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जानें, संक्रमण के फैलाव पर वैज्ञानिकों ने क्यों बताया पंखों को महत्वपूर्ण, ये है पूरी गाइडलाइन

New Delhi: देश में कोरोना का दूसरी लहर के प्रभाव के कम होने और तीसरी लहर की भविष्यवाणी के साथ ही डॉक्टरों और सरकारें सतर्क हैं. देश कोरोना का प्रकोप से एक बार बेहार हो चुका है, यहीं कारण है कि अब केंद्र सरकार सतर्क है और अपने वैज्ञानिक सलाहकारों द्वारा जारी की जा रही जानकारी को आम लोगों तक लगातार पहुंचा रही है. इसी कड़ी में अब केंद्र सरकार के प्रमुख वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए कई महत्वपूर्ष जानकारियों के साथ ही एक एडवाइजरी जारी की है. वैज्ञानिकों ने कहा है कि भारत में महामारी के प्रकोप के बीच हमें एक बार फिर सतर्क रहे की जरूरत है. उन्होंने कहा है कि सामान्य नियमों को याद रखने की जरूरत है जिसके जरिए सार्स-CoV-2 वायरस का ट्रांसमिशन सीमित किया जा सकता है.

संक्रमण को रोकने के लिए चाहिए अच्छा वेंटिलेशन

वैज्ञानिकों द्वारा जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया है कि दफ्तरों और घरों में बेहतर वेंटिलेशन के जरिए संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है. सलाह में कहा गया कि अच्छे वेंटिलेशन के जरिए एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे में संक्रमण के ट्रांसमीट होने की आशंका कम रहती है. वैज्ञानिकों ने कहा कि इस बात में कोई शक नहीं है कि देश में एक बार फिर से कोरोना के मामले कम हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में वैक्सीनेशन की रफ्तार खासा प्रभावित करने वाली नहीं है. यहीं कारण है कि हमें संक्रमण के फैलने को लेकर थोड़ा सतर्क रहना चाहिए.

दूषित हवा को फैलने से रोकना जरूरी

वैज्ञानिकों ने कहा कि दफ्तरों और घरों में वेंटिलेशन को लेकर खास ध्यान देने की जरूरत है. इस संदर्भ में सलाह दी गई है कि सेंट्रल एयर मैनेजमेंट सिस्टम वाली बिल्डिंगों में सेंट्रल एयर फिल्टर में सुधार करने से काफी मदद मिलेगी. इसके साथ ही एडवाइजरी में ऑफिस, ऑडिटोरियम, शॉपिंग मॉल आदि में गैबल फैन सिस्टम और रूफ वेंटिलेटर के उपयोग की सिफारिश की गई है. दिशा निर्देशों में कहा गया है कि पंखा रखने की जगह भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंखा ऐसी जगह पर नहीं होना चाहिए जहां से दूषित हवा सीधे किसी और तक जा सके.

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हवा में 10 मीटर तक हो सकता है ट्रांसमिशन

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय ने अपनी सलाह में कहा है कि एरोसोल और ड्रॉपलेट्स के जरिए वायरस का ट्रांसमिशन तेजी से होता है. एरोसोल हवा में 10 मीटर तक जा सकता है. सलाह में कहा गया है कि संक्रमित व्यक्ति के 2 मीटर के दायरे में ड्रॉपलेट्स गिरती हैं. एडवाइजरी में कहा गया है कि अगर किसी संक्रमित शख्स में लक्षण नहीं भी हैं तब भी उससे पर्याप्त ड्रॉपलेट्स निकल सकती हैं जिससे और लोग भी संक्रमित हो सकते हैं. कहा गया है कि संक्रमित व्यक्ति द्वारा सांस छोड़ने, बात करने, बोलने, गाने, हंसने, खांसने या छींकने आदि के दौरान लार और नाक के जरिए ड्रॉपलेट्स और एरोसोल बन सकते हैं जो वायरस का ट्रांसमिशन फैला सकते हैं.

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