसमें मकान-मालिक और किरायेदार दोनों के हितों की रक्षा हो जाएगी. किसी विवाद की स्थिति में विवाद के निपटारे के लिए रेंट अथॉरिटी और रेंट ट्रिब्यूनल का प्राविधान भी इस अध्यादेश में किया गया है और आमतौर पर 60 दिनों में किसी भी विवाद का निपटारा किया जा सकेगा.

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