माया, ममता के दहले से ढेर मोदी-शाह!


[EDITED BY : Hari Shankar Vyas] PUBLISH DATE: ; 15 May, 2019 07:13 AM | Total Read Count 461
माया, ममता के दहले से ढेर मोदी-शाह!

मायावती और ममता बनर्जी का कहा दिमाग को झिंझोड़ गया। मायावती ने नरेंद्र मोदी के निजी जीवन, उनकी पत्नी, भाजपा की विवाहित औरतों के घबराने का जो लिखित बयान पढ़ा उसने यह संभावना मिटा दी है कि नरेंद्र मोदी 23 मई के नतीजों के बाद उनके दरवाजे पर एलायंस की याचना करें। इनका कहा खुली हिम्मत का प्रमाण है तो नरेंद्र मोदी की भाषा का भी नतीजा है। यह मोदी-शाह के इस अहंकार का नतीजा भी है कि भला उनसे कौन जीत सकता है। मायावती, ममता बनर्जी या राहुल गांधी किस खेत की मूली हैं, जो नरेंद्र मोदी से मुकाबला कर सकें। मतलब नरेंद्र मोदी चुनाव जिताने वाली तमाम तरह की कलाओं से प्रवीणबाहुबलीहैं तो विपक्ष की क्या औकातजो लड़े!

निःसंदेह चुनाव 2019 का यह धुव्र सत्य है कि लड़ाई तूफान व दीये की है। ममता, मायावती व राहुल गांधी आदि की औकात दीये जितनी है। इन्हें चुनाव से पहले मोदी-शाह ने हर तरह से बांधा। उन्हें खर्च, पैसे में असहाय बनाया। उनमें फूट डालने, झगड़े कराने की दस तरह की रणनीतियां बनीं। मतलब नरेंद्र मोदी ने रामायण के पात्र बाली की तरह अपनी वह शक्ति दर्शाई कि दुश्मन उनके सामने मैदान में खड़ा हो उसके पहले ही उसकी आधी शक्ति खत्म! पुलवामा में आंतकी हमले से ले कर पश्चिम बंगाल में जयश्री राम के नारे को चुनावी मुद्दा बनाने के मोदी-शाह के तमाम हथकंडे विपक्ष की ताकत को सोख लेने की चतुराई के वे पहलू हैं, जिसका इकलौता मकसद था विपक्ष जान भी न पाए और उसकी मौत उसके अपने हाथों हो।

तभी क्या नहीं हुआ इस सबके लिए! उत्तरप्रदेश में सपा-बसपा-रालोद एलायंस से कांग्रेस को जुड़ने नहीं दिया गया। वाराणसी से प्रियंका गांधी वाड्रा को चुनाव नहीं लड़ने देने के लिए बसपा से वीटो हुआ। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के जरिए ममता बनर्जी को जकड़ा गया। पश्चिम बंगाल को केंद्रीय सुरक्षा बलों की छावनी बना दिया गया। विपक्षी उम्मीदवारों, मुख्यमंत्रियों के चुनावी खर्च के बंदोबस्तों पर छापेमारी हुई। राहुल गांधी को चोर बोलने से रोकने के बंदोबस्त हुए। वायुसेना का कटोरा ले कर वोट मांगा गया। मतलब वे सभी काम हुए, जिससे विपक्ष के दीये की फड़फड़ाती बाती लोगों में विश्वास बना ही नहीं सके कि उसमें जलते रहने, जिंदा रहने, चुनाव लड़ने का दम है!

बावजूद इसके कमाल देखिए, मायावती कैसे बोलने लगी हैं! ममता बनर्जी कैसे अमित शाह, नरेंद्र मोदी को गालियां दे रही हैं! तभी अरूण जेटली ने नरेंद्र मोदी की तिलमिलाहट बतलाते हुए दो टूक अंदाज में कहा है कि मायावती तो सार्वजनिक जीवन में रहने को लायक ही नहीं हैं। वे अनफिट हैं। वे प्रधानमंत्री बनने को लेकर अटल (याकि जिद्द पाले हुए हैं) हैं जबकि उनका शासन, नैतिकता व राजनीति के सबसे निचले स्तर पर है। मतलब मोदी-शाह-जेटली मान रहे हैं कि मायावती की महत्वकांक्षा प्रधानमंत्री पद की उड़ान भर रही है। सो, वे उनके गेमप्लान में अनफिट हैं। अब तो मायावती को सार्वजनिक जीवन, राजनीति से खत्म करना है।   

हां, मायावती का नरेंद्र मोदी पर 13 मई का बयान राहुल गांधी के नरेंद्र मोदी चोर की हल्लेबाजी से ज्यादा मारक व गंभीर है। ऐसे ही उस दिन तृणमूल कांग्रेस, ममता बनर्जी ने अमित शाह को घटिया व्यक्ति,अर्धशिक्षित करार दे कर सार्वजनिक तौर पर जता दिया है कि ममता बनर्जी कुछ भी करेंगी लेकिन नरेंद्र मोदी के एलायंस का अपने को हिस्सा नहीं बनाएंगी। वे पूरा दम लगा कर कोशिश करेंगी कि मोदी वापस प्रधानमंत्री नहीं बनें।

आप पूछ सकते हैं नरेंद्र मोदी को इनके समर्थन की भला जरूरत कहां है?यानी उत्तरप्रदेश और पश्चिम बंगाल में नरेंद्र मोदी की आंधी है और अमित शाह का यह कहा ब्रह्म वाक्य है कि भाजपा यूपी में 74 सीट और बंगाल में 23 सीट जीत रही है तो यह मान लें कि अरूण जेटली ने मायावती को अनफिट करार दिया है तो 23 मई को मायावती की राजनीति और उनका सार्वजनिक जीवन खत्म है!

अब दंभ, अहंकार की इन तूफानी बातों का अपने पास जवाब नहीं है। मैं भी हर वक्त, हर क्षण इसी तूफानी दबाव में जी रहा हूं कि मेरा लिखना, मेरी पत्रकारिता खत्म है23 मई को।23 मई को मुझे मालूम होगा यूपी के दलित, मुसलमान, यादव सब मोदी को वोट देते हुए तो कंगले बंगाली, गुजराती मोदी-शाह की अधीनता स्वीकारते हुए नारा लगाते मिलेंगे हर, हर मोदी! दुनिया जानेगी कि गणेश की मूर्तियों को दूध पिलाने वाले भक्तों ने निकलवा दी मोदी की 300 सीटों की आंधी!

बहरहाल, वह सब छोड़ें। तर्क की बात है कि मायावती और ममता बनर्जी की तूफान के आगे भला हिमाकत कैसे? इसलिए क्योंकि ये जनता को अपने साथ देख रही हैं। मैं पहले भी लिख चुका हूं और थीसिस है कि गुजरात विधानसभा से बाद के तमाम चुनावों में और इस चुनाव में भी जनता चुनाव लड़ रही है न कि विपक्ष। कांग्रेस और विरोधी पार्टियों व नेताओं ने अपने पांव कुल्हाड़ी मारने या मोदी-शाह की चतुराई को बूझ नहीं सकने की गलतियों के बावजूद मोदी-शाह के छक्के छुड़ाए हैं तो वजह जनता है। जनता जो मौन है और जिसके अनुभव पांच सालोंमें पके हैं। जनता ने ही पश्चिम बंगाल और उत्तरप्रदेश में मोदी-शाह को हताशा-गुस्से के उस मुकाम पर पहुंचाया है, जिससे् इनके मुंह से अपशब्द निकले और मायावती व ममता ने नहले पर दहला मारा। प्रधानमंत्री के पद को औकात दिखा दी। सोचें, नरेंद्र मोदी ने सीबीआई, ईडी से ममता व मायावती को कैसे-कैसे डराया और आज क्या दोनों महिला नेत्रियां नरेंद्र मोदी व अमित शाह को सार्वजनिक मंचों पर नंगा बना रही हैं!

मोदी-शाह ने बाली की तरह दुश्मन को लड़ाई से पहले अधमरा बनाने की शातिरता,चतुराई में पश्चिम बंगाल की 42 सीटों को सात चरणों में बांटा। हर चरण में कुछ-कुछ सीटों की लड़ाई ऐसे थकाने वाली बनाई, जिससे ममता एक-दो चरण बाद दम तोड़ दें। मोदी-शाह के पैसे, प्रचार, मशीनरी में क्योंकि सातों चरण दमखम से लड़ना संभव है तोमोदी-शाह ने सोचा इतना दम ममता नहीं दिखला सकतीं। लेकिन उलटे ममता अकेले पदयात्रा से दहाड़ रही हैं और मोदी-शाह हांफ रहे हैं। चुनाव आयोग में भाजपा रो रही है कि हर राउंड में तृणमूल बूथों पर बलात कब्जा कर अपने वोट डलवा रही है। मतलब सोचा क्या था और हुआ क्या! ममता के लिए सातों चरणों का प्रोग्राम सहूलियत वाला हुआ। यदि बंगाल में एक साथ या दो चरणों में चुनाव होता तो एकमुश्त 42 या 21-21 सीटों के बूथ मैनेज करना तृणमूल के लिए आसान नहीं होता। ऐसे ही उत्तरप्रदेश में चरणवार लंबा चुनाव एलायंस के लिए फायदेमंद हो रहा है तो मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में भी अधिक चरणों में मतदान की मोदी-शाह की चतुराई से कांग्रेस को फायदा है। कांग्रेस सरकार, नेता फुरसत से भोपाल निपटा इंदौर में ताकत लगाने की सहूलियत पाए हुए हैं। 

लाख टके का सवाल है कि पुलवामा यदि मोदी-शाह की ग्रैंड चतुराई से तात्कालिक आंधी बनवाने वाला था तो चुनाव आयोग से इतना लंबा, इतने चरणों का चुनाव प्रोग्राम क्यों बनवाया? आंधी बन गई थी तो फटाफट अप्रैल में उसे कैश करा लेना था।लेकिन या तो कांफिडेंस नहीं था या यह मुगालता, अहंकार था कि मोदी-शाह को भाषणों के जितने दिन मिलेंगे उतने वोट पकेंगे। सर्वाधिक लंबा उत्तरप्रदेश व बंगाल का प्रोग्राम बनाया और मोदी तो मोदी खुद अमित शाह भी गलतफहमी में भाषण, रोड शो करते फिर रहे हैं कि उनसे भाजपा के वोट बनते हैं! वे भी बहन माया और ममता दीदी को लड़ाई के अधबीच बाली की ताकत से अधमरा बना सकते हैं!

सो, चतुराई, अहंकार ले डूबा और सातवें चरण से ठीक पहले मायावती व ममता बनर्जी दोनों ने बता दिया कि हम जीत रहे हैं और हमें परवाह नहीं मोदी व शाह की! तभी देखना है 23 मई के दिन मायावती व ममता अनफिट होती हैं या ये दो ऩेत्रियां मोदी-शाह-जेटली को अनफिट करार देती हैं!

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