देश | उत्तराखंड

uttarakhand glacier disaster : भारत-चीन सीमा के पास टूटे ग्लेशियर में सेना ने 430 लोगो का किया रेस्क्यु, 8 लोगों का शव बरामद

उत्तराखंड में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच एक और मुसीबत सामने आ खड़ी हो गई है। उतराखंड के चमाली में एक बार फिर बड़ा हादसा हो गया है। भारत चीन सीमा के पास राज्य की नीति घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटने की सूचना मिली है। उत्तराखंड में चमोली जिले की नीति घाटी की सीमा से सटे इलाके में शुक्रवार को हिमस्खलन हुआ है। सुचना मिलते ही लोगों में अफरा-तफरी मच गई। यहां लोगों के बड़ी संख्या में फंसे होने का अनुमान लगाया जा रहा है। सूचना मिलते ही सेना ने अपना रेस्क्यू ऑपरेशन शुरु कर दिया। इस प्राकृतिक आपदा से 430 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है जिनमें से 6 की हालत गंभीर बनी हुई है, वहीं अब तक 8 लोगों का शव भी बरामद हुआ है।

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घायलों को अस्पताल पहुचाया गया

आर्मी के अनुसार अभी तक 8 शव हुए बरामद हुए हैं। लगभग 425 से 430 लोगों के फंसे होने की आशंका है। लगातार राहत और बचाव कार्य जारी है। भारतीय सेना के आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। सेना के अनुसार सुराई ठोटा से लेकर मलारी क्षेत्र में कई ग्लेशियरों के सड़क पर गिरने की जानकारी है। दो शव सुबह 7:30 बजे बरामद किए गए वहीं 9:00 से 10:00 के बीच छह शव बर्फ से बाहर निकाले गए। सुमना में घायलों को जोशीमठ सेना के अस्पताल में वायुसेना के हेलिकॉप्टर से पहुंचाने की कोशिश हो रही है।

आपदा के समय दो कैंप लगे थे

सेना और SDRF से मिली जानकारी के मुताबिक बर्फीली तूफान वाली जगह पर बॉर्डर रोड्स के मजदूरों के दो कैम्प मौजूद थे। यहां पर पुल निर्माण का काम चल रहा था। जब तूफान आया उस वक्त मौसम बहुत खराब था। लगातार पांच दिनों भारी बारिश और बर्फबारी हो रही थी। मौसम के बहुत अधिक खराब और बर्फबारी की वजह से कई जगहों पर रास्ता बंद हो गया था। इस वजह से राहत और बचाव टीम को पहुंचने में काफी वक्त लगा। इस जगह से सेना का कैंप करीब तीन किलोमीटर दूरी पर है। खबर मिलते ही सेना के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया है पर पूरे इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन खराब मौसम इनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है। संचार सुविधा न होने के कारण सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है।

 

मुख्यमंत्री द्वारा परियोजनाओं का काम रोका गया

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इस बारे में जानकारी साझा करते अलर्ट जारी किया है। उन्होंने बताया कि वह लगातार  जिला प्रशासन और बीआरओ के सम्पर्क में हैं। सीएम रावत के अनुसार जिला प्रशासन को मामले की पूरी जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दे दिए हैं। साथ ही एनटीपीसी और अन्य परियोजनाओं में रात के समय काम रोकने के आदेश दे दिए हैं ताकि कोई अप्रिय घटना ना होने पाये। मुख्यमंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से भी बात हो चुकी है उन्होंने मदद का आश्वासन दिया है।

SDRF घटनास्थल के लिए रवाना

चमोली की सुमना  पोस्ट से आगे रिमझिम पोस्ट की तरफ ग्लेशियर टूटने की घटना के बाद बचाव इकाइयां, शासन व प्रशासन तत्काल हरकत मे आ गया। रात को मौसम खराब होने व बर्फबारी से मार्ग अवरुद्ध होने के  बाद भी SDRF रेस्क्यू टीम इंस्पेक्टर हरक सिंह राणा के नेतृत्व में रेस्क्यू  के लिए रवाना हुई। जोशीमठ से 31 किलोमीटर आगे रात्रि में ही सुराईथोटा पहुंचे, जहां ग्रीफ का बेस कैंप है। ग्रीफ कमांडर से संपर्क किया गया। ग्रीफ बेस कैंप से  31 किलोमीटर आगे  मलारी है और वहां से 16 किलोमीटर आगे सुमना पोस्ट है। जहां ये घटना हुई। SDRF रेस्क्यू टीम इंचार्ज इंस्पेक्टर हरक सिंह राणा द्वारा सेटेलाइट फोन के माध्यम से  अवगत कराया गया है कि SDRF की 9 सदस्यीय टीम बर्फबारी से रास्ता अवरुद्ध होने के कारण पैदल भाप कुंड  पहुंची  है। इसके साथ ही SDRF की एक टीम रतूड़ा से जोशीमठ पहुंच गई है। इसके अलावा दो टीमों को मय रेस्क्यू उपकरणों व आवश्यक सामग्री के साथ वाहिनी मुख्यालय व सहस्त्रधारा पोस्ट पर अलर्ट में रखा गया है, जो आवश्यकता पड़ने पर तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना होगी।

कई लोग अब भी लापता

चमोली पुलिस के मुताबिक घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इलाके में सेना, NDRF और BRO मिलकर अभियान चला रहे हैं। भारी हिमपात और भूस्खलन की वजह से बचाव कार्य पूरा होने में अभी कई घंटे लगने की संभावना है। इलाके में अभी भी कई लोग लापता हैं, जिन्हें तलाश करने का काम जारी है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन से बात करके शाम तक रिपोर्ट देने को कहा है। इलाके में काफी नुकसान की आशंका जताई जा रही है. घटना स्थल से बर्फ हटाने और रेस्क्यू का काम तेजी से चल रहा है।

भारत-चीन में रहता है तनाव

चमोली ज़िले का ये इलाका उत्तराखंड के सबसे दुर्गम इलाक़ों में से एक है। यहां बाराहोती मैदान को लेकर भारत-चीन के बीच तनाव बना रहता है। इस इलाक़े में सीमा तक सड़क पहुंचाने का काम चल रहा है। और ये सड़क उन रणनैतिक महत्व की सड़कों में है, जिन्हें चीन के खतरे को देखते हुए बनाया जा रहा है। चीनी सैनिक लगभग हर गर्मी में यहां घुसपैठ की कोशिश करते हैं। इसलिए यहां भारतीय सेना के साथ-साथ ITBP की भी तैनाती रहती है। ये सड़क चमोली जिले के जोशीमठ से मलारी, सुमना, रिमखिम को जोड़ेगी, जो बाराहोती मैदान के पास है।

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Bhoot Mela Ganga Ghat

Bhoot Mela Ganga Ghat कानपुर | हमारे देश भारत में अंधविश्वास हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है. एक बार फिर से कानपुर की गंगा घाटों में अंधविश्वास का खेल देखने को मिला. आप भी इन तस्वीरों को देख कर चौक जाएंगे क्योंकि यहां आज भूतों और तांत्रिकों का मेला लगा. तस्वीरें भी ऐसी की देख कर ही रूह कांप जाए.  खुले बालों में चीखती-चिल्लाती महिलाएं हो या फिर अजीबोगरीब व्यवहार करते पुरुष. आखिर आज गंगा की घाटों में ये क्या हो रहा है? बता दें कि यह मेला पिछले कई 100 सालों से गंगा के घाटों में लगता है. यहां दूर-दूर से लोग अपनी भूत बाधा दूर करने पहुंचते हैं.

तांत्रिकों से करनी होती है पहले से बात

उत्तर प्रदेश के लखनऊ से अपनी बेटी का भूत भगाने के लिए Bhoot Mela Ganga Ghat पहुंचे राम बल्लभ शर्मा ने बताया कि यह इतना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि इस काम के लिए तांत्रिकों से पहले से कॉटेक्ट में रहना पड़ता है. उन्होंने कहा कि तांत्रिक पहले से पूजा सामग्री की लिस्ट देते हैं जिसे लेकर आज के विशेष दिन यहां पहुंचना होता है. उन्होंने कहा कि मैंने यहां आए कई लोगों से सुना है कि इससे यहां भूत बाधा दूर हो जाती है. उन्होंने कहा कि मेरी बेटी है पिछले 4 सालों से परेशान हैं और डॉक्टरों के चक्कर लगाकर हम सब परेशान हो गए हैं. लेकिन आज जब यहां पहुंचे तो पूजा पाठ के बाद से ही बेटी में कुछ चमत्कारी परिवर्तन देखने को मिले हैं. ऐसा लगता जय की अब सब ठीक हो गया है.

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सैकड़ों साल से लगता है मेला

गंगा के तट पर दुकान लगाने वाले सोहन का कहना है कि यहां सैकड़ों सालों से मेला लगता रहा है. उसने बताया कि बाप दादा से भी हमने इस मेले के बारे में सुना है. हालांकि सुमन का कहना है कि दशहरा के समय यहां पर विशेष भीड़ उमड़ती है. उसने कहा कि इसके लिए पहले से विशेष तिथियां निर्धारित कर दी जाती है. सोहन का कहना कि मेरे होश संभालने के बाद से मैंने कई बार लोगों को संतुष्त होकर जाते देखा है. सोहन ने कहा कि इसलिए हम तो इन सब पर विश्वास करते हैं. सोहन का कहना है कि खासकर एकादशी और पूर्णिमा को इस मेले का आयोजन किया जाता है . उन्होंने ये भी बताया कि कोरोना का कारण इस बार बहुत ज्यादा समय के बाद यहां मेला लगाया गया है.

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