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नोएडा में OTP हैक कर किसी ओर ने लगवाया टीका, सतर्क रहें कहीं आपके साथ ना हो जाए ऐसा..

noida: आजकल देश में साइबर क्राइम का अपराध बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन कोई ना कोई मामला सुनने तो मिलता है। ताजा मामला यबपी के नोएड़ा से जुड़ा है। जहां पर एक महिला के फोन से OTP हैक कर दो युवकों ने कोरोना वैक्सीन लगवा ली। इस घटना के बाद महिला ने साइबर क्राइम की रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस में भी मामला दर्ज किया है। पुलिस ने कड़ी छानबीन कर उन दो युवकों का पता लगा लिया है। सरकारें जनता से अपील ये कर रही है कि अधिक संख्या में कोरोना वैक्सीन लगवाएं लेकिन अपने ही पहचान पत्र से दूसरों के से नहीं। लेकिन कुछ लोग पता नहीं क्यों ऐसे काम कर रहे है। आप भी ऐसे मामलों में सावधान रहें क्यों कि ऐसे मामले बहगुत सुनने को मिल रहे है। वैक्सीनेशन के नाम पर लिंर भेजे जा रहे है गलती से भी किसी भी लिंक पर टच ना करें अन्यथा आप भी इसी के शिकार हो सकते है। भारत सरकार इस संबंध में निर्देश ज़ारी कर रही है। आइयें जानते है पूरा मामला…

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क्या था पूरा घटनाक्रम

नोएडा में दादरी के मायचा गांव की निवासी चंचल ने बताया कि उसके फोन से किसी ने ओटीपी को हैक कर लिया और मेरे नाम पर कोरोना वैक्सीन लगवा ली।चंचल शर्मा फिलहाल गाजियाबाद के एक कॉलेज से मास्टर ऑफ कॉमर्स की पढ़ाई कर रही है। दरअसल कुछ दिन पहले चंचल के फोन पर मई तके महीने में एक मैसेज आया था जिसमें यह लिखा था कि आपके कोरोना वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन हो गया है। टीका लगवाने की तारीख 16 मई की दी हुई थी। चंचल ने उस मैसेज को अनदेखा कर दिया शायद यह सोचकर कि इन दिनों ऐसे ऐसे बहुत से फैक मैसेज आ रहे है जो लोगों को भ्रमित करने का काम कर रहे है। कुछ दिन बाद चंचल की बहन ने कहा कि वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन करवा लो। जब उसने स्लॉट बुक करना चाहा तो  पोर्टल पर लिखा आया कि आप टीका लगवा चुके हैं। इसके बाद महिला को फर्जीवाड़े का पता चला। महिला ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज करवाई है। यह सूचना मिलने के बाद साइबर सेल भी एक्शन में आ गया है।

युवती ने बताया दोनों आरोपियों का नाम

इस घटना के बाद युवती ने तुरंत सीएम और पुलिस को ट्वीट किया। ट्वीट में यह लिखा गया कि दो लोगों ने उनके मोबाइल का ओटीपी हैक करके कोरोना का टीका लगवा लिया है। अपने इस ट्वीट में चंचल ने सीएम आदित्यनाथ और यूपी पुलिस को टैग किया। इसके बाद नोएडा पुलिस हरकत में आई। एडीसीपी रणविजय सिंह ने युवती से संपर्क किया। फिर युवती ने सारी जानकारी दी। इस घटना के बाद पुलिस ने तुरंत एक्शन ले लिया। युवती के अनुसार आरोपी का नाम राम कुमार और अर्जुन बताया जा रहा है। आरोपियों ने आरोग्य सेतु ऐप से रजिस्ट्रेशन किया था। ऐप पर ही दोनों के नाम ही सामने आए हैं। पुलिस ने दोनों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। पीड़िता का कहना है वह इन दोनों को नहीं जानती।

पहचान पत्र में फोटो होनी अनिवार्य है

टीका रजिस्ट्रेशन के लिए लोगों को फोटो लगा कोई भी पहचान पत्र जमा करना अनिवार्य होता है। इसके तहत डीएल, पेन कार्ड, पासपोर्ट, मनरेगा जॉब कार्ड, श्रम मंत्रालय द्वारा जारी कार्ड, बैंक या पोस्ट ऑफिस द्वारा जारी पासबुक, आधार कार्ड, पहचान पत्र या वोटर आई कार्ड में से कोई भी एक पहचान पत्र जमा करना होता है। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि युवती का मोबाइल नंबर 2018 से प्रयोग में है। पुलिस को आशंका थी कि यदि हाल ही में नंबर जारी कराया गया होगा तो आरोपियों से उसका डुप्लीकेट सिम निकलवाया होगा। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने युवती के दस्तावेजों का प्रयोग कर नंबर अपने नाम पर जारी करा लिया। इसी के चलते रजिस्ट्रेशन के समय युवती के पास कोई ओटीपी नहीं आया।

 एडीसीपी रणविजय सिंह की राय

उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर क्राइम एक्सपर्ट कर्मवारी सिंह ने कहा कि कोरोना वैक्सीन का स्लॉट बुक करते समय आधार कार्ड से रजिस्ट्रेशन होता है। इसके लिए मोबाइल पर ओटीपी आता है, उसके बाद ही रजिस्ट्रेशन पूरा होता है। वैक्सीन लगते ही संबंधित नंबर पर मैसेज जाता है। अगर ऐसा मामला हुआ है तो यह कोई तकनीकी खामी हो सकती है और अगर तकनीकी खामी नहीं है तो इस मामले में गहन जांच की आवश्यकता है क्योंकि अभी तक इस तरह का कोई मामला उनकी जानकारी में नहीं आया है। दो लोगों ने युवती के फोन पर ओटीपी हैक कर कोरोना का टीका लगवाया है। युवती ने जब खुद टीकाकरण के लिए रजिस्ट्रेशन किया तो उसे इस बारे में पता चला। उसका कहना है कि वह दोनों को नहीं जानती है। मामला साइबर सेल को ट्रांसफर कर दिया गया है। पूरे मामले को समझने के लिए अब पुलिस स्वास्थ्य विभाग की मदद लेगी ताकि यह पता चल सके कि दोनों आरोपियों ने युवती के मोबाइल नंबर का प्रयोग करके कैसे टीका लगवा लिया। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।

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कोरोना काल में स्कूल से वेतन ना मिलने के कारण ताइक्वांडो कोच ने की आत्महत्या

taekwondo coach suicide

दिल्ली |  कोरोना काल में ऐसे बहुत से मामले सुनने को मिले है जहां यह कहा जा रहा है कि मार्च 2020 में जब से लॉकडाउन लगा है तभी से प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों (taekwondo coach suicide ) को वेतन नहीं दिया गया है। लॉकडाउन के कारण कोई और काम भी नहीं हैं। इस कारण दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं हो रही है। इसी से परेशान एक ताइक्वांडो कोच ने आत्महत्या कर जान दे दी। मामला दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके से जुड़ा है। कहा जा रहा है कि वेतन ना दिए जाने के कारण  46 वर्षीय ताइक्वांडो कोच ने अपनी जान दे दी। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। मृतक की पहचान तनूप जोहर के रूप में की गयी है और वह रोहिणी के एक स्कूल में काम करता था, लेकिन पिछले करीब एक वर्ष से भी अधिक समय से वह बेरोजगार था। पुलिस के मुताबिक तनूप ने मंगलवार को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

taekwondo coach suicide

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सुसाइड लोट में स्कूल प्रबंधन का नाम ( taekwondo coach suicide )

पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। जिसमें तनूप ने स्कूल प्रबंधन से जुड़े दो व्यक्तियों के नाम का उल्लेख किया है। तनूप ने स्कूल प्रशासन पर वेतन नहीं देने का आरोप लगाया है। तनूप ने सुसाइड नोट में कहा है कि वेतन नहीं मिलने से वह बेहद परेशान था और उसके पास हाल में कोई काम नहीं था। पुलिस ने बताया कि तनूप ने वेतन नहीं मिलने के कारण स्कूल प्रबंधन के खिलाफ पिछले वर्ष श्रमिक न्यायालय में मुकदमा भी दायर किया था।

taekwondo coach suicide

मृतक के सहयोगी का बयान

स्कूल में तनूप के एक सहयोगी ने कहा कि पिछले वर्ष दो महीने तक ऑनलाइन कक्षाएं लेने के बाद तनूप ने स्कूल प्रशासन से वेतन की मांग की थी।  लेकिन स्कूल प्रशासन ( taekwondo coach suicide )की ओर से कहा गया है कि जैसे ही बच्चों के पैरेंट्स की और से पीस आती है तो वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा। चार माह के बाद हमने दोबारा स्कूल प्रशासन से वेतन की मांग की, तो उन्होंने हमसे नौकरी से इस्तीफा देने के लिए कहा। हम स्कूल के खिलाफ श्रमिक न्यायालय में भी गए, हम अब भी अपने वेतन का इंतजार कर रहे हैं। बाहरी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त परविंदर सिंह ने कहा कि तनूप पिछले करीब एक वर्ष से भी अधिक समय से स्कूल में काम नहीं कर रहा था। तनूप की ओर से लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है और अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

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