निर्वाचन आयोग पर सवाल


[EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 01 May, 2019 07:13 AM | Total Read Count 153
निर्वाचन आयोग पर सवाल

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन- वीवीपैट और चुनाव आचार संहिता पर निर्वाचन आयोग का रुख अब खासा विवादास्पाद हो चुका है। धारणा बनी है कि वर्तमान निर्वाचन आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग की साख को अपूरणीय क्षति पहुंचा दी है। इस हाल में वैसे मसले भी बड़े शक और विवाद का कारण बन गए हैं, जो पहले भी मौजूद थे, लेकिन जिन पर तब किसी का ध्यान नहीं जाता था। अब ताजा खबर यह है कि ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत करने पर छह महीने की सजा और जुर्माने के प्रावधान को खत्म करने के लिए याचिका के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका मुंबई के एक वकील ने दायर की थी। चुनाव संचालन नियमावली की एक धारा 49-एमए के तहत अगर कोई मतदाता शिकायत करता है कि उसका वोट वीवीपैट से मिलान नहीं कर रहा है, तो उसे टेस्ट मिलान का एक मौका दिया जाता है। लेकिन अगर यह शिकायत गलत पाई गई, तो शिकायतकर्ता को छह महीने की सजा के साथ एक हजार रूपए जुर्माना भुगतना पड़ता है। आम चुनाव का चौथा चरण पूरा हो चुका है। लगभग हर चरण से ईवीएम में गड़बड़ियों की खबरें आती रही हैं। ईवीएम को लेकर 21 विपक्षी पार्टियों ने बीते दिनों एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ईवीएम मशीनों की 50 फीसदी वीवीपैट से मिलान की मांग की है।

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ निर्वाचन नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। याचिका में मोदी और शाह के खिलाफ चुनाव आयोग में दायर शिकायतों पर जल्द से जल्द कदम उठाने की मांग की गई है। 23 अप्रैल को तीसरे चरण के मतदान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आदर्श चुनाव आचार संहिता का बार-बार उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग में फिर शिकायत दर्ज कराई थी। कांग्रेस ने प्रधानंमत्री के प्रचार पर 72 घंटे का प्रतिबंध लगाने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि तीसरे चरण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मतदान केंद्र के बाहर रोड शो किया और साथ ही पत्रकारों के जरिए लोगों को संबोधित किया। अफसोसनाक यह है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। अपेक्षित यह होता है कि निर्वाचन आयोग खुद सक्रिय होकर कार्रवाई करे। निर्वाचन आयोग का ऐसा ना करना बेहद चिंताजनक है।

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