Satish Mishra BSP Mayawati बसपा में सतीश मिश्रा नंबर दो?
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बसपा में सतीश मिश्रा नंबर दो?

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी में महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने पार्टी में मायावती के बाद अब नंबर दो की हैसियत बना ली है। वे पूरे उत्तर प्रदेश में लगातार दौरा कर ब्राह्मण समाज को बसपा के पाले में लाने और ब्राह्मण दलित के गठजोड़ को मजबूत करने के अभियान में लगे हुए हैं। पार्टी के बदले हालात में मायावती द्वारा पहले भाई आनंद कुमार और अब भतीजे आकाश आनंद के पर कतरे जाने से यह बात अब साफ होने लगी है कि सतीश मिश्रा पार्टी में नया “पावर सेंटर” बन गये हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती आने वाले यूपी  विधान सभा अगले साल यूपी में होने वाले चुनाव चुनावों के लिए पूरी ताकत झोंक रखी ने विभिन्न वर्गों को जोड़ने के लिए जातीय सम्मेलनों में भाग लेना शुरू कर दिया है। उनका पूरा जोर दलित समाज के साथ ही ब्राह्मणों को साथ जोड़ने पर है। इस वर्ग को लुभाने का सारा दारोमदार सतीश मिश्रा के हाथों में नजर आ रहा है। पार्टी के ब्राह्मण सम्मेलन में सतीश मिश्रा के साथ ही उनकी पत्नी और बेटा भी बढ़ चढ़ कर शिरकत कर रहे हैं। लेकिन आनंद कुमार और आकाश आनंद का पूरे परिदृश्य से नदारद रहना बसपा में सतीश मिश्रा के रुप में एक नये “पावर सेंटर” के उभार की ओर साफ इशारा कर रहा है।

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बसपा सूत्रों का मानना है कि मायावती नहीं चाहतीं कि उनपर परिवारवाद का आरोप लगे। यही कारण है कि मायावती ने परिवारवाद के आरोपों से बचने के लिये पहले भाई आनंद को  किनारे कर दिया था। अब अपने भतीजे आकाश आनंद को किया साइडलाइन कर दिया है। जनवरी 2019 में मायावती ने पार्टी संगठन को मजबूत करने और युवा वोटरों को जोड़ने के लिए भतीजे आकाश आनंद को नेशनल कोआर्डिनेटर बनाया था।

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आकाश आनंद अगले साल होने वाले 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लेकर काफी सक्रिय थे। आकाश की बनाई सोशल मीडिया टीम काफी आक्रामक थी जिससे बड़ी संख्या में पार्टी के नये समर्थक भी जुड़े थे। आकाश सोशल मीडिया के जरिये लगातार विपक्षी दलों पर हमला बोल रहे थे। इसके साथ ही साथ उन्होंने दिल्ली में दो और पंजाब में एक जनसभा भी संबोधित किया था।

आकाश ने कुछ दिनों पूर्व पंजाब के फगवाड़ा में शिरोमणि अकाली दल – बीएसपी गठबंधन की पहली रैली में सुखबीर सिंह बादल के साथ मंच साझा किया था। इस मंच से उन्होंने मायावती का पत्र भी पढ़ा था। इसके बाद यह माना जाने लगा था कि आने वाले दिनों में आकाश मायावती के वारिस होंगे और बसपा की कमान मायावती अपने भतीजे को सौंप सकती हैं। पर अब आकाश आनंद पार्टी में ह्शिये पर नजर आ रहे हैं। वे ना तो सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं और न ही वह पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं।

पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि आकाश आनंद की सक्रियता से ब्राह्मणों में नाराजगी हो सकती है। मायावती ने ब्राह्मण मतदाताओं को लुभाने का पूरा जिम्मा पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा को सौंप रखा है। इस बीच इस चर्चा ने भी जोर पकड़ लिया है कि 2022 में बसपा की तरफ से मुख्यमंत्री चेहरा सतीश चंद्र मिश्रा हो सकते हैं। यही कारण है कि सतीश चंद्र मिश्रा के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में कई जगहों पर उनकी पत्नी और पुत्र कपिल मिश्रा भी बढ़चढ़ कर भागीदारी करते नजर आये हैं। मायावती नहीं चाहतीं कि ब्राह्मण वोटरों में यह संदेश जाए कि मायावती भी परिवारवाद को बढ़ावा दे रही हैं और बसपा में सिर्फ दलितों को शीर्ष पद मिल सकता है।

सतीश मिश्रा के बसपा में ताकतवर बनने के बाद से खांटी बसपाई रहे तमाम कद्दावर नेता एक – एक कर पार्टी से बाहर जा चुके हैं। बसपा विधानमंडल दल नेता रहे लालजी वर्मा, रामअचल राजभर, सुखदेव राजभर जैसे नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।

कुछ समय पूर्व तक मायावती के वारिस माने जा रहे आनंद कुमार 2017 में विधानसभा चुनाव  राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाये गये थे। लेकिन तब पार्टी  के एक धड़े और बामसेफ ने दबे स्वर से इसकी मुखालफत की थी। इसे देखते हुए मायावती ने आनंद कुमार को किनारे लगा दिया था। अब एक बार फिर इतिहास खुद को दोहराता नजर आ रहा है और मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को भी किनारे कर दिया है।

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