जुबानी शिष्टाचार को अलविदा!


[EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 03 May, 2019 06:55 AM | Total Read Count 219
जुबानी शिष्टाचार को अलविदा!

इस आम चुनाव को इस दौरान हुई बदजुबानी के लिए भी याद रखा जाएगा। अफसोसनाक है कि यह सूरत बनाने के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। उन्होंने अपनी जुबान को बेलगाम कर रखा है। उसके जवाब में उनके विरोधी नेताओं ने भी शिष्टाचार को अलविदा कह दिया है। मसलन, ममता बनर्जी। मोदी ने कभी ममता बनर्जी के प्रधानमंत्री बनने के कथित सपने का मखौल उड़ाया है, तो कभी उन पर बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। ममता इसके जवाब में मोदी को ‘एक्सपायरी बाबू’से लेकर झूठा कह डाला है। देश में इससे पहले किसी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच ऐसा चुनावी घमासान संभवतः पहले कभी देखने को मिला। अब तो मोदी ने यह कह कर आम शिष्टाचार को पाताल में पहुंचा दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के 40 विधायक उनके संपर्क में हैं और 23 मई के बाद तमाम विधायक ममता का साथ छोड़ देंगे। पश्चिम बंगाल में हर रैली के साथ ममता पर उनके हमले लगातार तेज होते गए हैं। दूसरी ओर ममता की रैलियों में भी निशाने पर मोदी ही रहे हैं। प्रधानमंत्री और ममता बनर्जी ने बंगाल में अपना लोकसभा चुनाव अभियान भी एक ही दिन तीन अप्रैल को शुरू किया था। मोदी ने उस दिन पहले सिलीगुड़ी और कोलकाता की रैलियों में ममता पर हमले की शुरुआत की, तो ममता ने अपनी रैली में उन पर जवाबी हमले किए।

अपनी पहली चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राज्य के विकास की राह में ‘स्पीडब्रेकर’ यानी गतिरोधक करार देते हुए उन पर जम कर बरसे। उन्होंने कहा कि बंगाल के विकास के लिए ममता को सत्ता से जाना होगा। उन्होंने दीदी पर भी वामपंथियों की राह पर चलने का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी पर जवाबी हमला करते हुए केंद्र पर राज्य के मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। उनके मुताबिक भाजपा को पहले दिल्ली की गद्दी बचाने का प्रयास करना चाहिए। उसके बाद बंगाल की ओर देखना चाहिए। उन्होंने भाजपा को बंगाल में एनआरसी लागू करने की भी चुनौती दी है। ममता बार-बार कहती हैं कि देश हित में मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी व राजनीति से हटाना जरूरी है। मोदी के मुंह को टेप से सील कर देना चाहिए ताकि वह झूठ नहीं बोल सकें। यह महज एक मिसाल है। मोदी के ऐसे तू-तू मैं-मैं अन्य विपक्षी नेताओं के दूसरे नेताओँ के साथ भी हो रहे हैं।  

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