रावत को सुप्रीम कोर्ट से मिल गई राहत

नई दिल्ली।  उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। उत्तराखंड हाई कोर्ट की ओर से उनके खिलाफ सीबीआई जांच का जो आदेश दिया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि रावत के मुख्यमंत्री बनने से पहले भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप दो पत्रकारों की ओर से लगाया गया था। हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था।

असल में दो पत्रकारों ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2016 में झारखंड के ‘गौ सेवा आयोग’ के अध्यक्ष पद पर एक व्यक्ति की नियुक्ति का समर्थन करने के लिए रावत के रिश्तेदारों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए थे। उस वक्त त्रिवेंद्र सिंह भाजपा के झारखंड प्रभारी थे। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर रोक लगा दी है, जिससे रावत को बड़ी राहत मिली है।

जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने कहा- मुख्यमंत्री को सुने बगैर ही हाई कोर्ट द्वारा इस तरह का सख्त आदेश देने से सब चकित रह गए क्योंकि पत्रकारों की याचिका में रावत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध भी नहीं किया गया था। रावत की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुनवाई के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री का पक्ष सुने बगैर प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकती और इस तरह का आदेश चुनी हुई सरकार को अस्थिर करेगा। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ आरोपों की प्रकृति पर विचार करते हुए सच को सामने लाना उचित होगा। यह राज्य के हित में होगा कि संदेह दूर हो। इसलिए मामले की जांच सीबीआई करे।

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