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सपा ने अब तक आजमगढ़ और रामपुर में तय नहीं किया प्रत्याशी

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव अपनी सियासी गलतियों से कोई सबक नहीं सीखते। सपा के तमाम विधायकों का यह निष्कर्ष हैं. इन नेताओं के अनुसार बीते विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार की मुख्य वजह टिकट वितरण में देरी, मतदाता सूची में गड़बड़ी, पार्टी कार्यकर्ताओं से तालमेल का अभाव और लचर चुनावी रणनीति रही है। गत शनिवार को विधानसभा चुनावों में मिली हार के कारणों की समीक्षा में एक एजेंसी की सर्वे रिपोर्ट में भी यह बताया गया। इसके मुताबिक़ सपा मुखिया की कई गलतियों के कारण चुनाव में हारी पार्टी। इसके बाद भी सपा मुखिया आजमगढ़ और रामपुर संसदीय सीट पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के नामों का ऐलान अब तक नहीं किया है। जबकि 23 जून को इन दोनों सीटों पर मतदान होना हैं। इसके बाद भी सपा मुखिया ने प्रत्याशी चयन में तेजी नहीं दिखाई है। यहीं नहीं विधान परिषद के चुनावों के लिए भी उम्मीदवार तय करने के बाबत भी उनका ऐसा ही रवैया है।

जिसका संज्ञान लेते हुए सपा ने कई विधायकों ने अपने पार्टी मुखिया की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा किया। सपा के इन नेताओं का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आजमगढ़ और रामपुर संसदीय सीट के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। भाजपा ने आजमगढ़ सीट से भोजपुरी गायक दिनेश लाल यादव निरहुआ पर भरोसा जताया है तो रामपुर सीट घनश्याम लोधी को प्रत्याशी बनाया है।

घनश्याम इसी वर्ष जनवरी में समाजवादी पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने आजमगढ़ सीट से बसपा ने शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को चुनाव लड़ाने का ऐलान किया। इसके बाद राज्य में भाजपा को कड़ी टक्कर देने का दावा करने वाली सपा अभी तक आजमगढ़ और रामपुर से कौन चुनाव लड़ेगा? ये तय नहीं कर पायी है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी का कहना है कि जल्द ही सूची सार्वजनिक की जाएगी। कई नामों पर विचार चल रहा है।

पार्टी प्रवक्ता का यह बयान पार्टी विधायकों के पच नहीं रहा है. इनका कहना है कि पार्टी अभी तक आजमगढ़ सीट पर डिंपल यादव अथवा रमाकांत यादव को मैदान में उतारने की तैयारी कर रही थी। परन्तु रमाकांत ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया और उन्होंने बदली सियासी परिस्थितियों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व के सामने यहां से दलित उम्मीदवार के रूप में बलिहारी बाबू के बेटे सुशील आजाद को चुनाव लड़ाने का प्रस्ताव रखा। बलिहारी बामसेफ के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे हैं। अब सुशील आजाद को चुनाव लड़ाया जाए या नहीं, यह सपा मुखिया अभी तय नहीं कर पाए हैं। इसी प्रकार रामपुर सीट से परिवार के किस सदस्य को चुनाव लड़ाया जाए? यह सपा के सीनियर नेता आजम खान को तय करना है। उन्होंने ने भी अभी इस मामले में फैसला नहीं लिया है। सपा के इन दो प्रमुख नेताओं के चलते प्रत्याशी के नाम का ऐलान करने में देरी हो रही है। जबकि इन दोनों सीटों पर 23 जून को यानी 18 दिन बाद मतदान होना है और अभी तक सपा के चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों का ऐलान तक नहीं हुआ है। इससे साफ़ है कि अखिलेश यादव अपनी गलतियों से सबक सीखने को तैयार ही नहीं हैं, जबकि विधानसभा चुनावों में हार की एक वजह देर से किया गया टिकट वितरण भी रहा है।

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