• [EDITED BY : Super Admin] PUBLISH DATE: ; 15 May, 2019 08:00 AM | Total Read Count 47
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पाकिस्तान में नया संकट

पाकिस्तान के सामने एक नई चुनौती उपस्थित हुई है। इससे देश की सुरक्षा एजेंसियां सचेत तो हुई हैं, लेकिन उनके पास इससे निपटने की कोई तरकीब उसके पास है, ऐसा नहीं लगता। ताजा हालत इस बात का संकेत है कि कोई देश धर्मांधता की राह पर चलता है तो कैसे वह अपने लिए मुश्किलें खड़ी करता है। पाकिस्तान में अब एक  आंदोलन देश के पठान बहुल पश्चिमोत्तर इलाके में तेज हो गया है। इसके समर्थक इस बात पर गुस्सा जता रहे हैं कि दशकों तक उनके इलाके को मैदान-ए जंग की तरह इस्तेमाल किया गया। इसके लिए वे जिहादियों और पाकिस्तानी सेना दोनों को जिम्मेदार ठहराते हैं। पिछले दो साल में इस पख्तून तहफ्फुज मूवमेंट (पीटीएम) को खासा समर्थन मिला है। उसकी रैलियों में दसियों हजार लोग जमा हो रहे हैं। उसके समर्थक उस आतंकवाद विरोधी युद्ध की आलोचना करते हैं, जिसमें पाकिस्तान अमेरिका का मददगार बना था। उनके मुताबिक इसी की वजह से पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों ही देशों में इस युद्ध के दौरान पख्तून इलाकों को रौंदा गया। हाल में पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने पीटीएम के नेतृत्व पर देश के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि पीटीएम को भारत और अफगानिस्तान की खुफिया एजेंसियों से पैसा मिल रहा है। जबकि पीटीएम चाहती है कि आतंकवाद विरोधी युद्ध के नाम पर पख्तूनों का अपहरण और उनकी एक्स्ट्रा ज्यूडिशल हत्याएं बंद हों। इस मांग से हजारों पख्तून सरोकार रखते हैं। पीटीएम के समर्थक अपने इलाके की बर्बादी के लिए पाकिस्तानी सेना और इस्लामी कट्टरपंथियों दोनों को जिम्मेदार मानते हैं।

युद्ध से जूझ रहे अफगानिस्तान में अब भी बड़े इलाके पर अफगान और पाकिस्तान तालिबान कब्जा है, जिन्हें अफगान सरकार और अमेरिका के मुताबिक पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई से समर्थन मिल रहा है। अफगान सीमा से लगने वाले पाकिस्तान के इलाके अब भी हिंसा और अशांति झेल रहे हैं। इसकी वजह एक तरफ जिहादियों की गतिविधियां हैं तो दूसरी तरफ उनके खिलाफ पाकिस्तान सेना के अभियान। इससे वहां मौतें हो रही हैं और लोग इलाके को छोड़ कर भाग रहे हैं। 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद से ही पख्तून देश के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के दोनों तरफ बड़ी संख्या में पख्तून आबादी रहती है। पाकिस्तान शुरू से ही पख्तून बहुल एक अलग देश के विचार को खारिज करता रहा है।  मगर खुद उसकी करनी से अब ये मामला फिर उठ खड़ा हुआ है। 

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