up vidhan sabha election पूर्वाचंल नहीं पश्चिम यूपी होगा निर्णायक
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पूर्वाचंल नहीं पश्चिम यूपी होगा निर्णायक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में माना जाता है कि पूर्वांचल में जीत या हार किसी भी पार्टी का मुस्तकबिल तय करती है। लेकिन किसानों की भारी नाराजगी को देख ऐसा लगने लगा है कि इस बार पश्चिम की जाट पट्टी यूपी की सियासत का भविष्य तय करेगी। केन्द्र सरकार के कृषि बिलों के खिलाफ आंदोलन से सबसे ज्यादा प्रभावित जाट पट्टी राज्य की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के दोबारा सत्ता में आने के मंसूबों पर पानी फेर सकती है। (up vidhan sabha election)

किसान आंदोलन से उपजे असंतोष को भुनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जाटों के सबसे बड़े नेता के रुप में उभरे जयंत चौधरी से हाथ मिला लिया है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की पिछले दिनों हुई मुलाकात में रालोद के साथ सपा के गठबंधन पर रजामंदी हो गयी है। सिर्फ सीटों की संख्या पर अंतिम मुहर लगनी है। नतीजा ये है कि अब जाट पट्टी में विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता रालोद अध्यक्ष के इर्द-गिर्द परिक्रमा करने लगे हैं।

yogi adityanath

जाटपट्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश बीजेपी के ध्रुवीकरण की प्रयोगशाला रहा है। बीजेपी ने वर्षों तक साथ रहे जाट और मुस्लिम समाज को बांटने का काम बखूबी किया था और लोकसभा व विधानसभा चुनाव में भारी सफलता हासिल की थी। स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह और उनके पुत्र भी चुनाव हार गये थे। लेकिन इस बार सियासी बयार बदली नजर आ रही है। किसानों के आंदोलन ने जाटों और मुस्लिमों को काफी हद तक साथ ला दिया है। चौधरी चरण सिंह और अजीत सिंह के वारिस के रुप में जयंत चौधरी किसानों के आंदोलन को खुला समर्थन देकर जाटों के सर्वमान्य नेता के रुप में उभरे हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट-मुस्लिम समीकरण बनता है, तो इसका नुकसान भाजपा और बसपा समेत कई पार्टियों को उठाना पड़ सकता है। पश्चिमी यूपी में करीब 136 विधानसभा सीट पर जाट मतदाता हैं। इनमें 55 सीट ऐसी है, जहां जाट-मुस्लिम आबादी करीब 40 फीसदी है। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बनी खाई को पाटने की कोशिश की जाती है तो चुनाव परिणाम पर इसका असर पड़ सकता है। चुनाव परिणाम काफी हद तक जाट मतदाताओं पर निर्भर करेंगे। वह किस पार्टी का साथ ज्यादा देगे, ये अभी कहना मुश्किल है। पर सपा-रालोद गठबंधन पर पहली पसंद बनता जरुर नजर आ रहा है। सपा-रालोद गठजोड़ की सूरत में मुस्लिम मतदाताओं की भी पहली पसंद निश्चित रूप से यही गठबंधन होगा।

Farmer protest

पश्चिम यूपी में पिछले दिनों हुए पंचायत चुनाव में रालोद और सपा गठबंधन से ये साबित भी हो चुका है। पश्चिम क्षेत्र में 445 पंचायत सदस्य हैं, जिनमें से सत्तारुढ़ भाजपा मात्र 99 ही जीत सकी थी। जबकि रालोद ने तीन सौ जिला पंचायत सदस्य जीतकर अपना परचम फहरा दिया था। इतना ही नहीं रालोद का गढ़ कहे जाने वाले बागपत में रालोद ने अपना जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाकर भाजपा को कड़ी चोट दी है।

लेखक: नवेन्दु प्रकाश सिंह

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