• [EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 08 May, 2019 07:22 AM | Total Read Count 225
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अजीब हाल में न्यायपालिका

सुप्रीम कोर्ट को लेकर अजीबो-गरीब हालत बन गई है। मामला चीफ जस्टिस पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप का है। इसकी सुनवाई जस्टिस बोबडे कमेटी ने की। उसने चीफ जस्टिस को क्लीन चिट दे दी। क्या इस मामले में कोई साजिश रची गई, इस मुद्दे की जांच भी होने वाली है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने जो प्रक्रिया अपनाई उसको लेकर अनेक सवाल उठे हैं। इसी सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ के हस्तक्षेप की खबर आई। अब यौन उत्पीड़न के आरोप के मामले में जस्टिस चंद्रचूड़ बोबड़े पैनल से मिले थे अथवा नहीं, अब यह बात पेचीदा होती जा रही है। पहले इस बारे में खबर अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने छापी। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने इसका खंडन किया। लेकिन उसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ने आज एक बार फिर लिखा कि जस्टिस चंद्रचूड़ ने मामले की जांच को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर बहस के लिए कोर्ट की पूर्ण बैठक बुलाने की मांग की है। अखबार के मुताबिक जस्टिस चंद्रचूड़ ने ये मांग जांच पैनल को बीती दो मई को लिखे गए पत्र में उठाई। इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया ने आज एक बार फिर जस्टिस चंद्रचूड़ द्वारा जांच पैनल को पत्र लिखने की बात पुष्ट की है। इन खबरों के मुताबिक जस्टिस चंद्रचूड़ ने जस्टिस बोबड़े से मिलकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने अपने पत्र में जांच समिति में एक बाहरी सदस्य को शामिल करने की सलाह भी दी थी। इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की तीन रिटायर्ड महिला जजों के नाम भी सुझाए थे।

उन्होंने जिन महिला जजों के नाम सुझाए, उनमें जस्टिस रूमा पॉल, सुजाता मनोहर और जस्टिस रंजना देसाई के नाम शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक ये पत्र जरूर जस्टिस चंद्रचूड़ के नाम से लिखा गया है, लेकिन ये केवल उनके निजी विचार नहीं थे। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 17 जजों की अनाधिकारिक सहमति थी। सुप्रीम कोर्ट में इस समय चीफ जस्टिस को मिलाकर कुल 22 जज हैं। इसका मतलब है कि पत्र को लिखने से पहले अधिकतम जजों से सलाह-मशविरा किया गया था। टाइम्स ऑफ इंडिया ने लगभग उसी तरह की खबर को प्रकाशित किया है, जिसमें इंडियन एक्सप्रेस ने जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस आर नरीमन के जांच पैनल से मिलने की बात कही गई। सार्वजनिक रूप से हो रही इन चर्चाओं सुप्रीम कोर्ट के जज भी परिचित होंगे। सवाल है कि वो ऐसे कदम क्यों नहीं उठा रहे हैं, जिनसे अटकलों पर रोक लग सके? 

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