• [EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 10 May, 2019 07:02 AM | Total Read Count 268
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कठघरे में जीडीपी आंकड़े

यह खबर किसी समझदार व्यक्ति का होश उड़ा देने वाली है। क्या भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के आंकड़े वास्तविक हैं, यह सवाल इससे और गहरा गया है। राष्ट्रीय सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) के अध्ययन से ऐसा लगता है कि इन आंकड़ों की विश्वसनीयता कठघरे में है। इस अध्ययन के बाद एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की जीडीपी गणना  में नई खामियां सामने आई हैं। ये अनेक नए सवालों को जन्म दे रही हैं। एनएसएसओ का ये अध्ययन 12 महीनों में हुआ। यह जून 2017 में खत्म हुआ है। लेकिन इसे अभी हाल में ही जारी किया गया है। इस अध्ययन में एमसीए-21 डाटा बेस का हिस्सा रही और जीडीपी की गणना में  इस्तेमाल हुईं करीब 36 फीसदी कंपनियों के बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं हो सकी। अध्ययन में ये भी पता चला कि इन कंपनियों का वर्गीकरण भी गलत ढंग से किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक कारपोरेट मामलों के मंत्रालय ने इन्हें ‘सक्रिय कंपनी’ के रूप में लिस्ट कर रखा है। कारपोरेट मंत्रालय किसी भी ऐसी कंपनी को जो पिछले तीन साल में एक बार भी टैक्स भरती है, सक्रिय कंपनी के रूप में दर्ज करता है। विशेषज्ञों के मुताबिक ये अध्ययन केंद्रीय सांख्यिकी ऑफिस (सीएसओ) का महत्त्व घटने को उजागर कर रहा है।

सीएसओ कभी पूरी दुनिया में अपनी गुणवत्ता और भारत के आधिकारिक आंकड़ों की विश्वसनीयता के लिए जाना जाता था। जानकार लगातार सीएसओ से कहते रहे हैं कि एमसीए-21 के आंकड़ों को राष्ट्रीय खातों में प्रयोग करने से पहले सत्यापित कर लिया जाना चाहिए। आरोप है कि उसने बिना किसी सत्यापन या बहस के नई सीरीज को अंतिम रूप दे दिया। एनडीए से पहले यूपीए सरकार में जीडीपी गणना के लिए इस तरीके से डेटा का प्रयोग नहीं होता था। 2015 से सीएसओ ने आंकड़ों के संग्रहण के लिए एमसीए-21 का प्रयोग करना शुरू किया। सीएसओ ने इसे कारपोरेट मंत्रालय की वेबसाइट से लिया। आलोचकों का कहना था कि जीडीपी के लिए उस डाटा बेस का प्रयोग करना जिसमें बहुत सारी फर्जी कंपनियां सूचीबद्ध है, ठीक नहीं होगा। इसमें कई कंपनियां तो ऐसी हैं जो सिर्फ कागज पर हैं। असलियत में उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। इन विशेषज्ञों का कहना था कि इस तरह के आंकड़ों को प्रयोग में लाने से पहले उन पर शोध होना चाहिए। मगर इसका पालन नहीं किया गया। इसके दीर्घकालिक परिणाम अति हानिकारक हो सकते हैं। 

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