मोदी सरकार का सेना-प्रेम!


[EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 16 May, 2019 07:22 AM | Total Read Count 141
मोदी सरकार का सेना-प्रेम!

नरेंद्र मोदी सरकार का मुख्य मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा है। सेना का सम्मान भारतीय जनता पार्टी का नारा है। लेकिन भाजपा के सेना की प्रेम की हकीकत क्या है? इस खबर पर गौर कीजिए। घटिया गोला-बारूद और युद्ध उपकरणों से बढ़ती दुर्घटनाओं पर भारतीय सेना ने चिंता जताई है। सेना ने बताया है कि घटिया क्वॉलिटी के गोला-बारूद के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में सैनिकों की जानें जा रही हैं, सैनिक घायल हो रहे हैं और इससे रक्षा उपकरणों को भी नुकसान पहुंच रहा है। सेना के टैंक, तोपों, एयर डिफेंस गन और अन्य युद्ध उपकरणों के लिए गोला-बारूद की आपूर्ति का काम सरकार के स्वामित्व वाली ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड करती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सेना ने इस संबंध में रक्षा मंत्रालय से बात की है। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड द्वारा आपूर्ति किए गए गोला-बारूद के कारण दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे सेना का अपने रक्षा उपकरणों पर भरोसा कम हो रहा है। सेना ने ऑर्डिनेंस फैक्ट्री द्वारा गोला-बारूद की गुणवत्ता में ठीक से ध्यान नहीं दिए जाने के बारे में रक्षा उत्पादन सचिव अजय कुमार के सामने गंभीर चिंता जाहिर की गई है। गौरतलब है कि 19 हजार करोड़ रुपयों के सालाना टर्नओवर वाले ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के पास गोला-बारूद बनाने वाली कुल 41 फैक्ट्रियां हैं जो 12 लाख सैनिकों वाली भारतीय सेना को गोला-बारूद की आपूर्ति करती हैं।

ऑर्डिनेंस फैक्टरी बोर्ड के गोला-बारूद की गुणवत्ता में गिरावट से देश की युद्ध क्षमताओं पर गहरा असर पड़ता है। सेना की इस शिकायत पर रक्षा उत्पादन सचिव कुमार ने सेना से अपनी विभिन्न समस्याओं को प्रस्तुत करने को कहा था। 15 पेज के अपने पेपर में सेना ने बेहद गंभीर समस्याएं सामने रखी हैं। इसमें बताया गया है कि 105 एमएम की इंडियन फील्ड गन, 105 एमएम लाइट फील्ड गन, 130 एमएम एमए1 मीडियम गन, 40 एमएम एल-70 एयर डिफेंस गन और टी-72, टी-90 और अर्जुन टैंक की तोपों के साथ नियमित तौर पर दुर्घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके अलावा खराब क्वॉलिटी के गोला-बारूद के कुछ मामले 155 एमएम की बोफोर्स तोपों के मामले में भी सामने आए हैं। ऐसे ही कारणों से सेना लंबी दूरी के गोला-बारूद के परीक्षण से भी बच रही है। लेकिन प्रश्न है कि इन हालात को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या ये सरकार का दायित्व नहीं है? जाहिर है, वर्तमान सरकार ने ये जिम्मेदारी नहीं निभाई है।

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