भाजपा सिमटेगी 165 के आसपास!


[EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 12 May, 2019 08:06 AM | Total Read Count 1796
भाजपा सिमटेगी 165 के आसपास!

हां, पुराने आंकड़ों व जमीनी लड़ाई में विपक्षी एलायंस की केमिस्ट्री में इस सप्ताह अपनी गपशप, अपना आकलन है कि भाजपा 2014 में जीती282 सीटों से कोसों दूर है। भाजपा अपने बूते 165 सीट से अधिकतम 180 के बीच अटकेगी। इस बात का कोई मतलब नहीं है कि भाजपा के सहयोगियों याकि एनडीए की शिवसेना, जनता दल (यू) आदि की कितनी सीटें आ रही हैं। अपना मानना है कि उद्धव ठाकरे, नीतीश कुमार 23 मई की शाम भाजपा के 200 से कम आंकड़े पर तुरंत नरेंद्र मोदी को अंगूठा बताने वाला स्टैंड लेंगे। सहयोगी दलों के लिए मजबूरी तभी बनेगी जब भाजपा अपने बूते कम से कम 225सीट ले कर आए।  

इसलिए नंबर एक सवाल है भाजपा की खुद की सीट कितनी संभव है? दूसरा सवाल है नतीजे गणित-केमिस्ट्री की हकीकत पर आएंगे या ईवीएम मशीन की धांधली से निकलेंगे? धांधली संभव है तो कुछ भी हो सकता है। मैं ईवीएम से अखिल भारतीय याकि60-70 करोड़ मतदाताओं के वोटों में हेरीफेरी की आंशका से सहमत नहीं रहा हूं। बावजूद इसके विचार तो आता है कि नरेंद्र मोदी-अमित शाह और उनकी प्रोपेगेंडा मशीनरी 300 सीट जीतने का हल्ला बनाए हुए है तो ऐसा कैसे? जब 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव की सुपर भाजपा सुनामी में भी सपा-बसपा-रालोद के वोट यूपी में भाजपा से ज्यादा थे। तीनों पार्टियों के आज के एलायंस के वोटों के आगे भाजपा टिकती नहीं है तो कैसे अमित शाह कह रहे हैं कि भाजपा यूपी में 72 नहीं, बल्कि 74 सीटें जीतेगी। ऐसा अहंकार तो ईवीएम मशीन की धांधली से ही संभव है। 

हां, यूपी ही निर्णायक, टेस्ट केस है। यूपी की हकीकत में ही मोदी हवा के सारे तर्क फेल हैं। मैं कई बार आंकड़ों के साथ लिख चुका हूं कि 2014 व 2017 के विधानसभा चुनाव में जितने दलित, यादव, मुसलमान वोट सपा, बसपा को मिले थे, वह कोरवोट था। वे दलित-यादव-मुसलमान इधर से उधर डिग नहीं सकते। उलटे इनके साथ पीस पार्टी, कौमी एकता पार्टी, आप पार्टी, कांग्रेस को तब गए मुस्लिम वोट व पांच सालों में कन्वर्ट हुए मोदी विरोधी वोट भी अब एलायंस से जुड़ेंगे। इसलिए इस चुनाव में भाजपा के गढ़ नोएडा, आगरा से ले कर कानपुर, गोरखपुर में भी भाजपा उम्मीदवारों की हालात पतली है। यदि उस अनुसार वोटिंग है तो भाजपा की पंद्रह सीट यूपी में नहीं बनती। 

फिर भी मैं उस एक्स्ट्रीम में नहीं जा रहा हूं। मैं यूपी में भाजपा की 20 से 25 के बीच सीट संभव मान रहा हूं। आज के आकलन में लोकसभा 2014 व विधानसभा 2017 (यूपी में) चुनाव के वोट आंकड़ों और बाकी प्रदेशों में भी बाद के विधानसभा चुनावों के वोटों वइस चुनाव में भाजपा-एनडीए बनाम उसके खिलाफ बने एलायंस की पार्टियों के कुल वोट के आंकड़ों की गणित को ध्यान में रख कर विश्लेषण है। फिर लोकल जातीय-उम्मीदवार केमिस्ट्री, ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग के सार के साथ मोदी, मोदी हल्ले की 300 सीटों की हवाबाजी का हल्ला भी विचारा हुआ है। 

पहला सवाल क्या 2014की 282 सीटें भाजपा वापिस जीत रही है? ध्यान रहे 2014 में नरेंद्र मोदी की आंधी उत्तर भारत की बदौलत थी। इसमें भी तीन राज्यों की 134 सीटों में से उत्तरप्रदेश (71), बिहार (22) और झारखंड (12) में भाजपा ने खुद 105 सीटें जीती थीं। 105 सीटों के उस ब्लॉक में विरोधी एलायंस के चलते भाजपा के तोते उड़ने हैं। 

भाजपाई सीटों का दूसरा ब्लॉक राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और छतीसगढ़ का है। इनकी 91 सीटों में से 2014 के चुनाव में भाजपा ने 88 सीटें जीती थीं। इस ब्लॉक में भाजपा बनाम कांग्रेस में सीधा मुकाबला है। ध्यान रहे इन चारों राज्यों में बाद के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने या तो बराबरी की टक्कर दी या तीन राज्यों में भाजपा को हरा कर अपनी सरकार बनाई। इस ब्लॉक में भाजपा को कम से कम 27 सीटों का नुकसान है। 

तीसरा ब्लॉक महाराष्ट्र, कर्नाटक का है जहां कि 76 सीटों मेंसे भाजपा ने 2014 में खुद 44 सीटें जीती थीं। इस ब्लॉक में भी भाजपा को एलायंस से कड़ी टक्कर मिली है। 15 सीट का कम से कम नुकसान है। 

चौथा ब्लॉक पूर्वोत्तर, छोटे प्रदेशों, व केंद्र शासित 17 प्रदेशों की 49 सीटों का है। इस ब्लॉक में से पश्चिम बंगाल और ओड़िशा के दो राज्यों में भाजपा का ख्याल है कि बाकी जगह के नुकसान की भरपाई इन दो राज्यों से होगी। इस ब्लॉक में पश्चिम बंगाल, ओड़िशा और दक्षिण के राज्यों को भी जोड़ें तो ब्लॉक की कुल सीटों की संख्या 242 बनती है। 2014 के चुनाव में इसमें भाजपा की कोई 49 सीटें थीं। इसी ब्लॉक में से पश्चिम बंगाल और ओड़िशा में भाजपा 30 सीटों के जंप का ख्याल बनाए हुए है जो गणित की कसौटी में संभव नहीं है। अपना मानना है भाजपा इस ब्लॉक की अपनी मौजूदा 49 सीटों में से जो सीटें (असम, गोवा, चंडीगढ़, लक्षद्वीप, हरियाणा, दिल्ली आदि में एक-एक, दो-दो का जो नुकसान होगा) गंवाएगी उसकी भरपाई बंगाल, ओड़िशा से हो जाए तो गनीमत है। 

सो, गणित व केमिस्ट्री के अपने विश्लेषण में भाजपा का कुल आंकड़ा 165 सीट या मोटे तौर पर 160-180 सीटों के बीच अटकेगा। ऐसा भी उत्तर भारत के राज्यों में मोदी,मोदी की हवाबाजी से बनी उदारता के चलते है। 

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