ना कोई सैलरी ना कोई पेंशन ..आइये जानते है ममता दीदी का सादगी भरा जीवन कैसा है

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नारी शक्ति की विजय कहें या सादगी की विजय कहें..दोनों बातें एक ही इंसान ने सच कर दिखाई है। वो है बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। एक सादा सा लिबास और हवाई चप्पल पहनें ममता दीदी सभी राजनीतिक पार्टियों पर भारी पड़ती है। यह उन्होनें बंगाल में तीसरी बार मुख्यमंत्री बन साबित भी कर दिया। ममता दीदी का कद जितना छोटा है उनका राजनीतिक करियर उतना ही बड़ा है। आज ममता बनर्जी का शपथ ग्रहण समारोह था जो अत्यंत सामान्य तरीके से हुआ। बाकी मंत्रियों को बाद में शपथ दिलाई जाएगी। सादा लिबास में लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता स्थापित करने वाली ममता का जीवन भी उतना ही सादगी भरा है।

विधायक से लेकर सांसद, कैबिनेट मंत्री और फिर तीन बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ममता एक आम इंसान की तरह अपना जीवन बिताती हैं। सूती साड़ी और पैरों में हवाई चप्पल अब उनकी पहचान बन चुकी है और यही वजह है कि बंगाल की जनता ने लगातार तीसरी बार उन पर भरोसा जताया।एक तरफ बीजेपी की प्रचंड सेना और दूसरी तरफ अकेली ममता बनर्जी ..फिर भी ममता दीदी ने बंगाल पर जीत हासिल कर ही ली। ममता बनर्जी ने बंगाल में जीत का डंका बजाया है। और तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की है। आइये जानते है कि ममता दीदी अपना जीनव कैसे जीती है और उनका खर्चा किसा प्रकार चलता है। ममता दीदी ने न्यूज 18 को दिए एक इंटरव्यु में बताया था कि वह सरकार के किसी भी ऐशो आराम का उपयोग नही करती है।

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नहीं लेती कोई सैलरी या कोई पेंशन

ममता बनर्जी का जन्म एक आम बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। ममता विधायक से लेकर सांसद और कैबिनैट मंत्री भी रही है। इसलिए वह पूर्व सांसद और मंत्री के तौर पर पेंशन की हकदार है। बीते 7 साल से उन्होंने पूर्व सांसद के तौर पर पेंशन तक नहीं ली है। इसके अलावा ममता सूबे के मुख्यमंत्री को मिलने वाली सैलरी भी नहीं लेती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करके वह सरकार के लाखों रुपये बचा रही हैं और यही उनका तरीका है। ममता सरकारी कार तक का इस्तेमाल नहीं करती हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने हमेशा प्लेन की इकोनॉमी क्लास में ही सफर किया है। यहां तक कि कभी सरकारी गेस्ट हाउस में ठहरना भी हो तो वह खुद उसका खर्च उठाती हैं। वह बताती हैं कि चाय तक अपने पैसे से पीती हूं।

कैसे चलता है खर्चा

सैलरी और पेंशन न लेने के बावजूद उनका खर्च कैसे चलता है। इस सवाल के जवाब में ममता कहती हैं कि उनकी किताबों की रॉयल्टी से इसका पैसा आता है। ममता की 80 से ज्यादा किताबें छप चुकी हैं जिनमें से कुछ बेस्ट सेलर भी हैं। इसके अलावा ममता गानों के बोल लिखकर भी अपनी आमदनी करती हैं। पेटिंग करते ममता बनर्जी की कई तस्वीरें आए दिन सोशल मीडिया पर वायरल होती हैं। उन्हें पेटिंग का शौक भी है और इस काम में वह कुशल भी हैं। हालांकि इस इंटरव्यू में वह बताती हैं कि वह पेटिंग्स को कभी कमाई का जरिया नहीं बनातीं और इनसे होने वाली इनकम को दान कर देती हैं।

साल में कितनी कमाई?

इंटरव्यू के दौरान ममता ने बताया कि गाने लिखने के लिए म्यूजिक कंपनी उन्हें सालाना करीब तीन लाख रुपये देती है।  इसके अलावा किताबों की रॉयल्टी से भी साल में 10 लाख के करीब आमदनी हो जाती है। उनके पास आय के सीमित साधन हैं और वह कहती हैं कि अकेले होने की वजह से इतना पैसा उनके लिए काफी है।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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