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West Bengal : मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने शपथ ग्रहण के बाद ही इन सेवाओं पर लगाई सख्त पाबंदियां

कोलकाता | पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने शपथग्रहण के तुरंत बाद राज्य में कोरोना (Corona) स्थिति की आज समीक्षा की और कोरोना वायरस (Corona virus) के प्रसार को रोकने के लिए नई पाबंदियों की घोषणा की जिनके तहत स्थानीय ट्रेन सेवाओं पर रोक (ban on local train services) लगा दी गई है।

शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक के बाद ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने कहा कि नये प्रतिबंधों के तहत मेट्रो रेल और राज्य परिवहन सेवाएं भी बृहस्पतिवार से 50 प्रतिशत तक सीमित कर जाएंगी। संवाददाता सम्मेलन में बनर्जी ने कहा कि बैंक सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक काम करेंगे और सरकारी दफ्तरों को 50 प्रतिशत कार्यबल के साथ काम करने को कहा गया है।

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स्थानीय ट्रेन सेवाओं पर रोक

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य प्रशासन ने निजी कंपनियों से घर से काम करने को प्राथमिकता देने का भी अनुरोध किया है। बनर्जी ने कहा, ‘स्थानीय ट्रेनों पर कल से रोक रहेगी। राज्य परिवहन एवं मेट्रो सेवाएं भी 50 प्रतिशत तक सीमित होंगी। सात मई से हवाई यात्रियों को बंगाल में प्रवेश की अनुमति नेगेटिव आरटी-पीसीआर रिपोर्ट दिखाने पर ही मिलेगी जो यात्रा से 72 घंटे से अधिक का नहीं होना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लंबी दूरी की ट्रेनों और अंतरराज्यीय बसों से राज्य में प्रवेश करने वाले लोगों को भी उनके साथ आरटी-पीसीआर की नेगेटिव रिपोर्ट (negative report of RT-PCR) लानी होगी। बनर्जी ने बताया कि सभी श़ॉपिंग मॉल, सैलून, रेस्तरां, बार, खेल परिसर, जिम, स्पा और स्विमिंग पूल अभी बंद ही रहेंगे।

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कोरोना से मरने वालों के परिजनों को सरकार मुआवजा नहीं दे सकेगी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह कोरोना से मरने वाले हर मरीज के परिजनों को मुआवजा नहीं दे सकती है। कोरोना से मरे लोगों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार ने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें उसने कहा है कि वह सबको मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा है कि कोरोना से जिनकी मौत हुई है, उनके परिवारों को सरकार चार लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकेगी। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोरोना से होने वाली हर मौत को कोविड मौत के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने कहा है कि आपदा कानून के तहत अनिवार्य मुआवजा सिर्फ प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ आदि पर ही लागू होता है। सरकार का कहना है कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजा दिया जाए और दूसरी पर नहीं, तो यह गलत होगा। केंद्र ने 183 पन्नों के अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि इस तरह का भुगतान राज्यों के पास उपलब्ध राज्य आपदा मोचन कोष यानी एसडीआरएफ से होता है। अगर राज्यों को हर मौत के लिए चार लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, तो उनका पूरा फंड ही खत्म हो जाएगा।

केंद्र का कहना है कि अगर कोरोना से मरे लोगों को चार लाख का मुआवजा देने का राज्यों को निर्देश दिया गया तो इससे कोरोना के खिलाफ जारी लड़ाई के साथ ही बाढ़, चक्रवात जैसी आपदाओं से भी लड़ पाना असंभव हो जाएगा। केंद्र ने अदालत को बताया कि कोरोना से होने वाली सभी मौतों को कोविड से हुई मौत के रूप में ही रिकार्ड किया जाना चाहिए। फिर चाहे वह मौतें कहीं भी क्यों न हुईं हों।

गौरतलब है कि अब तक सिर्फ अस्पतालों में हुई कोरोना संक्रमितों की मौत को ही कोविड डेथ के रूप में रिकार्ड किया जाता था। घर पर या अस्पताल की पार्किंग या गेट पर होने वाली मौतों को भी कोविड रिकार्ड में दर्ज नहीं किया जा रहा था। इस वजह से मौत के आंकड़ों में विसंगतियां देखने को मिल रही थीं। सरकार ने इस तरह की हर मौत को कोविड डेथ के रूप में दर्ज करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई सोमवार को करेगा।

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