up vidhan sabha election माया का अंसारी पर फैसला, दूसरे दलों की समस्या!
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माया का अंसारी पर फैसला, दूसरे दलों की समस्या!

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनावी रणभेरी बज चुकी हैं। रण में ताल ठोकने के लिए योद्धाओं के चयन पर राजनीतिक दलों में मंथन शुरू हो गया है। बसपा-सपा-कांग्रेस जैसी पार्टियों ने किन उम्मीदवारों को चुनावी रण में उतारना है, इसका मौटा खांका बना लिया है। बस औपचारिक घोषणा बाकी है। इस मामले में बसपा की मुखिया सुश्री मायावती का माफिया मुख्तार अंसारी को अपनी पार्टी से चुनाव का टिकट न देने का ऐलान करना जनमानस में चर्चा का विषय बना है । उनके इस ऐलान को एक साहसिक कदम माना जा रहा है। उन्होंने यह घोषणा कर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी पार्टियों भाजपा सपा एवम कांग्रेस जैसी पार्टियों के सामने बाहुबलियों और दागियों को चुनाव में टिकट न देने का नैतिक दबाव बनाया है। up vidhan sabha election

ज्ञात हो बीते दिन पहले बसपा सुप्रीमों मायावती ने ट्वीट कर कहा कि हमारी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को पार्टी से टिकट नहीं देगी उन्होंने यह भी कहा कि बीएसपी का आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव में प्रयास होगा कि किसी भी बाहुबली व माफिया आदि को पार्टी से चुनाव न लड़ाया जाए। इसके मद्देनजर ही आजमगढ़ मण्डल की मऊ विधानसभा सीट से अब मुख्तार अंसारी का नहीं बल्कि यूपी के बीएसपी राज्य अध्यक्ष अध्यक्ष भीम राजभर के नाम को फाइनल किया गया है।”
उन्होने कहा “ जनता की कसौटी व उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के प्रयासों के तहत ही लिए गए इस निर्णय के फलस्वरूप पार्टी प्रभारियों से अपील है कि वे पार्टी उम्मीदवारों का चयन करते समय इस बात का खास ध्यान रखें ताकि सरकार बनने पर ऐसे तत्वों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करने में कोई भी दिक्कत न हो।”

बसपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि बीएसपी का संकल्प ’कानून द्वारा कानून का राज’ के साथ ही यूपी की तस्वीर को भी अब बदल देने का है ताकि प्रदेश व देश ही नहीं बल्कि बच्चा-बच्चा कहे कि सरकार हो तो बहनजी की ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ जैसी तथा बीएसपी जो कहती है वह करके भी दिखाती है यही पार्टी की सही पहचान भी है।”

भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड और फर्जी शस्त्र लाइसेंस समेत करीब 52 मुकदमो में निरूद्ध मऊ से बसपा विधायक मुख्तार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कुछ महीने पहले पंजाब की रोपण जेल से बांदा जेल लाया गया था। राज्य की योगी सरकार के आदेश पर मुख्तार की कई अचल संपत्तियों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गयी है।दिलचस्प है कि कुछ रोज पहले मुख्तार के भाई सिबकतुल्लाह अंसारी ने सपा की सदस्यता ग्रहण की थी।

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बसपा सुप्रीमो मायावती के ऐलान के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी की निगाह अब पूर्वांचल के इस बड़े राजनीतिक परिवार पर लग गई है । उन्होंने मुख्तार अंसारी को अपनी पार्टी ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) में शामिल होने का ऑफर दिया है। पार्टी के प्रवक्ता असीम वकार ने मुख्तार अंसारी को ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) से चुनाव लडऩे का भी ऑफर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर मऊ से मुख्तार अंसारी हमारी पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं तो हम टिकट देने के लिए तैयार हैं। साथ ही एआइएमआइएम ,उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष शौकत अली ने भी कहा है कि उनकी पार्टी मुख्तार अंसारी को पार्टी में लेने के लिए तैयार है।

बसपा मुखिया मायावती के विधानसभा चुनाव में मुख्तार को पार्टी का टिकट न देने के एलान से भले ही प्रत्यक्ष रूप से कोई असर नहीं दिखाई दे रहा लेकिन उनके इस कदम ने अन्य राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन को लेकर नया पेंच बना है।

लेखक: अमिताभ नीलम

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