uttar pradesh assembly election यूपी की जातिय प्रयोगशाला में नए प्रयोग?
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यूपी की जातिय प्रयोगशाला में नए प्रयोग?

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अनुप्रिया पटेल कुर्मी मतों में बिखराव रोकने के लिए अब परिवार को एकजुट करना चाहतीं हैं। अनुप्रिया पटेल परिवार को एक करने के लिए अपनी मां और अपना दल के संस्थापक सोनेलाल की पत्नी कृष्ण पटेल के समक्ष पति आशीष पटेल का एमएलसी पद से इस्तीफा दिलाने का भी प्रस्ताव दे दिया है। uttar pradesh assembly election

लखनऊ। केन्द्र सरकार द्वारा बनाये नये कृषि कानूनों और बढ़ती मंहगाई के बीच उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों की अहम भूमिका होने वाली है। उत्तर प्रदेश इन दिनों पिछड़ी जातियों की प्रयोगशाला बना हुआ है। हालात ये हैं कि सजय निषाद और ओमप्रकाश राजभर राज्य में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए जोड़तोड़ में लग गये हैं। बिहार के नेता मनीष साहनी जीतनराम मांझी और जद (यू) भी यूपी के चुनावी रण में कूदने को तैयार है।

यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पिछड़ी जातियों का महत्वपूर्ण भूमिका होगी, ये बीजेपी समेत सभी दलों की कोशिशों से साफ होता नजर आ रहा है। बीजेपी के साथ ही राज्य की अन्य सभी दल गैर यादव अन्य पिछड़ी जातियों पर डोरे डालने में लगी हुई हैं। इसे देखते हुए केन्द्रीय मंत्री और अपना दल नेता अनुप्रिया पटेल ने भी परिवार की रार समाप्त कर राज्य में अपना आधार बढ़ाने की कवायद तेज कर दी है। इस प्रयास के तहत उन्होंने अपनी मां और अपना दल संस्थापक सोनेलाल पटेल की पत्नी कृष्णा पटेल के सामने सुलह समझौते का एक फार्मूला रखा है। हालांकि इस समझौता फार्मूला में बहन पल्लवी पटेल और उनके पति को सियासी परिदृश्य से दूर रखने की शर्त भी रखी गयी है।

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उत्तर प्रदेश विधानसभा के अगले साल होने वाले चुनाव में अब कुछ ही सयय शेष है। यूपी की सभी छोटी बड़ी पार्टियों ने अपना आधार बढ़ाने के लिए जोड़ तोड़ शुरु कर दिया है। इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण पहल अपना दल (एस) में देखने को मिल रही है। कुर्मी वोटों एकमात्र सर्वमान्य पार्टी अपना दल (एस) ने सजातीय वोटों का बंटवारा रोकने के लिए अपनी मां कृष्णा पटेल की अपना दल (कमेरावादी) का अपनी पार्टी में विलय कराने की कवायद तेज कर दी है। अपना दल (एस) राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने अपनी मां को एमएलसी या मंत्री बनाने के साथ ही आगामी चुनाव में कमोबेश तीन विधानसभा सीटें अपना दल (कमेरावादी) के समर्थकों को देने की पेशकश समेत कई लुभावने प्रस्ताव भेजे हैं। लेकिन इस समझौता फार्मूला से बहन पल्लवी को दूर रखने की बात भी कही गयी है।

मालूम हो कि बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की जनता दल (यू) भी यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ तालमेल कर किस्मत आजमाने की योजना बना रही है। जाति से कुर्मी नितीश कुमार की छवि कुर्मी वोटरों में अच्छी है। यादव के बाद कुर्मी प्रदेश की दूसरी  सबसे बड़ी पिछड़ी जाति है। 1954 की जाति जनगणना के मुताबिक, सूबे में 6 फीसदी कुर्मी थे। अब उनकी संख्या 8-9 फीसदी मानी जाती है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 403 विधानसभा सीटों पर उनकी मौजूदगी है। लेकिन 16 जिलों में उनकी संख्या चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकने की ताकत रखती है।

इसे देखते हुए अनुप्रिया पटेल कुर्मी मतों में बिखराव रोकने के लिए अब परिवार को एकजुट करना चाहतीं हैं। अनुप्रिया पटेल परिवार को एक करने के लिए अपनी मां और अपना दल के संस्थापक सोनेलाल की पत्नी कृष्ण पटेल के समक्ष पति आशीष पटेल का एमएलसी पद से इस्तीफा दिलाने का भी प्रस्ताव दे दिया है। एमएलसी के तौर पर आशीष का कार्यकाल मई 2024 तक है। समझौता फार्मूला के  को दिये अन्य प्रस्तावों में कृष्णा पटेल को योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में अद (एस) कोटे से मंत्री बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव में अपना दल (कमेरावादी) के समर्थकों को दो-तीन सीटें देने की पेशकश भी की गयी है।

अपना दल परिवार में फिर से एका होने से पार्टी जहां मजबूत हो जाएगी वहीं चुनाव 2022 में उनकी ताकत और बढ़ जाएगी। इस कोशिश में सबसे बड़ी बाधा अनुप्रिया पटेल की बहन पल्लवी पटेल मानी जा रही हैं। पल्लवी मां कृष्णा पटेल की आंख – कान मानी जाती हैं। लेकिन अनुप्रिया पटेल के समझौता प्रस्ताव में स्पष्ट कहा गया है कि, अपना दल (एस) में पल्लवी और उनके पति के लिए कोई स्थान नहीं होगा। और यही शर्त पटेल परिवार की एका में बाधा बन सकती है।

सूत्रों के मुताबिक अपना दल (कमेरावादी) राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने ऐसे किसी भी प्रस्ताव मिलने से इनकार किया है। साथ ही यह भी कहा है कि, अगर प्रस्ताव मिलता भी है तो वह अंजाम तक पहुंचेगा इसकी उम्मीद कम ही है।

– नवेन्दु प्रकाश सिंह

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