वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी कोरोना के नए-नए वैरिएंट को जन्म देगी- प्रोफेसर ल्यूक मॉन्टैग्नियर - Naya India
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वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी कोरोना के नए-नए वैरिएंट को जन्म देगी- प्रोफेसर ल्यूक मॉन्टैग्नियर

NEW DELHI: देश में 16.18 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज़ लग चुकी है। और 4.38 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी है। भारत सरकार और अन्य देशों की सरकार जनता पर वैक्सीन लगवाने पर जोर दे रही है। सभी का यही मानना है कि कोरोना का एकमात्र बचाव वैक्सीन ही है। जिसे कोरोना की संजीवनी बूटी कहा जा रहा है। लेकिन अब इस पर सवाल उठाये जा रहे है। फ्रांस के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर ल्यूक मॉन्टैग्नियर ने टीकाकरण पर सवाल उठाकर सबको चौंका दिया था। उन्होंने कहा था कि वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी कोरोना के नए-नए वैरिएंट को जन्म देगी। हालांकि, भारतीय वैज्ञानिक गगनदीप कांग ने ल्यूक के इस दावे को बेबुनियाद करार दिया है। कांग ने इस दावे को खारिज किया है।वैक्सीन की दोनों डोज़ लेने के बाद शरीर में एंटीबॉडी बनती है। इसके बाद कोरोना अपना रूप बदल लेता है जिसके बाद यह और भी ताकतवर हो जाता है। इसके लिए कुछ वैज्ञानिक वैक्सीन का तीसरा डोज़ लगवाने पर विचार कर रह है। जिसे बूस्टर डोज़ कहा जा रहा है।

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बचाव का एकमात्र उपाय वैक्सीन

गगनदीप कांग ने कहा कि COVID-19 के वैरिएंट्स को कम करने का एकमात्र तरीका वैक्सीनेशन को बढ़ाना ही है। बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन को गलत बताना वैज्ञानिक रूप से तथ्यहीन है। कांग ने कहा कि जाहिर तौर ल्यूक मॉन्टैग्नियर ने यह नहीं कहा था कि वैक्सीन लगवाने वाले सभी लोग दो साल में मर जाएंगे, जैसा कि कुछ लोग दावा कर रहे हैं। उन्होंने ये कहा था कि वैक्सीन के जरिए बनी एंटीबॉडी वायरस के नए वैरिएंट बनाती है। कुछ लोग का ये कहना है कि कोरोना वैक्सीन से ज्यादा मौते हो रही है। वैज्ञानिकों का यह कहना है कि कोरोना से बचाव का एकमात्र उपाय वैक्सीन है। सरकार से लेकर विशेषज्ञों तक लोगों से ज्यादा संख्या में वैक्सीन लगवाने की अपील कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कोरोना मंत्र दिया था जिसमें कहा था कि जब तक दवाई नहीं जब तक ढ़िलाई नहीं।

वैक्सीन के काम करने का तरीका

डॉक्टर कांग ने कहा कि जब हम संक्रमित होते हैं या फिर जब वैक्सीन लगवाते हैं तो हमारे शरीर में पूरे वायरस या वायरस के हिस्से के जवाब में एंटीबॉडी बनती है। वायरल संक्रमण में, एंटीबॉडी सहित शरीर का इम्यून रिस्पॉन्स वायरल की प्रतिकृति (रेप्लिकेशन) बनने से रोक देता है और हम संक्रमण से ठीक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए वैक्सीनेशन ही एकमात्र उपाय है और इसे तेज किया जाना चाहिए। वैक्सीन लेने के शरीर में एंटीबॉडी बनती है जिससे कोरोना से बचा जा सकता है। जो कोरोना से लड़ने में सहायक होती है।

 

गगनदीप कांग ने बताया कि हमारा इम्यून रिस्पॉन्स वायरस से तुरंत लड़ना नहीं शुरू करता, बल्कि ये इम्यून सिस्टम को वायरस की पहचान करने की ट्रेनिंग देता है। बहुत कम लोग इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड (कमजोर इम्यूनिटी वाले) होते हैं। संभव है कि इन लोगों में वायरस प्रतिकृति लंबे समय तक रह जाए। ऐसे दुर्लभ मामलों में वैरिएंट का विकास हो सकता है, क्योंकि ये इम्यून रिस्पॉन्स से बच जाते हैं।

इस वजह से कम होता है प्रभाव

प्रोफेसर ल्यूक मॉन्टैग्नियर के दावे का जवाब में डॉ. कांग ने कहा कि वैरिएंट्स कई हैं, लेकिन इम्यूनिटी से बचने वाले वैरिएंट कम हैं। जैसे कि वायरस आबादी के जरिए बड़े पैमाने पर फैलता है। कुछ वैरिएंट वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी से बचने में ज्यादा सक्षम होते हैं। ये वैक्सीन के प्रभाव को कुछ हद तक कम प्रभावी बना देते हैं। शायद हम वर्तमान में B1.351 और B1.617.2 के साथ ऐसा ही देख रहे हैं। हालांकि, कतर और UK के डेटा के अनुसार वैक्सीन की दो डोज इससे सुरक्षा देती हैं।

क्या कहा था Montagnier ने?

प्रोफेसर ल्यूक मॉन्टैग्नियर ने कहा था कि कोरोना वैक्सीन वायरस को रोकने के बजाए उसे और मजबूत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि कोरोना के नए-नए वैरिएंट उत्पन्न होने का कारण वैक्सीनेशन ही है। एक इंटरव्यू में मॉन्टैग्नियरने कहा था कि महामारी विज्ञानियों को वैक्सीन से जुड़े तथ्यों के बारे में पता है लेकिन फिर भी वे खामोश हैं। हमें ये समझना चाहिए टीके वायरस को नहीं रोकते, बल्कि वह इसके विपरीत काम करते हैं यानी वायरस को ताकतवर बनाते हैं। टीकाकरण की वजह से कोरोना के नए वैरिएंट मूल वैरिएंट की तुलना में अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।

नोबल पुरस्कार विजेता ल्यूक मॉन्टैग्नियर

फ्रांस के वायरोलॉजिस्ट ल्यूक मॉन्टैग्नियर ने 2008 के नोबेल पुरस्कार जीता था। इस सवाल के जवाब में कि टीकाकरण शुरू होने से बाद से जनवरी से नए मामले और मौत के आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं। ये मानना बहुत से लोगों का है। मॉन्टैग्नियर ने कहा था, ‘यह एक ऐसी वैज्ञानिक, मेडिकल गलती है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसे इतिहास में दर्ज किया जाएगा, क्योंकि टीकाकरण ही नए वैरिएंट उत्पन्न कर रहा है।  अपनी बात को समझाते हुए उन्होंने कहा कि वैक्सीन एंटीबॉडी बनाती हैं, जो वायरस को कोई दूसरा रास्ता खोजने या मरने पर विवश करती हैं और इसी के चलते नए वैरिएंट उत्पन्न होते हैं।

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