UP election UPTET exam यूपीटेट परीक्षा रद्द होने से युवा नाराज
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यूपीटेट परीक्षा रद्द होने से युवा नाराज, बीजेपी को पड़ेगा भारी

UP election UPTET exam

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश में मिशन 2022 में लगी है। अब जबकि राज्य में विधानसभा चुनाव को महज कुछ हफ्ते शेष हैं, शिक्षक पात्रता (यूपीटीईटी-21) परीक्षा रद्द किये जाने से युवाओं में बढ़ रही नाराजगी बीजेपी सरकार को चुनाव में भारी पड़ सकती है। पूरे  प्रदेश में 736 केंद्रों पर आयोजित होने वाली इस परीक्षा में करीब बीस लाख छात्र भाग लेने वाले थे। परीक्षा रद्द होने के बाद सोशल मीडिया पर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। बड़ी संख्या में युवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर रिएक्शन देते हुए लोग योगी सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। UP election UPTET exam

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार युवाओं को रोज़गार देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। लेकिन साढ़े चार साल में साढ़े चार लाख नौकरी का दावा करने वाली बीजेपी सरकार का सरकारी नौकरियों के मामले में ट्रैक रिकार्ड बहुत अच्छा नहीं रहा।  इससे पहले इसी साल मार्च में धांधली के कारण 2018 में हुई उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूपी एसएससी) की ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा करीब तीन साल बाद निरस्त हो गई थी।  भ्रष्टाचार और सरकार में अफसरों के बढ़ते प्रभाव के चलते हाल के वर्षों में राज्य सरकारो द्वारा आयोजित तमाम भर्ती परीक्षाएं निरस्त हो चुकी हैं। इससे सरकारी नौकरी की आस लगाये लाखों युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ गया है।

यूपी में साल 2017 में बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक कई सारी भर्तियां रद्द हो चुकी हैं। साल 2019 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की लोअर सबॉर्डिनेट परीक्षा, सितंबर 2018 में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ही नलकूप चालक चयन परीक्षा, 2018 में यूपीलोकसेवा आयोग की एलटी ग्रेड परीक्षा, पीसीएस मेंस, उत्तर प्रदेश पॉवर कॉर्पोरेशन (यूपी पावर कार्पोरेशन) की परीक्षा भी पेपर लीक के कारण रद्द कर दी गई थीं। जुलाई 2017 में दरोगा, पीएसी प्लाटून कमांडर और फायर फायटिंग अधिकारी के 3307 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन एग्जाम से ठीक पहले भी पर्चा लीक होने का मामला सामने आया था, जिसके बाद सरकार ने परीक्षा को रद्द कर दिया था। इन सभी भर्तियों में धांधली और पेपरलीक के चलते लाखों अभ्यार्थियों के भविष्य अधर में लटक गए हैं। अब उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा के रद्द होने से विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की बीजेपी सरकार की छवि और कार्यशैली पर बड़ा आघात लगा है। 

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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड की तरफ से आयोजित की जाने वाली परीक्षा है। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए इस परीक्षा को पास करना जरूरी है। यह परीक्षा साल में एक बार होती है और पास होने पर इसका सर्टिफिकेट हमेशा के लिए मान्य होता है। 

पेपर लीक होने और परीक्षा रद्द होने के बाद सोशल मीडिया पर युवा जमकर भड़ास निकाल रहे हैं और प्रदेश सरकार से अपने धन और समय की भरपाई की मांग करते नजर आये। कई अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा के लिए यूपी पुलिस सब इंस्पेक्टर का एग्जाम छोड़ दिया था, क्योंकि ये दोनों परीक्षाएं यूपीटीईटी-21 के एग्जाम के दिन ही था। एक अभ्यर्थी ने लिखा कि अपने घर से परीक्षा केंद्र तक आने में उनके करीब चार हजार रुपये खर्च हुए। कोरोना काल में बढ़ती महंगाई में इसकी भरपाई कौन करेगा !

यूपी सरकार के अफसरों की दूरदर्शिता पर सवाल उठाते हुए एक छात्र ने कहा कि यूपी परीक्षाएं कराने वाले विभागों का आपस में तालमेल ही नहीं है। ऐसा सिर्फ यूपी में ही होता है कि एक ही दिन दो बड़ी परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। अभ्यर्थी कहते हैं, “एक तो सरकार ने एक ही दिन दो परीक्षाएं आयोजित कर आधे लोगों का पहले ही नुकसान कर दिया। ऊपर से टीईटी की परीक्षा के उम्मीद में इतनी दूर मेहनत करके आए वो भी रद्द  हो गई। ऐसा लगता है कि हर बार का यह पैटर्न हो गया है।”

चुनावी साल में यूपीटेट परीक्षा रद्द होने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए योगी सरकार तुरंत डैमेज कंट्रोल में जुट गयी। यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉक्टर सतीश द्विवेदी ने मीडिया को बताया कि परीक्षा एक महीने बाद फिर से परीक्षा कराई जाएगी। अभ्यर्थियों से कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी। मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी जा रही है ताकि दोषियों के ऊपर कार्रवाई की जा सके। राज्य सरकार ने परीक्षा में भाग लेने वाले छात्रों को घर तक जाने के लिए रोडवेज बसों में किराया फ्री करने का एलान किया। पर ये आदेश भी रोडवेज तक देर से पहुंचने के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को उसका लाभ नहीं मिल सका। विपक्ष चुनाव में इस मामले का लाभ लेने के इरादे से योगी सरकार को असफल करार दिया है। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने बीजेपी की योगी सरकार को विफल करार देते हुए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली सरकार बताया है।

 

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