• [EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 07 May, 2019 07:13 AM | Total Read Count 281
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मजबूत नेताओं की असलियत

इस आम चुनाव में नरेंद्र मोदी खुद को मजबूत नेता के रूप में पेश कर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि देश उनके नेतृत्व में ही सुरक्षित रह सकता है। यह दीगर बात है कि पिछले पांच साल का अनुभव इस बात की तस्दीक नहीं करता। दरअसल, इस वक्त दुनिया के कई देशों में ऐसे नेता हैं, जो मोदी के पैटर्न पर राजनीति करते हैं और उसके आधार पर उन्होंने जनादेश हासिल किया है। लेकिन उन सबके साथ कॉमन बात यह है कि उनके नेतृत्व में उनके देशों की माली हालत बिगड़ी है। इस बारे में एक दिलचस्प अध्ययन हाल में सामने आया। इसके मुताबिक तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोवान हालिया दशकों में पहले नेता रहे, जिन्होंने इस रणनीति को आजमाया। वे खुद को ‘काला तुर्क’ बताते रहे हैं। यानी जनता के लिए काम करने वाला एक ऐसा व्यक्ति, जो उन्हें कथित गोरे तुर्कों से बचाएगा। यहां ‘गोरे तुर्क’ से उनका मतलब देश के सेक्यूलर एलिट से था। अर्दोवान ने अपने फायदे के लिए देश के संविधान में बदलाव किए हैं। प्रेस की स्वतंत्रता को लगभग खत्म कर दिया है। जनता के एक बड़े हिस्से में धार्मिक भावनाओं को भड़काया है। अर्दोवान जैसे नेता हमेशा दावा करते हैं कि वे देश की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित कर देंगे और दुनिया में उनके देश का दबदबा होगा। लेकिन असल में वे करते इसका ठीक उलटा हैं।  

गौरतलब है कि तुर्की में अर्दोवान के दामाद केंद्रीय बैंक का अध्यक्ष हैं। मगर देश में आर्थिक वृद्धि दर तेजी से गिरी है। ऐसा ही हंगरी में भी देखा जा सकता है। रूस में भी यही हाल है। बल्कि कुछ जानकारों का तो कहना है कि पतन चीन में भी शुरू हो गया है। ये प्रभावशाली नेता हमेशा ही दावा करते हैं कि उनकी राय असल में जनता की राय है। लेकिन उनका तरीका जनता की स्वतंत्रता पर भारी पड़ा है और अर्थव्यवस्था पर भी। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रशंसक हैं। संभवतः इसलिए कि उनकी भी सियासत की शैली वही है। अपने चुनाव प्रचार के दौरान भी ट्रंप ने पुतिन और अर्दोवान के स्टाइल में भाषण दिए और साफ तौर पर इनका उन्हें फायदा भी हुआ। फिलहाल, अमेरिका की अर्थव्यवस्था ठीक है, लेकिन आर्थिक गैर-बराबरी में वहां भारी इजाफा हुआ है। क्या इन हालात से भारत की तुलना नहीं की जा सकती? और क्या इसमें भारत के लिए कोई सबक नहीं छिपा है? 

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