‘घरों में जलने वाले ईंधन भारत में वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारक’


[EDITED BY : Sitaram Gujjar] PUBLISH DATE: ; 19 April, 2019 03:20 PM | Total Read Count 119
‘घरों में जलने वाले ईंधन भारत में वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारक’

नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली के अनुसंधानकर्ताओं के एक अध्ययन के अनुसार घरों में जलने वाले लकड़ी, कंडे, कोयला और केरोसिन जैसे ईंधनों से होने वाले उत्सर्जन को रोककर भारत वायु प्रदूषण में बड़ी कमी ला सकता है और एक साल में करीब 2,70,000 लोगों की जान बचा सकता है।

‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि उद्योगों या वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कोई बदलाव किये बिना उपरोक्त स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन पर लगाम कसकर वायु प्रदूषण का औसत स्तर देश के वायु गुणवत्ता मानक से कम हो सकता है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के साज्ञिक डे समेत अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि घरों में ईंधन के इस तरह के स्रोतों का उपयोग कम करके वायु प्रदूषण से जुड़े मौत के मामलों में भी करीब 13 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। यह आंकड़ा एक साल में करीब 2,70,000 लोगों के समतुल्य होगा। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया, बर्कले के प्रोफेसर किर्क आर स्मिथ के मुताबिक, ‘‘घरों में जलने वाले ईंधन भारत में वायु प्रदूषण के सबसे बड़े कारक हैं।’

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