• [EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 05 May, 2019 08:01 AM | Total Read Count 445
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मोदी, मोदी होने की गलतफहमी

भाजपा के नेता पिछली बार से ज्यादा बड़ी मोदी लहर बता रहे हैं। मतलब हर तरफ मोदी है और कोई नहीं है। न भाजपा के किसी चेहरे का मतलब है और न विपक्ष के किसी नेता का। लोकसभा का चुनाव मोदी के नाम पर लड़ा जा रहा है। क्या ममता बनर्जी और क्या नवीन पटनायक, किसी का कोई मतलब नहीं है। जो है, सो मोदी है। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि सत्ताधारी के पक्ष में लहर चल रही है। लोग इस सरकार को दोबारा चुनने के लिए बावले उतावले हो रहे हैं। ऐसा नैरेटिव पिछले पांच साल में नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने प्रयास करके बनवाया है। प्रचार के जरिए गांव-गांव तक मोदी का चेहरा और उनका नाम पहुंचाया गया है।

तभी आज भाजपा के नेता दावा कर कर रहे हैं कि इंदिरा गांधी के बाद मोदी पहले नेता हैं, जिनको गांवों, कस्बों और यहां तक कि जंगलों में भी जाना जा रहा है। केंद्र सरकार की किसी योजना पर मोदी का नाम नहीं है पर प्रचार के जरिए लोगों को बता दिया गया है कि उन्हें जो भी मिल रहा है वह मोदी दे रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को मिलने वाले घरों को मोदी का घर कहा जा रहा है। रसोई गैस का सिलेंडर मोदी का दिया हुआ है। खाता मोदी का खुलवाया हुआ है। शौचालय मोदी का बनवाया हुआ है। सर्जिल स्ट्राइक करने वाली सेना मोदी की सेना है और एयर स्ट्राइक करने वाली वायु सेना मोदी की वायु सेना है। इसलिए भाजपा के नेता कह रहे हैं कि लोग मोदी को वोट देंगे। 

खुद मोदी ने अपनी सभाओं में कहा है कि वे उम्मीदवार नहीं देखें, सीधे उनको वोट दें। अब तो भाजपा के उम्मीदवार खुद भी मोदी के नाम पर ही वोट मांग रहे हैं। लोग सांसदों से पांच साल का हिसाब पूछ रहे हैं तो सांसद मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के नाम पर वोट मांग रहे हैं ताकि देश सुरक्षित रहे। तभी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी पर तंज किया कि तिवारी अपने काम के नाम पर वोट नहीं मांग रहे हैं वे भी मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। 

झारखंड में भाजपा के चुनाव अभियान से बहुत करीब से जुड़े एक नेता ने कहा कि यह चुनाव अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव की तरह हो गया है। झारखंड प्रदेश के नेताओं, मंत्रियों का दावा है कि मुख्यमंत्री रघुबर दास की सरकार ने बहुत काम किया है। पांच साल लगातार सरकार काम करती रही है। पर वहां भी सरकार का कोई आदमी अपने काम पर वोट नहीं मांग रहा है। राज्य सरकार के काम की बजाय मोदी के नाम पर वोट मांगा जा रहा है। हर उम्मीदवार मोदी हो गया है। सहयोगी पार्टियों का मोदी के सामने संपूर्ण समर्पण है। नीतीश कुमार जैसा मजबूत प्रादेशिक क्षत्रप मोदीनामी ओढ़ कर मंच पर बैठा रह रहा है यह मान कर मोदी के नाम से चुनावी वैतरणी पार लग जाएगी। 

मोदी नाम के इस जाप से चुनाव जीत जाने की सोच भाजपा की सबसे बड़ी गलतफहमी साबित होने वाली है। खास कर अगले तीन चरण की बची हुई 169 सीटों पर। इन 169 सीटों में से 116 सीटें भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों की हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड की 73 सीटें हैं। मध्य प्रदेश की ज्यादातर सीटें इन तीन चरणों में हैं और राजस्थान की भी बची हुई 12 सीटों पर मतदान पांचवें चरण में होना है। इन पांच राज्यों में भाजपा की जीती हुई सीटें ही दांव पर हैं। मोदी के पक्ष में एक संयोग यह भी है कि आखिरी तीन चरण में कम कम सीटों पर मतदान है और प्रचार के लिए ज्यादा समय मिला हुआ है। सो, मोदी हर जगह जा रहे हैं और अपने नाम पर वोट मांग रहे हैं। 

पर इन पांचों राज्यों में मोदी के नाम का हल्ला चाहे जैसा भी हो, मतदान दूसरे फैक्टर पर डाले जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा और रालोद के गठबंधन परोक्ष रूप से कांग्रेस की मदद के कारण भाजपा पर भारी पड़ रहा है। पांचवें चरण में उत्तर प्रदेश की जिन सीटों पर पांचवें चरण में सोमवार को मतदान है उनमें सात सीटों पर सपा और बसपा का साझा वोट भाजपा से ज्यादा है और दो सीटें रायबरेली व अमेठी की हैं। यानी नौ सीटों पर विपक्ष आगे है और भाजपा की लड़ाई पांच सीटों पर सिमटी है। उत्तर प्रदेश की तरह बिहार और झारखंड में भी विपक्ष के गठबंधन का साझा वोट भाजपा से ज्यादा हो रहा है और मध्य प्रदेश व राजस्थान में छह महीने पहले बनी कांग्रेस की सरकारों के कारण मुकाबला कांटे का बना है। 

चारों तरफ मोदी, मोदी के हल्ले का एक नुकसान यह हो रहा है कि भाजपा की पूरी मशीनरी शिथिल हुई है। ध्यान रहे मोदी को पिछला चुनाव भाजपा ने लड़वाया था और इस बार मोदी भाजपा को लड़वा रहे हैं। यह बड़ा फर्क है, जिसे जमीन पर ज्यादा गंभीरता से महसूस किया जा सकता है। इस बार पार्टी नहीं लड़ रही है और न उम्मीदवार लड़ रहा है। दूसरी ओर विपक्षी पार्टियां और उनके उम्मीदवार ज्यादा ताकत लगा रहे हैं। भाजपा के उम्मीदवार मोदी का मुखौटा लगा कर प्रचार कर रहे हैं तो विपक्षी नेता अपने चेहरे पर लड़ रहे हैं। इसलिए विपक्ष का चेहरा कौन है यह बहस भी गौण हो गई है। विपक्ष की ओर से हर उम्मीदवार अपना अपना चुनाव लड़ रहा है इसलिए वह ज्यादा शिद्दत से लड़ रहा है।

मोदी को कुछ हद तक इसका अहसास है कि मोदी, मोदी के प्रचार में और हल्ले में कहीं वोटर घर न बैठ जाए। इसलिए अपने ही बनवाए हल्ले को विपक्ष की साजिश बताते हुए मोदी ने कहा कि विपक्ष प्रचार कर रहा है कि मोदी को प्रचार करने की क्या जरूरत है, भाजपा तो जीत रही है। असल में विपक्ष इसका प्रचार नहीं कर रहा है। खुद मोदी ने इसका प्रचार कराया था और अब यह प्रचार उलटा पड़ने लगा तो वे विपक्ष पर ठीकरा फोड़ने लगे। असल में मोदी का यह प्रचार उनके सोशल मीडिया के लंगूरों और शहरी व कस्बाई मध्य वर्ग के सवर्णों ने फैलाया है। जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। 

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